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'थेरेमा' एप आतंकियों का नया हथियार, रोहिंग्या कैंप के लिए कर रहे इस्तेमाल

इस एप्लीकेशन पर खुद को रजिस्टर्ड करते हैं तो इसमें आपस में संचार स्थापित करने के दौरान मोबाइल का नंबर शो नहीं होता है।

थेरेमा एप आतंकियों का नया हथियार, रोहिंग्या कैंप के लिए कर रहे इस्तेमालImage Credit : Handelsblatt Global

नई दिल्ली/अश्विनी शर्मा। दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत में रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रहने वाले नौजवानों को जोड़ने के लिए आतंकी संगठन 'थेरेमा' चैट एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर रहे हैं। 'थेरेमा' एक ऐसा चैट एप्लीकेशन है, जिसमें संचार स्थापित करते वक्त मोबाइल का नंबर शो नहीं होता है। यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया इकाइयों ने मुहैया कराई हैं।

खासबात यह है कि इसमें सीमापार की खुफिया इकाई आईएसआई, लश्कर और उसके संगठन जमात-उद-दावा और उससे पैदा हुए संगठन फलाह-ए-इंसानियत के अलावा अलकायदा जैसे खतरनाक आतंकी संगठन से जुड़े संदिग्धों ने भी दस्तक दे दी है। इन संगठनों से जु़ड़े लोग खासतौर से स्लीपर सेल की तरह काम करने वाले ऐसे शरणार्थी शिविरों से जुड़े लोगों की मदद के नाम पर नौजवानों को लगातार अपने संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे हुआ खुलासा

पिछले दिनों भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़े ब्रिटिश मूल के अलकायदा आतंकी समयू रहमान उर्फ सूमोन हक से सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने यह खुलासा किया कि वह अपने किसी भी नेटवर्क से संपर्क करने के लिए चैट एप्लीकेशन 'थेरेमा' का इस्तेमाल करता था। दरअसल इस एप्लीकेशन पर खुद को रजिस्टर्ड करते हैं तो इसमें आपस में संचार स्थापित करने के दौरान मोबाइल का नंबर शो नहीं होता है। इससे कॉलर के नंबर का पता लगाना मुश्किल होता है।

कौन है समयू रहमान उर्फ सूमोन

सुरक्षा एजेंसियोें के मुताबिक समयू रहमान उर्फ सूमोन ब्रिटिश मूल का अलकायदा आतंकी है। उसने सीरिया में अलकायदा के अलमुसरा फ्रंट में शामिल होने के बाद तीन महीने की ट्रेनिंग पूरी की है। इसके बाद उसने सीरिया के अलक्को में फोर्स के खिलाफ लड़ाई लड़ी। संगठन के प्रति उसकी वफादारी को देखते हुए अलकायदा ने उसे वर्ष-2014 में रोंहिग्या शरणार्थी कैंप के नौजवानों को जोड़ने का जिम्मा सौंपा था।

बांग्लादेश में बनाया था कैंप

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक बांग्ला बोलने में माहिर समयू रहमान उर्फ सूमोन ने बांग्लादेश में जाकर वहां चटगांव की पहाड़ी में अपना कैंप भी बनाया था और वह रोहिंग्या के संपर्क रहा। भारत में भी उसे कैंप बनाकर रोंहिग्याओं को जोड़ना था लेकिन इसके पहले ही वह सुरक्षा एजेंसियोें के हत्थे चढ़ गया था।

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Swadesh Digital ( 10718 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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