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स्टीमाक बने भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच

स्टीमाक बने भारतीय फुटबॉल टीम के मुख्य कोच

नई दिल्ली। क्रोएशिया के पूर्व खिलाड़ी इगोर स्टीमाक को बुधवार को यहां अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने भारत की पुरुष टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया। एआईएफएफ के अनुसार, स्टीमाक को दो साल का अनुबंध प्रदान किया है। उन्हें कोचिंग समेत क्रोएशिया एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल एवं खिलाडिय़ों को विकसित करने में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

एक कोच के रूप में स्टीमाक की सबसे बड़ी उपलब्धि क्रोएशिया को 2014 फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई कराना है। राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में उन्होंने मैटयो कोवाचिक, एंटे रेबिक, एलेन हलीलोविक और इवान पेरेसिक समेत कई खिलाडिय़ों को उनका पहला मैच खेलने का मौका दिया। उन्होंने डारियो सर्ना, डेनियल सबासिक, इवान स्ट्रीनिक, कोविचिक, पेरेसिक को बेहतर खिलाड़ी बनाने में अहम भूमिका निभाई।

एक खिलाड़ी के रूप में स्टीमाक क्रोएशिया की उस टीम का हिस्सा थे जो 1998 विश्व कप में तीसरे पायदान पर रही थी। एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि ब्लू टाइगर्स का कोच बनने के लिए इगोर सही उम्मीदवार हैं। मैं उनका स्वागत करता हूं। भारतीय फुटबॉल बदलाव के दौर से गुजर रहा है और मुझे विश्वास है कि उनका अनुभव हमें आगे ले जाएगा। इस साल की शुरुआत में एएफसी एशियन कप के बाद स्टीफन कांस्टेनटाइन के इस्तीफा देने के बाद से एआईएफएफ ने करीब 250 नामों पर विचार किया।

एआईएफएफ की तकनीकी समिति ने चार उम्मदीवारों को चुना और उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया। स्टीमाक के अलावा स्पेन के अल्बर्ट रोका, स्वीडन के हकान एरिकसन और दक्षिण कोरिया के ली मिन सुंग का साक्षात्कार लिया गया। इसके बाद, श्याम थापा की अध्यक्षता वाली तकनीकी समिति ने स्टीमाक के नाम को मंजूरी के लिए कार्यकारी समिति के पास भेजा। महासंघ के महासचिव कुशल दास ने कहा कि इगोर स्टीमाक के आने से भारत फुटबॉल को बहुत लाभ मिलेगा।

एक कोच के रूप में उनकी साख और एक खिलाड़ी के रूप में उनका अनुभव खिलाडिय़ों और भारतीय फुटबॉल के इको सिस्टम को और बेहतर करेगा। हमें अभी तक जो गति प्राप्त हुई है उसे बनाए रखना होगा। थापा ने कहा कि स्टीमाक के नाम पर तकनीकी समिति के सभी सदस्य राजी हुए थे। तकनीकी निदेशक इसाक डोरू उनसे बहुत प्रभावित थे और वह निश्चित थे कि स्टीमाक इस काम के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवार हैं।

वे विश्व कप में खेल चुके हैं और एक कोच के रूप में भी क्रोएशिया को विश्व कप तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि इससे बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता है। वह इस बात से भी काफी प्रभावित हुए कि स्टीमाक भारतीय फुटबॉल बहुत अच्छी रिसर्च करके आए थे। स्टीमाक के मार्गदर्शन में पांच जून से थाईलैंड में शुरू होने वाले किंग्स कप में पहली बार भारतीय टीम खेलेगी।

भारतीय फुटबॉल टीम के फॉरवर्ड उदांता सिंह का मानना है कि आगामी किंग्स कप भारतीय टीम को ऊपर ले जाने के लिए एक अच्छा मंच साबित हो सकता है। भारत को थाईलैंड के बुरीराम में अगले महीने किंग्स कप में भाग लेना है। उदांता का मानना है कि एएफसी एशियन कप में खेलने का फायदा भारत को मिलेगा लेकिन इसके लिए टीम को अपनी लय कायम रखनी होगी। उदांता ने कहा कि एएफसी एशियन कप में हमने दिखाया है कि हम क्या कर सकते हैं।

दुर्भाग्यवश हम अगले दौर में नहीं पहुंच पाए, लेकिन थाईलैंड पर मिली जीत, एक युवा टीम के रूप में हमारी क्षमताओं को दिखाती है। किंग्स कप में भारत को अपना पहला मैच पांच जून को काराकाओ से खेलना है। भारतीय टीम इसके बाद फिर वियतनाम और थाईलैंड से भिड़ेगी। ये मैच 2022 में होने वाले विश्व कप क्वालीफायर्स की तैयारी में टीम की मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि हम केवल यहां से ऊपर की ओर जा सकते हैं और टीम को अपने प्रदर्शन में सुधार करने तथा आगे बढऩे के लिए किंग्स कप एक अच्छा मंच होगा। भारत चार दशकों के बाद किंग्स कप के आगामी संस्करण में भाग लेगा। भारत ने आखिरी बार 1977 में टूर्नामेंट में भाग लिया था। भारतीय फॉरवर्ड ने कहा कि ऑफ सीजन के दौरान भी वे रोजाना ट्रेनिंग करते हैं। उन्होंने कहा, मैं रोजाना ट्रेनिंग करने की कोशिश करता हूं और रोजाना किसी न किसी तरह की ताकत और कंडीशनिंग या स्ट्रेचिंग करता हूं, ताकि सीजन शुरू होते ही न केवल मैं अपनी एथलेटिक क्षमताओं को पार कर सकूं बल्कि शारीरिक रूप से भी फिट रह सकूं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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