Home > Lead Story > कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पर गतिरोध जारी, स्पीकर बोले - मुझे 'बलि का बकरा' न बनाइए

कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पर गतिरोध जारी, स्पीकर बोले - मुझे 'बलि का बकरा' न बनाइए

सुप्रीम कोर्ट ने दो निर्दलीय विधायकों की याचिका पर जल्द सुनवाई से किया इंकार

बेंगलुरु। कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार की सरकार गिरेगी या बचेगी इस पर उहापोह की स्थिति अब भी बनी हुई है। कर्नाटक विधानसभा में विश्वास मत पर गतिरोध जारी है। एक ओर जहां कांग्रेस और जेडीएस फ्लोर टेस्ट के लिए और अधिका समय की मांग कर रही है, वहीं बीजेपी जल्द से जल्द बहुमत परीक्षण के पक्ष में दिख रही है। इस बीच कर्नाटक के स्पीकर के आर रमेश कुमार का बड़ा बयान आया है। विधानसभा स्पीकर ने कहा कि सबकी नजर मुझ पर है। कृपया मुझे बली का बकरा न बनाइए। हमें अपने लक्ष्य पूरा करने दीजिए। विधानसभा स्पीकर रमेश ने यह बयान आज ही बहुमत परीक्षण की प्रक्रिया पूरी करवाने के संदर्भ में कही है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव पर विधानसभा में तीसरे दिन सोमवार को भी चर्चा जारी है । उधर कांग्रेस का कहना है कि बागी विधायकों के इस्तीफे पर अध्यक्ष का फैसला आने तक विश्वास प्रस्ताव पर मतविभाजन न कराया जाए। विधानसभा की कार्यवाही शुरु होने के समय से ही अध्यक्ष के. आर. रमेश ने सरकार को बार बार शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया सोमवार को पूरी करने के अपने वादे का सम्मान करने की याद दिलायी।

एक घंटे की देरी से सदन की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ने कहा, '' सबकी नजर हम पर है। मुझे बलि का बकरा ना बनाएं। अपने लक्ष्य (शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया पूरी करने) तक पहुंचें। कुमारस्वामी ने पिछले सप्ताह बृहस्पतिवार को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखा था। सत्तारूढ़ कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन के 16 विधायकों के इस्तीफे और दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने के कारण सरकार का भविष्य अधर में है। राज्यपाल वजुभाई वाला ने पहले शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे तक और बाद में दिन की समाप्ति तक विश्वास प्रस्ताव पर प्रक्रिया पूरी करने को कहा था।

शुक्रवार को प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बाद अध्यक्ष ने सरकार से यह वादा लिया था कि वह इसे सोमवार को अवश्य पूरा करेगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। अध्यक्ष ने विश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया में और देरी नहीं करने पर अपना रुख स्पष्ट किया, ''इससे मेरा या सदन का अपमान होगा। ऐसी खबरें है कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने मत-विभाजन के लिए और दो दिन का वक्त मांगा है। अध्यक्ष ने कहा, ''हम जीवन सार्वजनिक में हैं। जनता हमें देख रही है। अगर लोगों में यह विचार बन रहा है कि चर्चा के नाम पर हम समय बर्बाद कर रहे हैं तो यह मेरे या किसी के लिए भी सही नहीं होगा।

कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा कि इस्तीफे के मुद्दे पर अध्यक्ष के निर्णय के बगैर मत-विभाजन कराने से विश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया की कोई गरिमा नहीं रहेगी। विश्वास प्रस्ताव पर बहस के तीसरे दिन भी जारी रहने के दौरान उन्होंने कहा, '' हम असाधारण स्थिति में आ गये हैं.... मैं अध्यक्ष से पहले इस्तीफों पर निर्णय लेने का अनुरोध करता हूं। अन्यथा इसका (विश्वास प्रस्ताव का) कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उन्होंने सवाल किया, '' क्या इस्तीफा स्वेच्छा से दिया गया और असली वजह क्या है? क्या वे लोकतंत्र के विरूद्ध नहीं हैं?

Tags:    

Swadesh Digital ( 0 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Share it
Top