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पाकिस्तान ने पत्रकारों को नहीं दिखाया बालाकोट ट्रेनिंग कैंप : निर्मला सीतारमण

पाकिस्तान ने पत्रकारों को नहीं दिखाया बालाकोट ट्रेनिंग कैंप : निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने पाकिस्तान के अधिकारियों की ओर से विदेशी राजनयिकों और पत्रकारों को बालाकोट ले जाए जाने को एक पिकनिक करार देते हुए कहा कि इन लोगों को वह ट्रेनिंग कैंप ही नहीं दिखाया गया जहां आतंकियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था।

रक्षामंत्री सीतारमण ने एक न्यूज एजेंसी को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि राजनयिकों और पत्रकारों के दल को बालाकोट में स्थित जाबा पहाड़ी इलाके में निचले स्तर पर बने एक मदरसे को दिखाया गया। वास्तव में भारतीय वायुसेना के विमानों ने इस मदरसे को निशाना ही नहीं बनाया था। ऊंचाई पर स्थित ट्रेनिंग कैंप को भारतीय वायुसेना ने तबाह किया था। उन्होंने कहा कि बालाकोट में कितने लोग मारे गए और कितना नुकसान हुआ, इस बारे में तथ्यों की जानकारी देने की जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार पर है। जहां तक भारत का संबंध है हमारे लड़ाकू विमानों ने अपना उद्देश्य हासिल किया।

बालाकोट हमले के बारे में पश्चिमी देशों की मीडिया में संदेह व्यक्त किए जाने पर सीतारमण ने कहा कि जब कोई विदेशी सरकार भारत के दावे पर उंगली नहीं उठा रही है तो मीडिया की ओर से सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि बालाकोट में गत 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के चालीस दिन बाद पाकिस्तान ने वहां स्थित विदेशी दूतावासों के अधिकारियों और पत्रकारों को बालाकोट का भ्रमण कराया था। इस दल को वहां एक मदरसा दिखाया गया, जहां बच्चों को मजहबी तालीम दी जा रही थी। भ्रमण के बाद कई विदेशी अधिकारियों ने कहा कि घटना के काफी दिन बाद उन्हें इस क्षेत्र का भ्रमण करने का अवसर मिला। इस क्षेत्र में क्या हुआ था इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

रक्षामंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा भारत में नरेन्द्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के संबंध में दिए गए सकारात्मक बयान को कांग्रेस की चाल बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के कई प्रमुख नेता पाकिस्तान की यात्रा के दौरान कह चुके हैं कि 'मोदी को हटाने के लिए हमें मदद करो'। उन्होंने कहा कि इमरान खान का कथित बयान भी इसी योजना का हिस्सा हो सकता है।

सीतारमण ने कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा राष्ट्रपति को सेना के कथित राजनीतिकरण के संबंध में भेजे गए पत्र पर कहा कि इसकी विश्वसनीयता उस समय खत्म हो गई जब कई अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। रक्षामंत्री के अनुसार सभी लोग सेना का राजनीतिकरण नहीं किए जाने के पक्ष में हैं। इसके बावजूद राजनीतिक इच्छाशक्ति और सेना को खुली छूट देने संबंधी फैसले का काम सरकार के हिस्से में ही आता है।

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Swadesh Digital ( 10031 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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