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गांधी परिवार ने दिए अध्यक्ष पद से दूर रहने के संकेत

कांग्रेस अग्नि परीक्षा के लिए तैयार

गांधी परिवार ने दिए अध्यक्ष पद से दूर रहने के संकेत

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के लिए पदाधिकारियों की बैठक

ई दिल्ली। कांग्रेस पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की 75वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए आगामी 20 अगस्त को भव्य कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से पार्टी देशभर में राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में किए गए कार्याें को जनता के समक्ष पहुंचाने का लक्ष्य साध रही है। कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए बुधवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें पार्टी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों व राष्ट्रीय सचिवों को कमर कसने को कहा गया है। इन पदाधिकारियों को आगामी पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा की तैयारियों में जुटने तथा गठबंधन सहयोगी तलाशने के निर्देश भी दिए गए। कार्यसमिति की बैठक से पूर्व बुधवार की इस बैठक को रिहर्सल के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि, सभी महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर तो कार्यसमिति को ही लगाना है। बैठक में महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अध्यक्ष पद स्वीकारने के आग्रह को एक फिर से नकार दिया है। प्रियंका के स्पष्टीकरण के साथ ही अब यह तय हो गया है कि पार्टी एक-दो सप्ताह के अंदर अपना नया अध्यक्ष चुन लेगी।

बैठक के दौरान वैसे तो सभी चुनावी राज्यों मसलन, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर व दिल्ली पर चर्चा की गई लेकिन, हरियाणा, झारखंड व दिल्ली इसके केंद्र बिन्दु रहे। हरियाणा और झारखंड के प्रदेश अध्यक्षों पर काफी दिनों से तलवार लटकी हुई है तो इन राज्यों के प्रदेश प्रभारियों गुलाम नबी आजाद व आरपीएन सिंह की कार्यशैली पर भी उंगली उठ रही है। दोनों ही पदाधिकारी राज्यों पर नियंत्रण स्थापित करने में विफल रहे हैं। दिल्ली में स्थिति कमोवेश ऐसी ही है, जहां तीन-तीन कार्यकारी अध्यक्ष आपस में लड़-भिड़ रहे हैं। दिल्ली प्रदेश प्रभारी पीसी चाको किसी तरह समय काट रहे हैं। उनके पास न तो कोई लक्ष्य है और न ही कार्ययोजना। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक पार्टी इन्हें ढ़ोती रहेगी? हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को लेकर स्थिति बद से बदतर है। यहां कभी भी पार्टी दो फाड़ हो सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अब खुले तौर पर तंवर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके लिए उन्होंने बाकायदा कांग्रेस के समानान्तर अपना संगठन खड़ा कर दिया है। हुड्डा ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को मात देने के लिए गठबंधन सहयोगियों की तलाश श्ुारू कर दी है। इसके लिए उन्होंने प्रदेश मीडिया प्रभारी विजय कौशिक को आगे किया है। कौशिक के पीछे कांग्रेस के ही अंदर एक बड़ी लाॅबी सक्रिय बतायी जाती है। जो समय आने पर हुड्डा को ताकत देगी। राज्य में बसपा, सपा और आप पार्टी के नेताओं से चुनावी तालमेल की बात की जा रही है। स्थानीय नेताओं ने हालांकि, अभी पत्ते नहीं खोले हैं। ये नेता अभी देखो और इंतजार करो की नीति पर कायम हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अगर हुड्डा को प्रदेश की कमान सौंप देती है तो हुड्डा के नेतृत्व में कई पार्टियां एक मंच पर आ सकती हैं।

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