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मालदीव की संसद में पीएम मोदी, बोले - हर भारतीय के दिल को छू लिया

माले/नई दिल्ली। मालदीव की संसद में ऐतिहासिक संबोधन के दौरान शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर जहां पाकिस्तान को घेरा तो वहीं, कर्ज के जाल में फंसाने की चीन की चाल पर भी निशाना साधा। पीएम ने कहा कि आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर पीएम मोदी ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि लोग अब भी अच्छा आतंकी और बुरा आतंकी का भेद करने की गलती कर रहे हैं। पीएम ने साफ कहा कि आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना जरूरी है। वहीं, चीन के मद्देनजर मालदीव को संदेश देते हुए मोदी ने कहा कि हम मित्र हैं और मित्रता में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास साझेदारी लोगों को सशक्त करने के लिए है, उन्हें कमजोर करने, खुद पर निर्भरता बढ़ाने या भावी पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ लादने के लिए नहीं है। दरअसल, चीन ने मालदीव को भारी कर्ज देकर गहरे संकट में फंसा दिया है।

मजलिस में संबोधन के दौरान पीएम ने कहा कि मालदीव यानी हजार से अधिक द्वीपों की माला, हिंद महासागर का ही नहीं पूरी दुनिया का एक नायाब नगीना है। इसकी असीम सुंदरता और प्राकृतिक संपदा हजारों साल से आकर्षण का केंद्र रही है। प्रकृति की ताकत के सामने मानव के अदम्य साहस का यह देश एक अनूठा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि व्यापार, लोगों और संस्कृति के अनवरत प्रवाह का मालदीव साक्षी रहा है। राजधानी माले विशाल नीले समंदर की प्रवेश द्वारी रही है। यह स्थायी, शांतिपूर्ण और समृद्धशाली हिंद महासागर की कुंजी भी है। उन्होंने कहा कि आज मालदीव में और इस मजलिस में आपके बीच आकर अपार हर्ष हो रहा है। मजलिस ने सर्वसम्मति से मुझे निमंत्रण देने का निर्णय नशीद के स्पीकर बनने के बाद अपनी पहली ही बैठक में लिया, आपके इस जेस्चर ने हर भारतीय के दिल को छू लिया और उनका सम्मान और गौरव बढ़ाया है। इसके लिए मैं अध्यक्ष और सदन के सम्मानित सदस्यों को अपने और भारत की ओर से बधाई देता हूं।

पीएम ने कहा, 'आज मैं दूसरी बार मालदीव आया हूं। एक प्रकार से दूसरी बार मजलिस की ऐतिहासिक कार्यवाही का साक्षी हूं। पिछले वर्ष मैं खुशी और गर्व के साथ राष्ट्रपति सोलिह के शपथ ग्रहण में शामिल हुआ था। लोकतंत्र की जीत का वह उत्सव खुले स्टेडियम में आयोजित किया गया था। चारों ओर हजारों उत्साही लोग उपस्थित थे। उन्हीं की शक्ति और विश्वास, साहस और संकल्प उस जीत का आधार थे। उस दिन मालदीव में लोकतंत्र की ऊर्जा को महसूस कर रोमांच सा का अनुभव हो रहा था। उस दिन मैंने मालदीव में लोकतंत्र के प्रति आम नागरिक के समर्पण और अध्यक्ष महोदय आप जैसे नेताओं के प्रति उनके आदर और प्यार को भी देखा और आज इस सदन में मैं लोकतंत्र के आपसब पुरोधाओं को नमन करता हूं।' उन्होंने कहा, 'मजलिस ईंट-पत्थर से बनी इमारत नहीं है। यह लोगों का मजमा नहीं है। यह लोकतंत्र की वह ऊर्जा भूमि है जहां देश की धड़कनें आपके विचारों और आवाज में गूंजती हैं। यहां आपके माध्यम से लोगों के सपने और आशाएं सच में बदलते हैं। यहां अलग-अलग विचारधारा और दलों के सदस्य देश में लोकतंत्र, विकास और शांति के लिए सामूहिक संकल्प को सिद्धि में बदलते हैं ठीक उसी तरह जैसे मालदीव के लोगों ने एकजुट होकर लोकतंत्र की एक मिसाल कायम की। आपने दिखा दिया कि जीत आखिर में जनता की ही होती है। यह कोई मामूली सफलता नहीं थी। आपकी कामयाबी दुनियाभर के लिए मिसाल और प्रेरणा है।

