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नाथ के सर्वे ने छुड़ाया कांग्रेस का पसीना

नाथ के सर्वे ने छुड़ाया कांग्रेस का पसीना

कांग्रेस को नहीं मिल रहे भाजपा के विकल्प, जातीय अंक गणित ने बिगाड़ा समीकरण

विशेष संवाददाता भोपाल

मध्य प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी के सर्वे की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंप दी गई है। खुलासा हुआ है कि पुलवामा हमले और उसके बाद केन्द्र सरकार के निर्देश पर भारतीय वायु सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद इस सर्वे रिपोर्ट में प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति बेहद नाजुक बताई गई है। कांग्रेस संगठन और मुख्यमंत्री कमलनाथ की ओर से गोपनीय रुप से कराए गए इस सर्वे में भाजपा को 2014 का प्रदर्शन दोहराते बताया गया है। यह रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस के अन्दर सन्नाटा छा गया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के निकटस्थ सूत्रों ने इस तरह की किसी सर्वे रिपोर्ट की सत्यता से इंकार किया है। साथ ही कहा कि हर चुनाव से पहले राजनीतिक दल सर्वे कराते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन कांग्रेस द्वारा इस तरह का कोई सर्वे नहीं कराया गया है। उनका मानन है कि कांग्रेस प्रदेश में सरकार चला रही है और कांग्रेस के संगठन ने अपनी स्थिति को विधानसभा चुनाव की तुलना में बेहतर बनाया है। लोकसभा का आगामी चुनाव कांग्रेस की केन्द्र में सरकार बनाने में तो सहायक होगा ही, साथ ही प्रदेश की सरकार को भी स्थिरता प्रदान करेगा।

कांग्रेस के इस दावे के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा जनवरी माह में जो सर्वे कराया गया था, उसकी तुलना में ताजा सर्वे ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस संगठन द्वारा चलाई जा रही उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को झटका लग सकता है। कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता राजधानी भोपाल की सीट है जहां कांग्रेस बीते 30 साल से जीत की तलाश कर रही है। कांग्रेस संगठन के सूत्रों का कहना है कि प्रदेश की राजधानी की सीट जीतना पार्टी के लिए मुश्किल रहा, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस राजधानी की इस सीट से ऐसा उम्मीदवार उतारेगी, जो सभी को चौंकाएगा।

दिग्विजय पर दांव खेल सकती है कांग्रेस

संभावना व्यक्त की जा रही है कि कांग्रेस भोपाल सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मैदान में उतार सकती है। दो मार्च को दिल्ली में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन के लिए एक बैठक आयोजित की जा चुकी है, हांलाकि इस बैठक का कोई कारगर परिणाम सामने नही आया है, परन्तु प्रदेश की कुछ सीटों पर एक-एक नाम होने के कारण इन सीटों पर अंतिम सहमति जरुर बन गई है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में हुए मंथन में भोपाल सीट पर दिग्विजय सिंह ही उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले दिग्विजय सिंह राजगढ़ से सांसद रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्हें इन दोनों सीटों पर इस बार फैसला लेना है कि वह कहां से चुनाव लडऩा चाहते हैं। वहीं राजधानी की इस सीट पर एक और नाम दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित का सामने आया है।

11 मार्च को जारी हो सकती है सूची

कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली सूची 11 मार्च को जारी हो सकती है। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक दिल्ली में 11 मार्च को होनी है। इसमें लोकसभा प्रत्याशियों के नाम का एलान किया जाना है। इससे पहले प्रत्याशियों के नाम तय करने को लेकर कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक 7 मार्च को दिल्ली में होगी। बैठक में सभी 29 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर मंथन होगा।

नाथ का सर्वे भाजपा के पक्ष में

मध्य प्रदेश में एयर स्ट्राइक के बाद राजनीति के माहौल को जानने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सर्वे कराया है। नाथ द्वारा इस सर्वे को कराने के पीछे मंशा भाजपा सांसदों की वर्तमान स्थिति का सही आंकलन करना रही थी। सर्वे की शुरुआती रिपोर्ट में खुलासा हुआ तो मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित कांग्रेस के अन्य क्षत्रपों के पसीने छूट गए है। सूत्र बताते हैं कि इस सर्वे में प्रदेश में भाजपा को बढ़त दिखाई गई है।

