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चुनाव आयोग ने किया हरियाणा, महाराष्ट्र चुनावों का ऐलान, जानें किस दिन होने हैं चुनाव

दिल्ली/वेब डेस्क। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में एक ही चरण में 21 अक्टूबर को मतदान होगा। दोनों ही राज्यों में नतीजे 24 अक्टूबर को आएंगे। यानी दीवाली से पहले हरियाणा-महाराष्ट्र में नई सरकार आ जाएगी।

हरियाणा-महाराष्ट्र में क्रमश: 2 नवंबर और 9 नवंबर को विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। एक और राज्य झारखंड में दिसंबर में चुनाव होने की संभावना है। उसकी घोषणा बाद में की जाएगी। इस दौरान चुनाव आयोग की ओर से अलग-अलग राज्यों की 64 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान भी किया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि प्रत्येक प्रत्याशी के लिए चुनाव में खर्च की अधिकतम सीमा 28 लाख रुपये रहेगी, ये नियम दोनों ही राज्यों में लागू होगा। चुनाव आयोग खर्च पर नजर रखेगा। साथ ही उम्मीदवारों, पार्टियों के सोशल मीडिया पर भी नजर रखेगा। तारीखों का ऐलान करने से पहले चुनाव आयोग ने सुरक्षा का जायजा लिया और तैयारियों को परख कर ही अब चुनाव कराया जा रहा है। आयोग की ओर से राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वह अपने प्रचार में प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करें और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अपने प्रचार को आगे बढ़ाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम पूरी तरह से सेफ हैं। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को डबल लॉक में रखा जाएगा। कोई भी उम्मीदवार और उनके साथी एक निश्चित सुरक्षित दूरी से स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा पर निगाह रख सकते हैं।

महाराष्ट्र और हरियाणा में सीटों की स्थिति

सीटों की स्थिति देखें तो महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं, जबकि हरियाणा में 90 सीटें जबकि झारखंड में विधानसभा की 81 सीटें हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, लिहाजा भाजपा के सामने इन राज्यों में वापसी की चुनौती है। वहीं, महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी, झारखंड में जेएमएम और हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में लौटने के लिए जोरदार कोशिश कर रही हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी ने गठबंधन की घोषणा कर दी है, जबकि भाजपा और शिवसेना के बीच गठबंधन पर बातचीत चल रही है।

हालांकि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन जारी रहेगा और दोनों पार्टियां 135-135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि इस फॉर्मूले पर निर्णय पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ले लिया था, हम उस फॉर्मूले पर अडिग हैं, गठबंधन की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

हरियाणा में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला

2014 में हरियाणा की 90 में से 47 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। खास बात यह कि पहली बार हरियाणा में भाजपा को अपने दम पर बहुमत मिला था और मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई में वहां सरकार बनी। भजनलाल के बाद दूसरी बार प्रदेश को मनोहर लाल खट्टर के रूप में गैर-जाट सीएम मिला था। इस चुनाव में दूसरे नंबर पर आईएनएलडी रही, जिसे 19 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस 15 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही।

इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के दो फाड़ होने के बाद मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला ने आईएनएलडी से अलग होकर जननायक जनता पार्टी बना ली है। उन्होंने कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। ऐसे में पार्टी के जाट वोटरों के बंटने से भाजपा को फायदा मिलने की बात कही जा रही है। यहां भाजपा ने मिशन 75 का टारगेट रखा है।

महाराष्ट्र का चुनावी गणित

महाराष्ट्र की बात करें तो 2014 में यहां 288 विधानसभा सीटों में से 122 सीट जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। 25 साल में पहली बार शिवसेना और भाजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और अपने दम पर कोई भी बहुमत तक नहीं पहुंच सका था। चुनाव के बाद दोनों ने एक बार फिर गठबंधन सरकार बनाई थी। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने थे। इस चुनाव में शिवसेना ने कुल 63 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं कांग्रेस के खाते में 42 और एनसीपी के खाते में 41 सीटें रही थीं।

साल 2014 में महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव की तारीखों की घोषणा 20 सितंबर को हुई थी और 15 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव के नतीजे 19 अक्टूबर को घोषित हुए थे। झारखंड में 25 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच विधानसभा चुनाव हुए थे जबकि नतीजे 23 दिसंबर को आए थे।

बहरहाल, अब जब महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है तो सभी पार्टियां एक्शन मोड में आ जाएंगी। पिछली बार की तरह इस बार भी लोकसभा चुनाव के ठीक बाद दोनों राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में मोदी सरकार द्वारा लिए गए कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाने, तीन तलाक और एनआरसी जैसे फैसलों का असर चुनावों पर देखा जा सकता है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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