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अदालत ने माना पार्क की जमीन पर बना है सहारा हॉस्पिटल, प्रशासन ढहाने में जुटा

कमरों पर बरसाए हथौड़े, नर्सों और कर्मचारियों ने किया विरोध

अदालत ने माना पार्क की जमीन पर बना है सहारा हॉस्पिटल, प्रशासन ढहाने में जुटा

- स्थगन हटते ही सहारा अस्पताल पर चला बुलडोजर

- देर रात तक चली कार्रवाई, टीनशैड और सरियों को कटर से काटा

ग्वालियर, न.सं. विशेष प्रतिनिधि। तीन रोज पहले सहारा अस्पताल पर नगर निगम द्वारा बुलडोजर से की गई तुड़ाई के बाद न्यायालय से स्थगन के कारण कार्रवाई टल गई थी। किंतु सोमवार को शाम चार बजे जैसे ही 15वे व्यवहार न्यायाधीश प्रथम वर्ग सुनील अहिरवार द्वारा अपने सात पृष्ठ के आदेश में उक्त स्थान को सार्वजनिक पार्क का मानते हुए स्थगन खारिज कर दिया। इस आदेश के तुरंत बाद जिला प्रशासन, नगर निगम एवं पुलिस हरकत में आए और सायं 5.30 बजे से सहारा अस्पताल की पुन: तुड़ाई शुरू हो गई। इसके लिए सात जेसीबी मशीन, गैस कटर एवं दो दर्जन कर्मचारी हथौड़ों से सहारा अस्पताल को ढहाने में जुट गए। इस दौरान अस्पताल की नर्स एवं कर्मचारियों ने विरोध करना चाहा तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। देर रात तक चली कार्रवाई में अस्पताल का अस्सी फीसदी हिस्सा ढहाया जा चुका था।


उल्लेखनीय है कि 22 नवम्बर को नगर निगम द्वारा बिना अनुमति निर्माण को लेकर चिरंजीवी अस्पताल प्रालि. के निदेशक डॉ. एएस भल्ला निवासी 19 ए- बसंत विहार को चौबीस घंटे का नोटिस जारी किया गया था। इसका जवाब नहीं मिलने पर पुन: 23 नवम्बर को छह घंटे का नोटिस दिया गया। किन्तु उचित जवाब नहीं मिलने पर शुक्रवार छह दिसम्बर को सुबह 11.30 बजे प्रशासनिक अमला बुलडोजर एवं पुलिस बल के साथ सहारा अस्पताल तोडऩे जा पहुंचा। सर्वप्रथम अस्पताल की बाहरी दीवार एवं ऊपर के कुछ हिस्से को क्षतिग्रस्त किया गया। एक-डेढ़ घंटे की कार्रवाई के बाद डॉ. भल्ला को 5वे व्यवहार न्यायाधीश प्रथम वर्ग सुनील अहिरवार के यहां से स्थगन मिल गया। जिस पर प्रशासन ने अपील लगाई। वहीं अस्पताल को खाली भी करा लिया। किंतु यह सुनवाई शनिवार को भी चली, किंतु इसका निर्णय सोमवार को सायं चार बजे आ पाया। प्रशासन को स्थगन हटने का ही इंतजार था। जैसे ही स्थगन हटा, प्रशासनिक अमला पूरे ताम-झाम के साथ सहारा अस्पताल को पुन: तोडऩे जा पहुंचा। इस दौरान अमले को यह हिदायत दी गई थी कि अस्पताल को पूरी तरह साफ करना है। इसलिए कर्मचारियों के भोजन एवं चाय-पानी की भी पूरी व्यवस्था की गई थी।

अदालत ने माना, पार्क की है जमीन

न्यायालय ने अपने आदेश में 19-ए बसंत विहार पर बने सहारा अस्पताल को नगर एवं ग्राम निवेश के नक्शे के अनुसार इसे सार्वजनिक पार्क की जमीन माना है। सुनवाई के दौरान आवेदक डॉ. भल्ला एवं अनावेदक मकान मालिक बृजमोहन एवं रश्मि परिहार निर्माण संबंधी कोई दस्तावेज अदालत में पेश नहीं कर सके। अदालत में बताया गया कि डॉ. भल्ला द्वारा इस जगह को अस्पताल के लिए रश्मि एवं बृजमोहन परिहार से किराए पर लिया गया था, जिसका विवाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जबकि उच्च न्यायालय में तोडफ़ोड़ के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका 6 दिसम्बर को खारिज हो चुकी है। निर्माण को तीन मंजिला बताया गया, जिसमें आईसीयू, वीआईपी कमरे, ऑपरेशन थिएटर आदि हैं।

सोफिया पर नहीं हुई कार्रवाई

रविवार को निगम अमले ने महलगांव सिटी सेंटर क्षेत्र में स्थित डॉ. भल्ला एवं उनकी पत्नी मंजीत कौर भल्ला के स्वामित्व के सोफिया महाविद्यालय की चौथी एवं पांचवीं मंजिल पर तोडफ़ोड़ की थी। ऐसा माना जा रहा था कि सोमवार को भी सोफिया महाविद्यालय पर तोडफ़ोड़ होगी। किंतु सोमवार को सहारा अस्पताल मामले में निर्णय के इंतजार के कारण यहां कार्रवाई नहीं की गई।


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