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रोड से लेकर संसद तक प्रदर्शनों के बीच गृहमंत्री ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल किया पेश

रोड से लेकर संसद तक प्रदर्शनों के बीच गृहमंत्री ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल किया पेश

नई दिल्ली। लोकसभा में भारी विरोध और देशभर में चल रहे प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार की दोपहर नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पेश कर दिया। इस विधेयक के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि देश के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए लाया गया विधेयक है। जबकि, अमित शाह ने कहा कि यह बिल .001 फीसदी भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। जबकि, दूसरी तरफ नागरिक संशोधन बिल पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने कहा- हम नागरिक संशोधन बिल के खिलाफ हैं और पार्टी हर कीमत पर इसका विरोध करेगी।

इस विधेयक के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं और काफी संख्या में लोग तथा संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे असम समझौता 1985 के प्रावधान निरस्त हो जाएंगे जिसमें बिना धार्मिक भेदभाव के अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे जाने की अंतिम तिथि 24 मार्च 1971 तय है। प्रभावशाली पूर्वोत्तर छात्र संगठन (नेसो) ने क्षेत्र में दस दिसम्बर को 11 घंटे के बंद का आह्वान किया है।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था। भाजपा नीत राजग सरकार ने अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था और वहां पारित करा लिया था। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदर्शन की आशंका से उसने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया। पिछली लोकसभा के भंग होने के बाद विधेयक की मियाद भी खत्म हो गयी।

लाइव अपडेट

- लोकसभा में नागरिकता बिल पेश हो गया है। पेश होने के लिए जो वोटिंग हुई, इसमें 293 हां के पक्ष में और 82 विरोध में वोट पड़े। लोकसभा में इस दौरान कुल 375 सांसदों ने वोट किया।

- अमित शाह ने इस दौरान कहा कि हमारे देश की 106 किमी. सीमा अफगानिस्तान से सटी है, ऐसे में उसे शामिल करना जरूरी था। मैं इसी देश का हूं और भूगोल जानत हूं, शायद ये लोग PoK को भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं।

-विपक्षी नेताओं की तरफ से आर्टिकल 14 पर जो सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पर अमित शाह जवाब दे रहे हैं। अमित शाह ने इस दौरान कहा कि इस बिल में संविधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

--AIUDF चीफ बोले-संसद में नागरिकता संशोधन बिल पास होगा तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

-AIADMK नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में आ गई है। आपको बताते जाए कि AIADMK के राज्यसभा में 11 सांसद हैं।

-इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग पार्टी के सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया है।

-शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को ट्वीट करते हुए लिखा है कि अवैध नागरिकों को बाहर करना चाहिए, हिंदुओं को भारत की नागरिकता देनी चाहिए। लेकिन उन्हें कुछ समय के लिए वोटिंग का अधिकार नहीं देना चाहिए। क्या कहते हो अमित शाह? और कश्मीरि पंडितों का क्या हुआ, क्या 370 हटने के बाद वो वापस जम्मू-कश्मीर में पहुंच गए?

-शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया है। मुखपत्र सामना के जरिए शिवसेना ने कहा है कि है इस बिल के जरिए बीजेपी हिंदू-मुसलमान के बीच अदृश्य बंटवारे की कोशिश कर रही है।

-कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा है कि कांग्रेस पार्टी अपने वर्तमान रूप में नागरिकता संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करती है, क्योंकि यह असंवैधानिक है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इस बावत पार्टी ने अपने सांसदों को 3 दिनों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। अगर यह बिल कानून बन जाता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को CAB के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक में भारत के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। मुझे विश्वास है कि जब विधेयक के प्रावधानों की घोषणा होगी तो असम समेत पूर्वोत्तर और संपूर्ण भारत में इसका स्वागत किया जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम जहां इनर लाइन परमिट (आईएलपी) की व्यवस्था लागू है उसे सीएबी के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिसको लेकर 2019 के आम चुनाव में इलाके में राजनीतिक विवाद पैदा हुआ।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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