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आर्थिक बदहाली ने रोका प्रदेश का विकास

आर्थिक बदहाली ने रोका प्रदेश का विकास

नाबार्ड के 1000 करोड़ अटके, विकास योजनाओं पर लगा ग्रहण

भोपाल/राजनीतिक संवाददाता। प्रदेश सरकार के नौकरशाहों की लापरवाही से नाबार्ड के लगभग एक हजार करोड़ रुपए अटक गए हैं। यह राशि नाबार्ड द्वारा प्रदेश में कराए गए विकास कार्यों के भुगतान की है। भुगतान अटकने से दर्जनों विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और सैकड़ों विकास के काम अधूरे पड़े हुए हैं। जानकारी के अनुसार नेशनल बैंक आफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक नाबार्ड ने प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गांव के विकास कार्यों के लिए विभिन्न विकास योजनाओं पर काम किया है। इसमें ग्रामीण हाट बाजारों का विकास, सडक़ों का निर्माण, पुल, पुलियों का निर्माण, पेयजल व्यवस्था, कृषि एवं उद्यानिकी परियोजनाओं संबंधी विकास कार्य आदि शामिल हैं। इन परियोजनाओं पर मप्र में भाजपा शासनकाल में विकास योजनाओं पर कार्य किए गए हैं। इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए नाबार्ड के फंड से राशि का खर्च कर दिया गया है।

बजट न होने से बढ़ी दिक्कत

इसके भुगतान के लिए नाबार्ड द्वारा फाइल राज्य सरकार के पास भेजी गई थी। यह फाइल पिछले लगभग एक वर्ष से भुगतान के लिए राज्य सरकार के पास पेंडिंग पड़ी हुई है। राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं होने से नाबार्ड को सरकार ने अब तक भुगतान नहीं किया है। इसके लिए राज्य सरकार के बजट का इंतजार किया जा रहा था लेकिन लोकसभा चुनाव नजदीक होने और बजट के एक महीने पहले ही मप्र में नई सरकार बनने के कारण बजट टाल दिया गया।

सैकड़ों कार्य अधूरे पड़े

नाबार्ड का भुगतान अटकने से राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विकास कार्य संबंधी परियोजनाओं का काम अटका पड़ा है। इनमें से अनेक परियोजनाओं में सैकड़ों कार्य अपूर्ण की स्थिति में हैं। जिससे ग्रामीण विकास की सरकार की अवधारणा भी पूरी नहीं हो पा रही है। नाबार्ड के अधिकारी भी भुगतान के लिए पत्र लिख चुके हैं।

अभी एक साल भुगतान अटकने की आशंका

अब राज्य सरकार का बजट निर्धारित समय के लगभग छह महीने बाद जून जुलाई के महीने में आने की उम्मीद है। नया बजट आने पर ही राज्य सरकार नाबार्ड का पेमेंट करने की स्थिति होगी। हालांकि फिर भी पेमेंट बजट के तत्काल बाद आना मुमकिन नहीं लग रहा है। ऐसे में लगभग एक साल और नाबार्ड का भुगतान अटकने की आशंका है।

Naveen ( 1696 )

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