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कैसे सुधरे व्यवस्था: पुलिस विभाग में अधिकारियों का टोटा

कैसे सुधरे व्यवस्था: पुलिस विभाग में अधिकारियों का टोटा

भारतीय पुलिस सेवा के प्रदेश में 305 पद, लेकिन मौजूद 260 अधिकारी, उप पुलिस अधीक्षक और निरीक्षकों की भी भारी कमी

भोपाल/प्रशासनिक संवाददाता। भारतीय पुलिस सेवा के अगले साल होने वाले संवर्ग परिवर्तन में पुलिस मुख्यालय ने भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के 54 पद मांगे हैं। वर्तमान में संवर्ग पदों की संख्या 166 है, जबकि नॉन संवर्ग पद मिलाकर भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के स्वीकृत 305 पद हैं। इनमें मात्र 260 अधिकारी ही उपलब्ध हैं। भारत सरकार द्वारा उक्त पदों को स्वीकृति दी जाती है तो राज्य पुलिस सेवा के 31 अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग में पदोन्नति मिलेगी।

सूत्रों के मुताबिक विभाग में भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के 166 पद स्वीकृत हैं। संवर्ग और नान संवर्ग पदों को मिलाकर 305 पद स्वीकृत हैं, जबकि फिलहाल 260 अधिकारी ही उपलब्ध हैं। 13 भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ हैं। पुलिस महानिदेशक के संवर्ग और नॉन संवर्ग पद मिलाकर 12 पद हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के जितने संवर्ग पद हैं, उनसे कई गुना अधिक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पदस्थ हैं। लगातार पदोन्नति से अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के नाम संवर्ग पदों की संख्या बढ़ रही है। दूसरी तरफ पुलिस महानिरीक्षक और उप पुलिस महानिरीक्षक के संवर्ग और नॉन संवर्ग पदों की संख्या में कमी आ रही है। पुलिस महानिरीक्षक और उप पुलिस महानिरीक्षक वर्ग के अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने संवर्ग परिवर्तन में इतने पद मांगे हैं। हालांकि भारतीय पुलिस सेवा के पुलिस अधीक्षक वर्ग के अधिकारियों की संख्या पर्याप्त है। इधर राज्य पुलिस सेवा के स्वीकृत पद 1275 हैं। इनमें 266 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वर्ग के और शेष उप पुलिस अधीक्षक वर्ग के पद शामिल हैं।

दो साल पिछड़ा संवर्ग परिवर्तन

सूत्रों के मुताबिक पिछली बार 2013 में भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग परिवर्तन होना था, लेकिन 2015 में हो पाया। अगर 2013 में संवर्ग परिवर्तन किया जाता तो नियमानुसार पांच साल में होने वाले संवर्ग परिवर्तन के तहत 2018 में संवर्ग परिवर्तन होना था, लेकिन अब यह जनवरी 2020 की स्थिति में किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय द्वारा संवर्ग परिवर्तन का प्रस्ताव गृह विभाग भेज दिया गया है। यहां पदों की गणना के बाद यह प्रस्ताव केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। वहां इस पर विचार मंथन के बाद संवर्ग परिवर्तन को स्वीकृति दी जाएगी। संवर्ग परिवर्तन के बाद बढऩे वाले भारतीय पुलिस सेवा के पदों को संघ लोकसेवा आयोग से चयनित अधिकारी मिलेंगे।

राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी होंगे पदोन्नत

संवर्ग परिवर्तन में राज्य पुलिस सेवा के 31 पद मांगे गए हैं। इन पदों को स्वीकृति मिलने पर राज्य पुलिस सेवा 1995 बैच के भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति से वंचित करीब 15 अधिकारियों समेत 1996 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बन जाएंगे। 1995 बैच के राज्य पुलिस सेवा में करीब 55 अधिकारी हैं। इनमें वरिष्ठता के आधार पर 32 अधिकारी भारतीय पुलिस सेवा बन चुके हैं, जबकि आठ अधिकारियों को इस साल भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति दी जाना है। बड़ा संवर्ग होने के कारण एक ही संवर्ग के अधिकारियों को वरिष्ठता में पांच से छह साल का अंतर आ गया है। संवर्ग के वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा बने चार से पांच साल होने जा रहे हैं, तो कनिष्ठ अधिकारियों को 2020 तक भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति का इंतजार करना पड़ेगा। इस तरह 25 साल की सेवा के बाद राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी ,भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी बन सकेंगे।

