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राफेल को अब पाकिस्तान बॉर्डर के बजाय चीन की सीमा पर होगा तैनात

- चिनकू और अपाचे हेलिकॉप्टर भी पूर्वोत्तर की सीमा पर तैनात होंगे - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहला राफेल विमान लेने 8 अक्टूबर को फ्रांस जायेंगे - पूर्वोत्तर में राफेल के लिए आठ लैंडिंग ग्राउंड तैयार किए गए

राफेल को अब पाकिस्तान बॉर्डर के बजाय चीन की सीमा पर होगा तैनात

नई दिल्ली। फ्रांस से मिलने वाले पहले लड़ाकू विमान राफेल को अब पाकिस्तान बॉर्डर के बजाय चीन की सीमा पर तैनात किया जाएगा। राफेल के साथ ही चिनकू और अपाचे हेलिकॉप्टर भी पूर्वोत्तर की सीमा पर तैनात होंगे। पूर्वी कमान क्षेत्र में अक्सर अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के आक्रामक रुख को देखते हुए यहां राफेल की तैनाती का फैसला अहम माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में भी राफेल डील मुद्दा बना रहा लेकिन मोदी सरकार इसपर पीछे नहीं हटी और आखिरकार अब राफेल जल्द ही भारतीय वायुसेना की ताकत बनने वाला है।

फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने 20 सितम्बर को टेल नंबर आरबी-01 के साथ पहला राफेल विमान फ्रांस में एयर मार्शल वीआर चौधरी के नेतृत्व में भारतीय वायु सेना के अधिकारियों को सौंपा। टेल नंबर आरबी-01 का नाम भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर मार्शल आरकेएस भदौरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने देश के सबसे बड़े इस रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहला राफेल विमान लेने के लिए वायुसेना के फाइटर पायलटों की टीम के साथ 8 अक्टूबर को फ्रांस के बॉर्डेक्स में एक मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में जाएंगे। 8 अक्टूबर यानी विजयादशमी के दिन पहला राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट वायुसेना को आधिकारिक तौर पर मिल जाएगा। इसके बाद वायुसेना को कुल 36 राफेल लड़ाकू विमान मिलेंगे। ये विमान मई, 2020 से भारत पहुंचना शुरू होंगे क्योंकि इनमें भारत की जरूरतों के मुताबिक हथियार प्रणालियां लगाई जानी हैं और पायलटों को ट्रेनिंग भी दी जानी है।

भारतीय वायुसेना द्वारा अम्बाला में अपनी 'गोल्डन ऐरोज' 17 स्क्वाड्रन फिर से शुरू करने के बाद माना जा रहा था कि यह बहुप्रतिक्षित राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली इकाई होगी और राफेल के पहले दस्ते को अंबाला वायु सेना केंद्र में तैनात किया जाएगा, जिसे वायु सेना के रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है, क्योंकि यहां से भारत-पाक सीमा करीब 220 किलोमीटर है। दरअसल बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत के लिए भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा ज्यादा अहम हो गई है। इसलिए पाकिस्तान बॉर्डर पर राफेल फाइटर विमान को तैनात किये जाने की सम्भावना थी।

इस बीच अब भारतीय वायु सेना ने फ्रांस से मिले लड़ाकू विमान राफेल को पाकिस्तान बॉर्डर से पहले चीन बॉर्डर पर तैनात करने का फैसला लिया है। विमानों को लेकर चीन के साथ किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए तैयारी पूरी की जा रही है। जल्द ही राफेल के साथ चिनकू और अपाचे हेलिकॉप्टरों को भी पूर्वोत्तर में तैनात किया जाएगा। पूर्वोत्तर में तैनात किए जा रहे ज्यादातर राफेल विमानों की तैनाती चीन की सीमा के आसपास होगी। इन विमानों के उतरने के लिए आठ लैंडिंग ग्राउंड तैयार किए गए हैं, जो किसी भी समय चालू किए जा सकते हैं।

राफेल फाइटर जेट हवा से हवा में मार कर सकने के अलावा हवा से जमीन पर भी आक्रमण करने में सक्षम है। इसमें परमाणु बम गिराने की भी ताकत है। एक मिनट में विमान के दोनों तरफ से 30 एमएम की तोप से 2500 राउंड गोले दागे जा सकते हैं। राफेल विमान में कम से कम ऊंचाई से लेकर अधिक से अधिक ऊंचाई तक, दोनों ही स्थितियों में बेहतर एक्शन लेने की क्षमता है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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