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दहशत फैलाता डेंगू का रौद्र रूप

इस वर्ष डेंगू के मरीजों के मामलों में चिंताजनक बात यह है कि बहुत से मरीज ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें डेंगू के साथ-साथ मलेरिया के भी लक्षण देखे गए हैं।

दहशत फैलाता डेंगू का रौद्र रूप

- योगेश कुमार गोयल

देखा जाता रहा है कि ठंड के दस्तक देने के बाद रात के तापमान में गिरावट आने पर डेंगू के मच्छर स्वतः ही खत्म हो जाते हैं लेकिन इस बार स्थिति खतरनाक है। अलग-अलग राज्यों में प्रशासन द्वारा भले ही कितने भी दावे किए जा रहे हों,हकीकत यही है कि अधिकांश स्थानों पर मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए संतोषजनक प्रबंध नहीं किए जा रहे। सरकारी हो या निजी अस्पताल, वहां भी मच्छरों की भरमार नजर आती है और डेंगू के साथ-साथ चिकनगुनिया, मलेरिया और स्वाइन फ्लू के मामले भी सामने आ रहे हैं। दिल्ली में भले ही इस वर्ष डेंगू के मरीजों की संख्या में पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी गिरावट देखी गई है किन्तु दूसरों राज्यों में स्थिति काफी बदतर है। भारत में हर साल डेंगू के हजारों मामले सामने आने और प्रतिवर्ष डेंगू के चलते कुछ मौत होने के बावजूद इससे बचाव के लिए प्रशासन द्वारा कितने पुख्ता इंतजाम किए जाते रहे हैं, इसका खुलासा इसी से हो जाता है कि दुनियाभर में जितनी आबादी डेंगू के कहर के साये में जीती है, उसमें से करीब 50 फीसदी मरीज भारत में ही होते हैं।

इस वर्ष डेंगू के मरीजों के मामलों में चिंताजनक बात यह है कि बहुत से मरीज ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें डेंगू के साथ-साथ मलेरिया के भी लक्षण देखे गए हैं। इससे पहले वर्षभर में एक-दो मरीजों में ही ऐसा देखने को मिलता था। पिछले डेढ़-दो माह के भीतर ही सिर्फ दिल्ली में ही दर्जनों ऐसे मरीज अस्पतालों में और कुछ आईसीयू में भी भर्ती हुए हैं। हालांकि दोनों बीमारियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं किन्तु कई बार लक्षण एक जैसे भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टरों द्वारा सलाह दी जा रही है कि मरीजों को डेंगू और मलेरिया दोनों की जांच करानी चाहिए। मलेरिया में बुखार प्रायः रुक-रुककर आता है। इसमें शरीर में कंपकपाहट भी होती है किन्तु डेंगू का बुखार लगातार रहता है। दोनों बीमारियां एक साथ होने पर लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। इस संबंध में एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को सुबह मलेरिया के लिए जिम्मेदार एनाफिलीज मच्छर और शाम को डेंगू के लिए जिम्मेदार एडीज मच्छर काट ले तो ऐसे व्यक्ति में दोनों बीमारियों के लक्षण मिलते हैं। यह चिंता की स्थिति इसलिए है क्योंकि अगर डेंगू और मलेरिया एक साथ हो जाएं तो ऐसे मरीज की किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है । दोनों बीमारियों का एक साथ होना कुछ मामलों में प्राणघातक भी हो सकता है।

पश्चिम बंगाल में तो डेंगू इस साल मौत का पर्याय बनकर सामने आया है। वहां डेंगू से हुई मौतों का अध्ययन करने के बाद विशेषज्ञों का दावा है कि डेंगू अब इतना खतरनाक हो गया है कि यह पीडि़त को इतनी बुरी तरह से अपनी चपेट में लेता है कि शरीर के अधिकांश अंग कार्य करना बंद कर देते हैं। फिर उसकी मौत हो जाती है। पश्चिम बंगाल में डेंगू से हुई मौत के मामलों का विश्लेषण करने पर खुलासा हुआ है कि इनमें से अधिकांश रोगियों के लीवर, किडनी, आंत इत्यादि अधिकांश अंगों ने कार्य करना बंद कर दिया था। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि पहले जहां डेंगू का असर 15-20 दिनों बाद शरीर के अन्य अंगों पर शुरू होता था, वहीं अब यह एक सप्ताह के अंदर ही किडनी, लीवर और आंतों तक पहुंच जाता है और शरीर के अंग कार्य करना बंद कर देते हैं।

