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शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़तीं ट्रेक्टर-ट्रॉली ने फिर ली एक मासूम की जान, बांसखेड़ी में हुआ हादसा

शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़तीं ट्रेक्टर-ट्रॉली ने फिर ली एक मासूम की जान, बांसखेड़ी में हुआ हादसा

भवन निर्माण सामग्री विक्रेताओं के आगे बेबस है प्रशासन, दिन के समय शहर में प्रवेश पर है प्रतिबंध

गुना/निज प्रतिनिधि। शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहीं ट्रेक्टर-ट्रॉलियों में से एक ने शुक्रवार को फिर एक मासूम की जान ले ली। हादसा शहर के बीचों -बीच रहवासी बस्ती बांसखेड़ी में हुआ, जिसमें परीक्षा देने वाले रही 6 वर्षीय मासूम को एक ट्रेक्टर-ट्रॉली ने पीछे से टक्कर मारकर अपने पहियों तले रौंद दिया। हादसे में गंभीर रुप से घायल हुई बालिका ने बाद में जिला अस्पताल उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बताया जाता है कि ट्रेक्टर-ट्रॉली भवन निर्माण सामग्री ढोने के कार्य में लगी हुई थी और सीमेन्ट खाली कर वापस लौट रही थी। हादसे के बाद लोगों ने ट्रेक्टर चालक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है। इसके साथ ही घटना को लेकर उनमें जबर्रदस्त आक्रोष देखने को मिल रहा है।

सीमेन्ट खाली कर आ रही थी ट्रेक्टर-ट्रॉली

रहवासियों के मुताबिक ट्रेक्टर चालक ने बताया कि ट्रेक्टर-ट्रॉली से भवन निर्माण सामग्री ढोने का कार्य किया जाता है। घटना के समय भी वह एक स्थान पर सीमेन्ट की बोरी उतारकर आ रहा था।

नहीं रुक रहे थे परिजनों के आंसू, मोहल्ले में भी मातम

छह वर्षीय मासूम बालिका चांदनी की मौत ने सबको हिलाकर रख दिया है। जहां अस्पताल में मौजूद परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे तो मोहल्ले में भी मातम पसरा हुआ था। अस्पताल में बच्ची के पिता बिल्कुल टूटे दिखाई दे रहे थे। ऐसा लग रहा था, जैसे की उनकी सारी दुनिया ही लुट गई हो, अन्य परिजनों की हालत भी खराब थी। चांदनी कक्षा एक की छात्रा थी और इन दिनों उसकी परीक्षा चल रही थी। चूंकि स्कूल घर के पास में ही है, इसलिए अन्य बच्चों के साथ चांदनी भी अकेले ही स्कूल आती-जाती रही है। शुक्रवार को भी वह स्कूल जाने के लिए आस-पड़ोस के अन्य बच्चों के साथ घर से निकली थी। इसी दौरान उक्त हादसा हो गया। परिजनों ने बताया कि दो छोटे भाईयों की एकलौती बहन चांदनी को घर में सभी बहुत प्यार करते थे। दो छोटे भार्ईयों की इकलौती बहन चांदनी, इसलिए उसे परिवार में सभी बहुत प्यार करते थे। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि चांदनी अब इस दुनिया में नहीं है। मोहल्ले वालों का कहना है कि चांदनी का चेहरा रह-रहकर उनकी आँखों के सामने आ रहा है।

सिर्फ हो रही है चालानी कार्रवाई

एक तरह जहां यातायात नियमों को पहिए तले रौंदकर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो दूसरी तरह यातायात पुलिस और परिवहन विभाग महज चालानी कार्रवाई कर अपना खजाना भरने में लगे हुए है। यह इस घटना ने फिर प्रमाणित कर दिया है कि दोनों विभागों की रुचि सिर्फ अपना खजाना भरने में ही है, यातायात सुधारने में नहीं। उक्त ट्रेक्टर-ट्रॉली भवन निर्माण सामग्री भरकर शहर की रहवासी बस्ती में कैसे पहुँची, जबकि इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है? तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस घटना के बाद तो सक्रियता दिखाई जाएगी।

लगातार हो रहे हादसे, फिर भी जिम्मेदार मौन

भवन निर्माण सामग्री सहित अन्य सामग्री ढोने में लगीं ट्रेक्टर-ट्रॉली से यह पहला हादसा नहीं है, इससे पहले भी ऐसे दर्दनाक हादसे सामने आते रहे है, इसके बाद भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए है। गौरतलब है कि पूर्व में सामने आए हादसों के बाद सुबह 10 से रात को 10 बजे तक भवन निर्माण सामग्री ढोने वाली ट्रेक्टर-ट्रॉलियों के शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, किन्तु यह प्रतिबंध महज कुछ दिन चला, इसके बाद सब पुराने ढर्रे पर चल निकला। पिछले लंबे समय से ट्रेक्टर-ट्रॉलियां मौत बनकर शहर की सड़कों पर दौड़ रहीं है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि परिवहन विभाग में उक्त ट्रेक्टर-ट्रॉलियां का पंजीयन महज कृषि कार्य में उपयोग के लिए होता है, किन्तु सडक़ पर यह भवन निर्माण सामग्री सहित अन्य सामान ढोने के साथ ही लोगों को सफर भी करातीं देखी जा सकतीं हैं। इन ट्रेक्टर-ट्रॉलियों के पलटने की घटनाएं भी सामने आ चुकीं है। बांसखेड़ी में ही कुछ दिन पहले एक महिला को ट्रेक्टर-ट्रॉली ने टक्कर मारी थी तो प्रताप छात्रावास मार्ग पर भी स्कूटी सवार माँ -बेटी को ट्रेक्टर ट्रॉली ने टक्कर मार दी थी। इसके अलावा भी अन्य कई दुर्घटनाएं इन ट्रेक्टर-ट्रॅालियों से सामने आ चुकीं हैं।

Naveen ( 1696 )

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