पदोन्नति के नियम

राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नत होने वाले अधिकारियों की साल में होने वाली सेवानिवृत्ति से रिक्त होने वाले निर्धारित पद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) पर वरिष्ठ राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को पदोन्नति दी जाती है। पहले जहां सात से आठ साल में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति मिल जाती थी और वे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक तक बन जाते थे तो अब भारतीय पुलिस सेवा पदोन्नति में 24 से 25 साल की समयावधि लगने से इस संवर्ग के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी उप पुलिस महानिरीक्षक तक नहीं बन पा रहे हैं। इसका कारण उप पुलिस अधीक्षक वर्ग में बड़े बैच आना शामिल है।

सात संभागीय इकाई, डीएसपी 10

ईओडब्ल्यू के भोपाल मुख्यालय समेत प्रदेश में सात संभागीय इकाइयां हैं और वर्तमान में मात्र 15 निरीक्षक और 10 उप पुलिस अधीक्षक ही उपलब्ध हैं। मुख्यालय को छोडक़र अन्य इकाइयों में तो एक-एक उप पुलिस अधीक्षक-निरीक्षक ही उपलब्ध हैं। सागर संभागीय इकाई में तो उप पुलिस अधीक्षक ही नहीं, निरीक्षक तक नहीं हैं। लंबे समय बाद यहां पुलिस अधीक्षक को पदस्थ किया जा रहा है।

लोकायुक्त संगठन की हालत खराब

लोकायुक्त संगठन में उप पुलिस अधीक्षक के स्वीकृत पद 33 हैं, जिनमें 17 अधिकारी ही उपलब्ध हैं। इसी तरह निरीक्षकों के स्वीकृत पद 51 हैं, इनमें 37 निरीक्षक ही उपलब्ध हैं। उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षकों की भी कमी बनी हुई है। लोकायुक्त की भी सात संभागीय इकाइयां हैं। इनमें भोपाल मुख्यालय की इकाई शामिल है।

एसटीएफ की उज्जैन इकाई बंद

बल की कमी के चलते एसटीएफ की उज्जैन संभागीय इकाई तो बंद होने की कगार पर पहुंच गई है तो इंदौर में साइबर क्राइम सेल के पुलिस अधीक्षक के पास एसटीएफ पुलिस अधीक्षक का प्रभार है। सबसे ज्यादा हालत तो सीआईडी की खराब है। यहां उप पुलिस अधीक्षक और निरीक्षकों के जितने पद स्वीकृत हैं, उनसे आधे अधिकारी भी उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों की कमी से सनसनीखेज तथा अन्य अपराधों की जांच समय पर नहीं हो पा रही है। समस्त जांच एजेंसियों के अधिकारी पुलिस मुख्यालय और राज्य शासन को अधिकारी उपलब्ध कराने पत्र लिख रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की कमी से यह स्थिति बनी हुई है।

जांच एजेंसियों में बनी रहेगी डीएसपी व निरीक्षकों की कमी

लोकायुक्त पुलिस संगठन, ईओडब्ल्यू, सीआईडी और एसटीएफ में उप पुलिस अधीक्षक वर्ग तथा निरीक्षकों वर्ग के अधिकारी की अत्यधिक कमी बनी हुई है। दो साल से अधिक समय से उप पुलिस अधीक्षक वर्ग तथा निरीक्षकों वर्ग के पदों पर पदोन्नति नहीं होने से यह स्थिति बनी हुई है। इन जांच एजेंसियों में लोकसभा चुनाव के बाद ही अधिकारी उपलब्ध हो सकेंगे। हालांकि लोकायुक्त संगठन, ईओडब्ल्यू में संभागीय इकाइयों में पुलिस अधीक्षकों के सभी पदों पर अधिकारियों की पदस्थापना कर दी गई है। एसटीएफ भोपाल में भी पुलिस अधीक्षक को पदस्थ कर दिया गया है। उज्जैन और इंदौर की एसटीएफ की संभागीय इकाइयों में पुलिस अधीक्षक वर्ग के पद रिक्त हैं। इधर लोकायुक्त संगठन में हाल ही में प्रतिनियुक्ति पर आए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वर्ग के अधिकारी को संभागीय इकाई में पुलिस अधीक्षक बना दिया गया है। ईओडब्ल्यू में भी तीन अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए हैं। इन्हें सागर, जबलपुर और इंदौर संभागीय इकाई में पदस्थ किया जाएगा। इस तरह इन इकाइयों में पुलिस अधीक्षक वर्ग के अधिकारी तो पर्याप्त संख्या में मिल गए हैं, लेकिन चारों ही जांच एजेंसियों में उप पुलिस अधीक्षक वर्ग और निरीक्षकों की अत्याधिक कमी बनी हुई है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण अब चुनाव तक ये पद रिक्त ही रहेंगे। इससे इन इकाइयों के अपराधों की विवेचना प्रभावित रहेगी।

Naveen ( 1696 )

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