पहली बार ऐसा भी देखा जा रहा है कि डेंगू के कुछ मरीजों में आमतौर पर दिखाई देने वाले लक्षण ही नजर नहीं आ रहे। इस बदलाव से डॉक्टर भी हैरान-परेशान हैं। डेंगू के कुछ ऐसे रोगी अस्पतालों में पहुंचे हैं, जिनमें बुखार तथा सिरदर्द जैसे लक्षण नदारद थे। उनमें सिर्फ शारीरिक कमजोरी तथा प्लेटलेट्स कम होने के लक्षण ही देखे गए थे। डेंगू से पीडि़त व्यक्ति को प्रायः तेज सिरदर्द होता है और लगातार बुखार आता है, जो 100 डिग्री के आसपास बना रहता है। इसके विपरीत भर्ती हुए डेंगू के कुछ मरीजों में बुखार और सिरदर्द के लक्षण नदारद थे। सिर्फ थकान और कमजोरी की शिकायत करने वाले ऐसे मरीजों में डेंगू की पहचान बड़ा मुश्किल होता है। उनके रक्त जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही उनमें डेंगू की पुष्टि की जा सकती है। डेंगू के लक्षणों में आए इस बड़े बदलाव को लेकर किए गए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि एडीज मच्छर के वायरस और स्ट्रेन में बदलाव के कारण ही ऐसा हो रहा है। हालांकि चिकित्सक इस बदलाव को जानलेवा तो नहीं, किन्तु चिंताजनक अवश्य मान रहे हैं।

डेंगू वायरस संक्रमण की वजह से होता है, जो श्वेत रक्त कोशिकाओं पर धावा बोलता है। इससे डेंगू पीडि़त व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर पड़ जाती है। यह रोग मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है। केवल मादा मच्छर में ही डेंगू के वायरस होता हैं और यह मच्छर दिन में ही काटता है। एडीज मच्छर के काटने के करीब 3-5 दिनों बाद डेंगू बुखार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इलाज सही मिले तो स्थिति जल्द नियंत्रित हो सकती है अन्यथा डेंगू कई बार जानलेवा साबित होता है।

तमाम प्रचार-प्रसार के बावजूद आज भी बहुत से लोगों के दिमाग में इस बीमारी को लेकर यह धारणा व्याप्त है कि डेंगू का मच्छर गंदी नालियों या दूषित जल में पनपता है। वास्तविकता यही है कि वायरस जनित यह खतरनाक बीमारी साफ-सुथरे पानी में पनपने वाले एडीज मच्छरों के काटने से फैलती है। डेंगू के मच्छर प्रायः मानसून के बाद ठहरे हुए साफ पानी में पैदा होते हैं। ये मच्छर प्लास्टिक के ड्रमों, टंकियों इत्यादि में पैदा होते हैं। इसके अलावा कूलरों में पानी भरे रहने पर उस पानी में डेंगू के मच्छर पनपते हैं।

अभी तक डेंगू के इलाज के लिए कोई दवा या एंटीबायटिक अथवा टीका उपलब्ध नहीं है, अतः इसका इलाज इसके लक्षणों का इलाज करके ही किया जाता है। इसीलिए डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता और सजगता पर ही विशेष जोर दिया जाता है। जितना मुश्किल डेंगू के संक्रमण से खुद को बचाए रखना है, उससे भी मुश्किल डेंगू होने के बाद उससे पूरी तरह उबरना है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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