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अमित शाह ने कहा - मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए गरीबी उन्मूलन जरूरी

अमित शाह ने कहा - मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए गरीबी उन्मूलन जरूरी

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को यहां कहा कि मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए गरीबी उन्मूलन जरूरी है। केन्द्र की मोदी सरकार ने अपनी योजनाओं से जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर इसी दिशा में काम किया है।

गृहमंत्री यहां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 26वें स्थापना दिवस पर डीआरडीओ भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार को देश में एक सीमित दायरे में देखा जाता रहा है। आतंक और नक्सलवाद के शिकार लोगों के मानवाधिकारों की भी चिंता की जानी चाहिए। केवल 'एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग' और 'कस्टोडियल डेथ' तक ही मानवाधिकार को सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

शाह ने कहा कि भारत में केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करने से मानवाधिकार की रक्षा में सफलता नहीं मिलेगी। हमें चाहिए कि हम अपने देश की परिस्थितियों को देखते हुए समस्या और उनका समाधान खोजें। वर्तमान सरकार ने एनएचआरसी कानून में बदलाव कर आयोग को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास किया है।

गृहमंत्री ने कहा कि आज दुनिया जिन मानवाधिकारों की बात करती है, वह सदियों से हमारे सामाजिक ताने-बाने में मौजूद रहे हैं। अपनी परंपरा के साथ मानवाधिकारों का समन्वय बनाने से हम दुनिया में इस क्षेत्र में मिसाल कायम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे साहित्य में हमारे गीतों में मानवाधिकारों की व्यापक समझ छिपी है। गांधी जी का प्रिय गीत 'वैष्णव जन तो तेने कहिये' इसको मूर्त रूप देता है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एचएल दत्तू ने कहा कि पिछले कुछ सालों से मानवाधिकार आयोग ने प्रयास कर पुराने मामलों के निपटान में सफलता हासिल की है। अब 2016 के पहले का कोई मामला उसके पास लंबित नहीं है। पिछले साल 88 ऐसे मामले में रहे हैं, जिसमें मानवाधिकार आयोग ने जांच समिति घटना स्थल पर भेजी है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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