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लोकसभा चुनाव 2019 : सहयोगी दलों से गठबंधन बनाने में कांग्रेस से भाजपा आगे

लोकसभा चुनाव 2019 : सहयोगी दलों से गठबंधन बनाने में कांग्रेस से भाजपा आगे

नई दिल्ली/हजारीबाग। लोकसभा 2019 में मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच होना है। ऐसे में दोनों गठबंधनों द्वारा अपने सहयोगी दलों को पाले में करने की कोशिशें की जा रही हैं। चुनाव की घोषणा होने के साथ ही भाजपा ने बड़ी तेजी से सहयोगी दलों के साथ मिल बैठकर गठबंधन बनाने व सीटों की शेयरिंग का मामला करीब-करीब तय कर लिया है। बिहार से लेकर महाराष्ट्र, झारखंड, पूर्वोत्तर, तमिलनाडु जैसे एक दर्जन से अधिक राज्यों में भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर न केवल बेहतर ढंग से सीटों का तालमेल किया, बल्कि सहयोगी दलों को ज्यादा सम्मान भी देने का काम किया। इस मायने में न केवल भाजपा अपने विरोधी कांग्रेस से आगे बढ़ी, बल्कि सीटों के गठबंधन से आगे निकलकर अब बूथ प्रबंधन से लेकर सभाओं के आयोजन में लगी है। इस दौरान पार्टी प्रभारी अपने नाराज नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक को मनाने का भी काम कर रहे हैं।

भाजपा के इस प्रबंधन व गठबंधन के प्रयास के विरोधी दलों के नेता भी कायल हो रहे हैं और वे सोशल मीडिया पर इसकी प्रशंसा भी कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस अभी तक सहयोगी दलों के साथ बातचीत हीं कर रही है और सीटों के तालमेल का मुद्दा राज्य नेतृत्व से निकलकर केंद्रीय कमेटी को भेज दिया जा रहा है। इससे महागठबंधन में शामिल होने वाले दलों के नेताओं में भी अंदर हीं अंदर खदबदाहट की स्थिति है। ऐसे दलों के नेताओं को लग रहा है कि अब विलंब हो रहा है, जल्दी से जल्दी मामला तय होना चाहिए। भाजपा की चर्चा करे तो महाराष्ट्र में भाजपा ने शिवसेना को अपने समान तरजीह देने का प्रयास किया है। यही स्थिति बिहार में भी जदयू व लोक जन शक्ति पार्टी के साथ गठबंधन के मामले में अपनाई गई। बिहार में जदयू के दो सांसदों के होने के बाद भी भाजपा ने आगे बढ़कर अपने चार सीटिंग सीट को त्याग कर जदयू के खाते में 17 सीट देने का काम किया।

झारखंड की चर्चा करें तो भाजपा का राज्य की 14 सीटों में से 12 पर कब्जा है। राज्य में आजसू के साथ उसकी सरकार चल रही है। आजसू के साथ गठबंधन करते हुए भाजपा नेतृत्व ने गिरिडीह की सीटिंग सीट का त्याग करते हुए आजसू को दे दिया। हालांकि इसको लेकर पार्टी के कुछ नेताओं में खदबदाहट है, लेकिन राज्य के सभी 14 सीटों पर भाजपा समर्थित वोटों का (विशेषकर आजसू के कारण) बिखराव न हो इसे ध्यान में रखकर आजसू को एक सीट दे दी गई। कांग्रेस अब तक सीट शेयरिंग के मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकी है। कहीं न कहीं इसका प्रभाव चुनाव पर पड़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

देर नहीं दुरुस्त के लिए प्रयास: बाबूलाल

महागठबंधन में कांग्रेस के साझेदार झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी अब तक सीट शेयरिंग का मुद्दा नहीं सुलझा पाने को लेकर निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक देर नहीं हुई है। दुरुस्त किए जाने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने पूछे जाने पर बताया कि भाजपा के विरुद्ध जीतने वाले प्रत्याशी को ध्यान में रखकर कार्य किया जा रहा है। जल्द ही सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

विपक्ष के चाल से चाल मिलाकर चलने की जरूरत: श्रीवास्तव

महागठबंधन के एक और साझेदार राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता हरिश श्रीवास्तव का कहना है कि यह सही है कि विपक्ष (भाजपा) के चाल से चाल मिलाकर चलने की जरूरत है। भाजपा ने गठबंधन बनाकर बूथ मजबूत पर कार्य कर रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि महागठबंधन सीट मजबूत पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि फैसला लेने के समय जीतने वाले उम्मीदवार को ध्यान में रखने की जरूरत है। उन्होंने इस मामले में अभी विलंब होने से इन्कार किया, कहा कि अभी बहुत समय है।

महागठबंधन सही दिशा में है: पटेल

महागठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरीय नेता एवं पूर्व मंत्री जय प्रकाश भाई पटेल ने कहा कि महागठबंधन की दिशा सही है। अभी कोई हड़बड़ी नहीं है। सीट समझौते के मामले पर विचार हो रहा है। एक सप्ताह के अंदर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व वाले महागठबंधन में जीतने वाले उम्मीदवार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

फेसबुक पर सहयोगी दलों से ईमानदार पहल की सराहना: मल्लिक

झारखंड विकास मोर्चा के अल्पसंख्यक मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष मुन्ना मल्लिक ने फेसबुक पर ब्लाॅग लिखकर भाजपा द्वारा गठबंधन बनाने के मामले में सहयोगी दलों के साथ उदारतापूर्वक व सम्मानपूर्वक समझौता किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मायने में कांग्रेस से आगे है।

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Swadesh Digital ( 7110 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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