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कश्मीर रवाना होते हुए EU सांसद बोले, जमीनी हालातों का लेंगे जायजा

कश्मीर रवाना होते हुए EU सांसद बोले, जमीनी हालातों का लेंगे जायजा

नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए यूरोपियन सांसदों का प्रतिनिधि मंडल मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट से जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना हो चुके हैं और थोड़ी देर में कश्मीर पहुंच जाएंगे। जम्मू-कश्मीर के दौरे पर यूरोपियन यूनियन के सासंदों की यह टीम जमीनी हालातों का जायजा लेगी। बता दें कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद यह किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल की पहली कश्मीर यात्रा होगी। घाटी रवाना होने से पहले यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने पीएम मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की थी।

- वेल्स से यूरोपीय संसद के सदस्य नैथन गिल ने कहा, हमारे लिए कश्मीर में एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल के रूप में जाने और जमीन पर जो कुछ भी हो रहा है, उसे पहली बार देखने का यह एक अच्छा अवसर है।

- यूरोपियन सांसद कश्मीर दौरे के लिए होटल से निकले

- एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरे से शिष्‍टमंडल को जम्‍मू, कश्‍मीर और लद्दाख क्षेत्र की सांस्‍कृतिक एवं धार्मिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही वे इस क्षेत्र के विकास एवं शासन से संबंधित प्राथमिकताओं की सही स्थिति से अवगत होंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी सांसदों को पाकिस्तान से पनपने वाले सीमा पार आतंकवाद, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर के दर्जे में किए गए संवैधानिक बदलाव और घाटी की स्थिति से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल में नौ देशों के सदस्य हैं।

केंद्र सरकार की ओर से 5 अगस्त को कश्मीर से 370 हटाए जाने के बाद यूरोपियन यूनियन ने भारत के पक्ष का समर्थन किया था। यूनियन ने एक बयान जारी करके पाकिस्तान के रवैये को संदिग्ध बताते हुए कहा था कि कश्मीर द्विपक्षीय मसला है। उस समय यूरोप की संसद में कई सांसदों ने एक सुर में पाकिस्तान की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि हमें भारत का समर्थन करना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान में आतंकियों को संरक्षण मिलता है और वे पड़ोसी देश में हमले करते हैं।

इससे पहले अमेरिका के छह सांसदों ने भारतीय राजदूत हर्षवर्धन शृंगला को पत्र लिखकर मांग की थी कि उन्हें और विदेशी पत्रकारों को कश्मीर जाने की अनुमति दी जाए। अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में दावा किया है कि कश्मीर घाटी को लेकर भारत की तरफ से जो तस्वीर पेश की जा रही है, वह उनके सहयोगियों की बताई स्थिति से अलग है। पत्र में सभी राजनीतिक बंदियों को तत्काल रिहा करने की मांग भी की गई थी।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने ट्विटर पर कहा है कि उम्मीद है कि यूरोपियन सांसदों को स्थानीय लोगों से मिलने दिया जाएगा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, उम्मीद है कि उन्हें लोकल मीडिया, डॉक्टरों और अन्य सिविल सोसायटी सदस्यों से मिलने दिया जाएगा। कश्मीर और दुनिया के बीच लगा पर्दा हटना चाहिए।

यूरोपीय संघ के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने की इजाजत देने को लेकर कांग्रेस ने सोमवार सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय नेताओं को वहां जाने की अनुमति नहीं देना और विदेश के नेताओं को इजाजत देना देश की संसद एवं लोकतंत्र का पूरी तरह अपमान है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा, जब भारतीय नेताओं को जम्मू-कश्मीर के लोगों से मुलाकात करने से रोक दिया गया तो फिर राष्ट्रवाद के चैम्पियन होने का दावा करने वालों ने यूरोपीय नेताओं को किस वजह से जम्मू-कश्मीर का दौरा करने की इजाजत दी ?

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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