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प्रदेश कांग्रेस की पहली पंक्ति के नेता गायब, न रैली न धरना और न कोई दौरा...

चुनाव नजदीक है और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यप्रणाली सुधार की ओर नहीं है।

भूमिगत क्यों हो गए कांग्रेस के नेता

भोपाल | चुनाव नजदीक है और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यप्रणाली सुधार की ओर नहीं है। कमलनाथ नहीं जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था तो अपने साथ चार कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की और दिल्ली में भजन रखने वाले मध्य प्रदेश के नेताओं को सक्रिय किया। कुछ दिनों तक तो सब ठीक-ठाक चला लेकिन आज हालात कांग्रेस के बदले हुए हैं केवल टिकट के दावेदारों के अलावा और कांग्रेस में कोई मेहनत करता नहीं दिख रहा है। उन नेताओं की करें जिनके ऊपर प्रदेश में कांग्रेस को जिताने की जिम्मेदारी है तो वह अपने-अपने क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। रही बात चारों कार्यकारी अध्यक्ष इनकी नियुक्ति इसलिए की गई थी ताकि पूरी मध्य प्रदेश के 51 जिलों को जातिगत राजनीतिक और सामाजिक समीकरण से लैस किया जा सके।

लेकिन कांग्रेस की कवायद फेल होती दिख रही है। चारों कार्यकारी अध्यक्ष अपनी-अपनी विधानसभाओं में ही मशगूल है उनको डर है कि अगर टिकट मिल गया तो यहां हालत खराब नहीं हो जाए। बात दिग्गज नेताओं दिग्विजय सिंह सुरेश पचोरी कांतिलाल भूरिया अब ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं हां उनके समर्थक जरूर अपनी अपनी विधानसभा क्षेत्रों में टिकट की दावेदारी कर रही हैं। दरअसल यह पूरा समीकरण नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की मां के कोर्ट जाने के बाद गड़बड़ाया है। इस प्रकार के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की ही नहीं बल्कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जमकर फजीहत हुई भारतीय जनता पार्टी ने इससे बड़ा मुद्दा बनाया और प्रदेश की महिला कार्यकर्ताओं ने अजय सिंह की केरवा कोठी पर जा कर प्रदर्शन किया और अजय सिंह को उनकी मां का हक देने की नसीहत दी इस पूरे मामले के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई।

कुल मिलाकर फिलहाल में कांग्रेस की स्थिति मध्यप्रदेश में बहुत मजबूत नहीं खाई जा सकती है हां यह जरूर है कि जहां जहां बड़े नेता हैं वहां उन इलाकों की विधानसभाओं में वह अपने अपने चहेतों को टिकट दिलवाने के लिए दिल्ली से भोपाल तक की जद्दोजहद जरूर कर रहे हैं। उधर पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव अभी वर्तमान नेतृत्व से खुश नहीं है हाल ही में दिग्विजय सिंह पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव की पुण्यतिथि पर उनके घर गए थे। वहां उन्होंने अरुण यादव को मनाने का प्रयास किया और कई तरह की राजनीतिक नसीहतें भी दी लेकिन फिलहाल यह मामला भी पटरी पर आता हुआ नहीं दिख रहा है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता अभी भी दुर्गा जी को छोड़कर पार्टी को जिताने के लिए भरसक प्रयास नहीं कर रहे हैं।


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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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