मंत्री-विधायकों के रिश्तेदार भी लाइन में

खजुराहो में ब्राह्मण प्रत्याशी बनाए जाने के आसार हैं जिनमें पूर्व मंत्री मुकेश नायक, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व संगठन प्रभारी महामंत्री चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी और विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह के नाम स्क्रीनिंग कमेटी ने पैनल में लिए हैं। सूत्र बताते हैं कि मालवा-निमाड़ में उज्जैन और खरगोन में तीन-तीन नाम के पैनल हैं। खरगोन में पूर्व विधायक रमेश पटेल व विजय सिंह सोलंकी के साथ मंत्री बाला बच्चन की पत्नी का नाम है तो उज्जैन में विधायक महेश परमार की बहन डॉ. सीमा, पूर्व विधायक बाबूलाल मालवीय और मंत्री तुलसीराम सिलावट के पुत्र का नाम स्क्रीनिंग कमेटी के पैनल में पहुंच गए हैं। इसके अलावा विंध्य में सीधी सीट के लिए पूर्व सांसद माणिक सिंह और पूर्व विधायक वंशमणि वर्मा के नाम पैनल में हैं, जिनके लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और मंत्री कमलेश्वर पटेल की भी सहमति ली जाना है। मंडला लोकसभा क्षेत्र में स्क्रीनिंग कमेटी ने पूर्व विधायक नन्हेसिंह धुर्वे और कृष्णा उरेती तो शहडोल में भाजपा से कांग्रेस में आई पूर्व विधायक प्रमिला सिंह, नरेंद्र मरावी के नाम पैनल में हैं।

जातीय समीकरण बन रहा मुसीबत

वही बुंदेलखंड में एक अनुसूचित जाति, दो पिछड़ा वर्ग और एक ब्राह्मण नेता को प्रत्याशी बनाए जाने की बात सामने आ रही है। आरक्षित सीट टीकमगढ़ से संजय कसगर व भारतीय प्रशासनिक सेवा की पूर्व अधिकारी शशि कर्णावत के साथ अहिरवार समाज के दो नेता पूर्व सांसद आनंद अहिरवार व वृंदावन अहिरवार का नाम पैनल में शामिल हुआ है। वही सूत्रों की माने तो दो पिछड़ा वर्ग टिकट सागर व दमोह में दिए जा सकते हैं, जिसमें सागर से प्रभुसिंह और अरुणोदय चौबे के पैनल में से प्रभुसिंह की संभावना प्रबल बताई जा रही है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा के जयंत मलैया को टिकट मिलने पर बदला भी जा सकता है। दमोह में पूर्व विधायक प्रताप सिंह लोधी और पूर्व सांसद रामकृष्ण कुसमरिया के नाम पैनल तक पहुंच गए हैं। इसी तरह मालवा की धार लोकसभा सीट पर पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी व जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) की पसंद के नेता भगवान सिंह सोलंकी का नाम दिया गया है।

इंदौर में सुमित्रा ताई का विकल्प नहीं

कांग्रेस के लिए जहां राजधानी की सीट जीतना चुनौती पूर्ण है, तो वहीं इंदौर सीट पर भी कांग्रेस के लिए चुनौतियां कुछ कम नही हैं। इस सीट पर पिछले 40 साल से भाजपा की सुमित्रा महाजन सांसद हैं। कांग्रेस इस सीट पर किसी युवा चेहरे की तलाश कर रही है। कांग्रेस संगठन के सर्वे में इस सीट पर कमलनाथ सरकार में मंत्री जीतू पटवारी का नाम सामने आया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का ऐसा मानना भी है कि जीतू पटवारी यहां से चुनाव लडऩे के लिए काफी इच्छुक हैं। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव में कोई भी वर्तमान विधायक या मंत्री चुनाव नहीं लड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि अगर जीतू को पार्टी टिकट देने से मना करती है तो उनकी पत्नी रैनुका पटवारी के लिए वह टिकट की मांग कर सकते हैं।

Naveen ( 1696 )

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