पीएम ने कहा कि मालदीव की इस सफलता पर सबसे अधिक गर्व और खुशी किसी को हो सकती थी? उत्तर स्वाभाविक है- आपके सबसे घनिष्ठ मित्र, आपके सबसे नजदीकी पड़ोसी और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को। उन्होंने जोर देकर कहा कि मालदीव में लोकतंत्र की मजबूती के लिए भारत और हर भारतीय आपके साथ था और साथ रहेगा। मोदी ने आगे कहा कि भारत ने मानव इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी की है। भारत के लिए यह मेगा फेस्टिवल था। पीएम ने आगे कहा कि मेरी सरकार का मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व में और खासकर अपने पड़ोस में मेरी सरकार की विदेश नीति का भी आधार है। नेबरहुड फर्स्ट हमारी प्राथमिकता है और इसमें मालदीव की प्राथमिकता बहुत स्वाभाविक है इसलिए आपके बीच मेरी उपस्थिति संयोग मात्र नहीं है। पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति सोलिह ने भारत को अपना पहला गंतव्य बनाया और अब मालदीव का स्नेहपूर्ण निमंत्रण मुझे मेरे इस कार्यकाल में पहली विदेश यात्रा पर मालदीव ले आया है।

पीएम ने कहा कि मुझे मालदीव के सबसे बड़े सम्मान से नवाजा गया है। मेरे पास धन्यवाद देने के लिए शब्द नहीं हैं। अध्यक्ष महोदय, भारत और मालदीव के संबंध इतिहास से भी पुराने हैं। सागर की लहरें हम दोनों देशों की तटों को पखार रही हैं। ये लहरें हमारे लोगों के बीच मित्रता की संदेशवाहक रही हैं। हमारी सभ्यता और संस्कृति इन तरंगों की शक्ति लेकर फली-फूली हैं। हमारे रिश्तों को सागर की गहराई और विस्तार का आशीर्वाद मिला है। विश्व के सबसे पुराने बंदरगाहों में से एक लोथल मेरे गृह राज्य गुजरात में था। 2500 साल से भी पहले लोथल और सूरत जैसे शहरों के साथ मालदीव के व्यापारिक संबंध रहे हैं। मालदीव की कौड़ियां भारत के बच्चों की भी प्रिय रही हैं। संगीत, वाद्य यंत्र, रश्मों-रिवाज ये सब हमारी साझा विरासत के ज्वलंत उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि वीक को भारत में हफ्ता कहते हैं। विदेही में भी दिनों के नाम आदित्य, ओमा जैसे हैं। वर्ल्ड को दिबेही में कहते हैं धुमिये और भारत में दुनिया। मालदीव में दुनिया एक प्रसिद्ध नाम है। भाषा की समानता स्वर्ग और नरक तक फैली है। हर कदम पर साफ है कि हम एक ही गुलशन के फूल हैं इसलिए मालदीव की सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन, दिबेही भाषा के शब्दकोष के विकास जैसे प्रॉजेक्ट्स में मालदीव को सहयोग देना भारत के लिए महत्व रखते हैं। फ्राइडे मस्जिद के संरक्षण में भारत के सहयोग की घोषणा करते हुए मुझे खुशी हुई है। कोरल से बनी इस ऐतिहासिक मस्जिद जैसी दुनिया में कहीं नहीं है। मालदीव के लोगों ने सैकड़ों साल पहले इसकी रचना की। खेद का विषय है कि आज सामुद्रिक संपदा पर प्रदूषण के बादल छा रहे हैं। ऐसे में इस विलक्षण मस्जिद का संरक्षण इतिहास ही नहीं हमारे पर्यावरण के संरक्षण का संदेश विश्व को देगा। पीएम ने कहा कि भारत मालदीव के हर मुश्किल में, आपके हर प्रयास में, हर घड़ी आपके साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे दर्जनों कार्यक्रम मालदीव के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि हम पीपल टु पीपल कॉन्टैक्ट पर जोर देते हैं और इसलिए आज हमने दोनों देशों के बीच नौका सेवा पर समझौता किया है।

