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UAPA गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2019 राज्यसभा में पारित

UAPA गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2019 राज्यसभा में पारित

नई दिल्ली। राज्यसभा ने शुक्रवार को किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने से जुड़े संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी भी मिल गई। लोकसभा विधेयक को 24 जुलाई को ही पारित कर चुकी है।

विधेयक को स्थाई समिति को भेजे जाने से जुड़े विपक्ष के प्रस्ताव को सदन ने 85 के मुकाबले 104 से खारिज कर दिया। इसके अलावा विधेयक में संशोधन के प्रस्ताव को भी 147 के मुकाबले 42 से खारिज कर दिया गया। विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2019 (यूएपीए) पर चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने की चार स्तरीय प्रक्रिया है जिसमें सुनिश्चित किया गया है कि इसका दुर्पयोग न हो।

शाह ने कहा कि दुनियाभर के देशों में व्यक्तियों का आतंकी घोषित करने से जुड़े कानून हैं। भारत में इसके अभाव के चलते यासीन भटकल जैसे आतंकी बचकर निकल गए और बाद में बम धमाकों के कारण बने। हमें किसी व्यक्ति को अलग-अलग संगठन बनाकर कानून के दायरे से निकल जाने का रास्ता नहीं देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून को किसी भी दुरपयोग से बचाने के लिए विधेयक में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।

शाह ने कहा कि गैर कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए कांग्रेस की सरकार ही कानून लाई थी। उसने ही इसमें 2004 और 2008 में बदलाव किया। हमारी सरकार केवल इस कानून में संशोधन लाई है। उनकी पार्टी भाजपा विपक्ष में रहते हुए भी सख्त कानून की पक्षधर थी और सरकार में आने के बाद भी इसके पक्ष में है।

उन्होंने विपक्ष की चिंताओं का उत्तर देते हुए कहा कि आतंकी घोषित होने के बाद व्यक्ति के पास कई तरह के प्रावधान है। पहले वह अपील कर हाईकोर्ट के पूर्व जज के अर्धन्यायिक कोर्ट में अपील कर सकती है। इसके बाद वह हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जा सकता है।

गृह मंत्री के चर्चा का जवाब देने के बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने विधेयक को आगे जांच के लिए प्रवर समिति को भेजे जाने का आग्रह किया। इसके बाद विपक्ष में शामिल ज्यादातर पार्टियों ने वाकआउट किया। वहीं गृहमंत्री ने कहा कि समय की आवश्यकता देखते हुए विधेयक का जल्द पास होना जरूरी है।

विधेयक को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि उन्हें विधेयक पर नहीं बल्कि इसके क्ल़़ॉज 5 और 6 से आपत्ती है। उन्होंने पूछा कि आखिर किस स्तर पर जाकर एक व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जाएगा। इसके जवाब में गृहमंत्री ने कहा कि यह एक जटिल विषय है जिसके बारे में विधेयक में प्रावधान नहीं है। कोई व्यक्ति विदेश भाग जाए तो उसे पूछताछ के पहले आतंकी घोषित करना मजूबरी है। कोई जांच में सहयोग न करे और साक्ष्य बतायें की वह आतंकी गतिविधि में शामिल रहा है।(हि.स.)

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