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चौथे चरण में भाजपा को साख बचाने की चुनौती तो कांग्रेस खाता खोलने की फिराक में

-यूपी की 13 लोकसभा सीटों पर 29 को होगा मतदान -18 से 19 वर्ष आयुवर्ग की अपेक्षा बुजुर्ग मतदाता ज्यादा -चार लोकसभा क्षेत्रों में है त्रिकोणीय मुकाबला

चौथे चरण में भाजपा को साख बचाने की चुनौती तो कांग्रेस खाता खोलने की फिराक में

नई दिल्ली/लखनऊ। तीसरे चरण का चुनाव खत्म होते ही कानपुर से लेकर खीरी और बुंदेलखंड लोकसभा क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है। राजनीतिक दलों ने अपना केंद्र बिंदु कानपुर को बनाया है। इस चरण में 29 अप्रैल को यूपी की 13 सीटों पर होने वाले चुनाव में 152 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। कानपुर और उन्नाव काे छोड़कर सभी जगह भाजपा और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर है। कानपुर में पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, उन्नाव से अनु टंडन, लखीमपुर खीरी से जफर अली नकवी, अलीगढ़ से बृजेंद्र सिंह लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस चरण के चुनाव में कुल 2.38 करोड़ मतदाता हैं जिसमें 1.29 करोड़ पुरुष और 1.09 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 1230 अन्य मतदाता भी हैं। इस चरण के चुनाव में शाहजहांपुर से 14, खीरी से 15, हरदोई से 11, उन्नाव से नौ, मिश्रिख से 13, फर्रुखाबाद से नौ, इटावा से 13, कन्नौज से 10, कानपुर से 14, अकबरपुर से 14, जालौन से पांच, झांसी से 11, हमीरपुर से 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस चरण के चुनाव में पहली बार मतदाता बने 18 से 19 वर्ष के आयु वर्ग के 3,56,005 हैं, जबकि इनसे ज्यादा 80 वर्ष से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की संख्या 4,54,508 है। इस चरण के चुनाव में भी विपक्ष के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है। सिर्फ उसे अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए लड़ाई लड़नी है।

प्रियंका वाड्रा की सक्रियता के बाद कांग्रेस भी अपना खाता खोलने की उम्मीद लगाये बैठी है। कांग्रेस समर्थकों का मानना है कि उन्नाव और कानपुर के अलावा खीरी, हमीरपुर और अलीगढ़ में भी जीतने की स्थिति में रहेंगे। इसका कारण है कि खीरी में कांग्रेस उम्मीदवार जफर अली नकवी पिछले लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार वे पांच साल तक लगातार क्षेत्र में बने रहे। खीरी की कांग्रेसी राजनीति में अच्छी पकड़ रखने वाले अजित सिंह राणा का कहना है कि उनके लिए धौरहरा से उम्मीदवार व कांग्रेस के दिग्गजों में शामिल जितिन प्रसाद के साथ मतभेद का होना घातक साबित हो सकता है। जफर अली नकवी कांग्रेस के पुराने नेता हैं और वे कांग्रेस में जितिन के बढ़े कद को स्वीकार नहीं करते। इस कारण दोनों नेताओं व उनके समर्थकों में अंदरूनी तौर पर एक दूसरे को काटने की रणनीति चलती रहती है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच यह मतेभद कभी मंच पर नहीं आया लेकिन जब भी किसी मंच पर दोनों नेता एक साथ होते हैं तो उनके समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति आ जाती है।

अलीगढ़ से कांग्रेस ने चौधरी बृजेंद्र सिंह को टिकट दिया है। वे 2009 में यहीं से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते थे। हमीरपुर में कांग्रेस के टिकट पर प्रीतम लोधी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। लोधी पिछले लोकसभा चुनाव में भी हमीरपुर से ही चुनाव लड़े थे।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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