पीएम ने कहा कि आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है। यह खतरा एक देश या एक क्षेत्र के लिए नहीं, ये खतरा पूरी मानवता के लिए है। कोई दिन ऐसा नहीं जाता है जब आतंकवाद कहीं किसी जगह अपना भयानक रूप दिखाकर किसी निर्दोष की जान न लेता हो। आतंकियों के न तो अपने बैंक होते हैं न टकसाल और न ही हथियारों की फैक्ट्री फिर भी उन्हें धन और हथियारों की कभी कमी नहीं होती है। कहां से पाते हैं ये सब, कौन देता उन्हें ये सुविधाएं? आतंकवाद की स्टेस स्पॉन्सरशिप सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। यह दुर्भाग्य है कि लोग अभी भी अच्छा आतंकी और बुरा आतंकी का भेद करने की गलती कर रहे हैं। कृत्रिम मतभेदों में पड़कर हमने बहुत समय गंवा दिया है। पानी अब सिर से ऊपर निकल रहा है। आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना जरूरी है। आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटना विश्व के नेतृत्व की सबसे खरी कसौटी है। जिस प्रकार विश्व समुदाय ने जलवायु परिवर्तन के खतरे के प्रति विश्व सम्मेलन किए हैं वैसे ही आतंकवाद पर क्यों नहीं हो रहे हैं? उन्होंने कहा कि मैं विश्व संगठनों से आग्रह करूंगा कि एक समय सीमा के भीतर आतंकवाद पर ग्लोबल कॉन्फ्रेंस आयोजित करे ताकि आतंकियों और उनके समर्थक जिन खामियों का फायदा उठाते हैं उन्हें बंद करने पर विचार किया जा सके। अगर अब हमने और देर की तो आज और आज के बाद आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।

-जलवायु परिवर्तन हमारे किसानों को प्रभावित कर रहा है। पिघलते हिमखंड और समुद्र का बढ़ता स्तर मालदीव जैसे देशों के लिए अस्तित्व का खतरा बन गए हैं। अध्यक्ष महोदय, आपने समुद्र की गहराई में विश्व की पहली कैबिनेट बैठक करके इन खतरों की ओर संसार का ध्यान खींचा था। इसे कौन भूल सकता है। मुझे खुशी है कि मालदीव सोलर अलायंस में शामिल हुआ है।

-भारत के सहयोग से माले की सड़कें 2500 एलईडी स्ट्रीट लाइट के दूधिया प्रकाश में नहा रही हैं और 2 लाख एलईडी बल्ब मालदीव के लोगों के घरों और दुकानों को जगमगाने के लिए आ चुके हैं। इससे बिजली बचेगी और खर्च भी। यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है।

-हिंद-प्रशांत क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि यहां दुनिया की 50 फीसदी जनसंख्या रहती है लेकिन इस क्षेत्र में बहुत से अनसुलझे विवाद हैं। यह क्षेत्र हमारी जीवन रेखा है और व्यापार का राजमार्ग भी है। यह हर मायने में हमारे साझा भविष्य की कुंजी है इसलिए मैंने जून 2018 में इंडो-पसिफिक रीजन में खुलेपन, एकीकरण एवं संतुलन कायम करने के लिए सबके साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया था। इससे देशों के बीच विश्वास बढ़ेगा।

-हम मित्र हैं और मित्रता में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है। यह भरोसा इस विश्वास से आता है कि हम एक दूसरे की चिंताओं और हितों का ख्याल रखेंगे जिससे हम दोनों ही और अधिक समृद्ध हों और सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं। भारत की विकास साझेदारी लोगों को सशक्त करने के लिए हैं उन्हें कमजोर करने के लिए नहीं है और न ही हम पर निर्भरता बढ़ाने के लिए है या भावी पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ डालने के लिए हैं। इससे पहले पीएम ने मालदीव के सभी लोगों को ईद की शुभकामनाएं दीं।

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Swadesh Digital ( 9596 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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