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नोबेल पुरस्कार पाने वाले छठवें दम्पति बने बनर्जी-डफ्लो, पीएम मोदी ने दी बधाई

नोबेल पुरस्कार पाने वाले छठवें दम्पति बने बनर्जी-डफ्लो, पीएम मोदी ने दी बधाई

नई दिल्ली। भारतीय अमेरिकी अभिजीत बनर्जी को वर्ष 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार फ्रांस की एस्थर डुफ्लो (अभिजीत बनर्जी की पत्नी) और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया गया है। यह पुरस्कार 'वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के लिए किये गये कार्यों के लिये दिया गया। अभिजीत बनर्जी को नोबेल मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी है। इसके अलावा उन्होंने बाकी दोनों विजेताओं को भी बधाई दी। नोबेल समिति के सोमवार को जारी एक बयान में तीनों को 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई। आपको बता दें कि अभिजीत बनर्जी भारतीय मूल के हैं।

अभिजीत बनर्जी और एस्तेय डफ्लो दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार पाने वाले छठवें दम्पति बन गए। नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले दंपति 1903 में पियरे क्यूरी और मैरी क्यूरी थे जिन्होंने रेडियम और पोलोनियम की खोज के लिए यह पुरस्कार जीता था। पिछली बार 2014 में ब्रिट मोजर और एडवर्ड आई मोजर ने चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार जीता था ।

भारतीय-अमेरिकी बनर्जी और फ्रांसीसी-अमेरिकी डफ्लो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े हैं। कोलकाता में जन्मे अभिजीत बनर्जी साउथ पॉइंट स्कूल और प्रेसिडेंसी कॉलेज के पूर्व छात्र थे और वर्तमान में एमआईटी में फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे हैं । उन्होंने वर्ष 1983 में दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (एम ए )किया था ।

एस्तेर बनर्जी की छात्र रही हैं । अभिजीत बनर्जी ने एमआईटी में प्रोफेसर डॉ. अरुंधति तुली बनर्जी से शादी की थी और उनके एक बेटा भी है। दोनों ने बाद में तलाक लिया । डफ्लो और बनर्जी की 2012 में एक संतान भी थी और 2015 में दोनों ने औपचारिक रूप से शादी की।

अर्थशास्त्र में इस बार का नोबेल पुरस्कार वैश्विक गरीबी को कम करने के प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए अभिजीत बनर्जी, एस्तेर डफ्लो और माइकल क्रेम को संयुक्त रूप से दिया गया है। माइकल क्रेमर हार्वर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े हैं।

बनर्जी और डफ़्लो 'पूअर इक्नोमिक्स' नामक एक प्रसिद्ध पुस्तक लिख चुके हैं। आर्थिक नोबेल जीतने वाली दूसरी महिला बनी डफ्लो ने कहा कि गरीबी की समस्याओं को जड़ों से समझे बिना लोगों ने इसे एक 'कारिकेचर' बना दिया है। हमने समस्या को समझने के लिए प्रत्येक घटक का वैज्ञानिक कठोरता से विश्लेषण किया है।

बनर्जी को उनके सीधे नकद हस्तांतरण पर उनके शोध के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने दिखाया है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि गरीबों को नकद देने से उनके काम करने के स्वभाव पर प्रतिकूल असर पड़ता है ।

नोबेल पुरस्कार विशेष रूप से उन शोधकर्ताओं को दिया जाता है जिन्होंने भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान या चिकित्सा, साहित्य, आर्थिक विज्ञान और शांति के क्षेत्र में उत्कृष्ट खोज की है या असाधारण काम किया है।

अभिजीत बनर्जी को नोबेल मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी है। इसके अलावा उन्होंने बाकी दोनों विजेताओं को भी बधाई दी। नोबेल समिति के सोमवार को जारी एक बयान में तीनों को 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई। आपको बता दें कि अभिजीत बनर्जी भारतीय मूल के हैं।

हम आपको बता दें कि बनर्जी ने वर्ष 2003 में डुफ्लो और सेंडिल मुल्लाइनाथन के साथ मिलकर अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी एक्शन लैब (जे-पाल) की स्थापना की। वह प्रयोगशाला के निदेशकों में से एक हैं। बनर्जी संयुक्तराष्ट्र महासचिव की '2015 के बाद के विकासत्मक एजेंडा पर विद्वान व्यक्तियों की उच्च स्तरीय समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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