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कांग्रेस से गठबंधन से इंकार चुनावी रणनीति के तहत

हमेशा दूसरी पार्टियों पर दबाव डालकर अपना काम निकालने वाली बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश में कांग्रेस से किसी तरह का गठबंधन नही करने की घोषणा कर फिर वही दांव खेला है।

कांग्रेस से गठबंधन से इंकार चुनावी रणनीति के तहत

अपनी शर्तां पर गठबंधन के लिए बसपा ने खेला दाव

बसपा का वोट शेयर

- 2003 में 7.26 फीसदी

- 2008 में 8.96 फीसदी

- 2013 में 6.29 फीसदी

- प्रदेश में 56 सीटों पर बसपा का प्रभाव।

- अभी भाजपा के पास 165 सीटें

- कांग्रेस 58

- बसपा 4 सीटें

भोपाल | हमेशा दूसरी पार्टियों पर दबाव डालकर अपना काम निकालने वाली बहुजन समाज पार्टी ने प्रदेश में कांग्रेस से किसी तरह का गठबंधन नही करने की घोषणा कर फिर वही दांव खेला है। दरअसल बसपा चाहती है कि कांग्रेस से चुनावी गठबंधन तो हो मगर उसकी शर्तो पर । सूत्रो के अनुसार बसपा के साथ कांग्रेस नेता गठबंधन पर चर्चा कर रहे थे मगर बसपा प्रमुख मायावती चाहती थी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सीधे उनसे इस संबंध में चर्चा करे ताकी गठबंधन की शर्ते तय हो सके लेकिन ऐसा हो नही पा रहा था यही कारण है कि कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए पिछले दिनो बसपा प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार के जरिए कांग्रेस से गठबंधन नही करने व सभी विधानसभा क्षैत्रो से चुनाव लडऩे की घोषणा करा दी।

यह बात सामने आते ही कांग्रेस में खलबली मच गई। क्योकि कांग्रेस बसपा से चुनावी गठबंधन होगा यह मान कर ही चल रही थी। यहा यह बता दे कि दबाव बनाने की चर्चा में इसलिए भी दम नजर आता है कि बसपा में कोई भी बड़ा फैसला बसपा प्रमुख मायावती लेती है और घोषणा भी वही करती है। लेकिन प्रदेश मे कांग्रेस से चुनावी गठबंधन नही करने की घोषणा प्रदेश अध्यक्ष अहिरवार द्वारा की गई । हंालाकि उन्होने साथ में यह भी जोड़ा कि फिलहाल कांग्रेस के साथ गठबंधन करने पर कोई फैसला नही हुआ है लेकिन पार्टी प्रमुख मायावती जो भी फैसला लेंगी वह अंतिम होगा ।

प्रदेश में 6 से 9 प्रतिशत वोट शेयर

मायावती की पार्टी बसपा का दलितों के बीच अच्छा जनाधार है।मध्य प्रदेश में दलितों का वोट करीब 16 फीसदी है। साथ ही 82 विधानसभा सीटें एससीएसटी वर्ग के पास तो 10 लोकसभा सीटें भी इसी वर्ग के पास है । ऐसे में बसपा के साथ कांग्रेस गठबंधन कर इस वोट बैंक को कब्जाने की कोशिश कर रही है। दरअसल पिछले 20 सालों से बीएसपी ने मध्य प्रदेश में 6 से 9 प्रतिशत के करीब वोट शेयर बरकरार रखा है. अगर पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर 37 प्रतिशत को इसमें जोड़ दिया जाए तो यह गठबंधन भाजपा के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी का 45 प्रतिशत वोट शेयर रहा है और अभी वह तीन बार सत्ता में रहने के कारण एंटी इनकंबेंसी का सामना कर रही है |

ऐसे में कांग्रेस को सत्ता के लिए बीएसपी से गठबंधन करना जरूरी लग रहा है। बसपा के इनकार के बाद कांग्रेस निराश जरूर है मगर उसने उम्मीद नही छोड़ी है कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मानक अग्रवाल का कहना है कि चुनाव पास आने पर गठबंधन का फैसला लिया जाएगा। हमने सभी समान विचारधारा वालो से गठबंधन करने का फैसला लिया है। इसलिए चर्चा के लिए दरवाजे हमेशा खुले रहेगे।कभी देश पर राज करने वाली कांग्रेस आज सिर्फ तीन राज्यो में सत्ता में है ऐसे में सत्ता की छटपटाहट साफ दिखाई देती है। लेकिन सवाल इस बात का है कांग्रेस ने जिस तरह सपा के साथ यूपी में जूनियर पार्टनर बन चुनाब लड़ा था क्या उसी तर्ज पर मध्य प्रदेश के चुनावी रण में क्या वह बसपा को पार्टनर बनाने में वह कामयाब हो सकेगी।




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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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