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क्या मप्र सरकार के लिए भस्मासुर तो नहीं बन गया खनिज माफिया ?

क्या मप्र सरकार के लिए भस्मासुर तो नहीं बन गया खनिज माफिया ?

भिण्ड, ब्यूरो/अनिल शर्मा। समूचे प्रदेश के साथ-साथ चंबल अंचल में खनिज माफियाओं का कारोबार दिन दूना, रात चौगुना की तेज रफ्तार से फलफूल रहा है, खनिज कारोबारी सरकार से ही वरदान पाकर भस्मासुर की तरह इतने सशक्त हो चुके हैं कि सरकार चलाने वाले भी अपने आपको असहाय महसूस कर रहे हैं। उसका कारण रेत के अवैध कारोबारी पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ दोस्ताना ताल्लुक बनाकर उनसे इतने घुलमिल चुके हैं कि राजनेताओं की परवाह किए बगैर उनका खुलकर सरक्षण ही नहीं बल्कि उनके लिए जायज-नाजायज कुछ भी करने को तत्पर रहते हैं, किस थाने में कौन थानेदार नियुक्त होगा, यह यहां के नेता कम रेत माफिया ज्यादा तय करते हैं। फिर कोई थानेदार नेताओं की भला क्यों सुनें, कांग्रेस की अल्पमत की सरकार के कारण तपोनिष्ठ कांग्रेसी नेता ही अब हासिए पर आ गए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री सौ को छोडक़र दो को साधने में लगे हैं, नतीजन माफिया राज कई गुना अब सशक्त हो चुका है।


प्रदेश में लगातार सात बार जीत का गौरव हांसिल करने वाले सबसे सशक्त मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह की 15 साल के भाजपा शासनकाल में भी खूब तूती बोली, प्रशासन उनके विरोधी तेवर से हिलता था, आज वही नेता खनिज के अवैध उत्खनन व परिवहन रोकने के असहाय महसूस कर रहे है। पिछले दिनों प्रभारी मंत्री का अपने आपको भांजा कहने वाले एक युवक को प्रभारी मंत्री के आदेश पर स्वयं पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में मीडिया के समक्ष पकड़ा जरूर गया था। लेकिन सत्ताधारी दल के नेताओं के विरोध प्रदर्शन के बावजूद कोई कार्रवाई न होना रेत माफियाओं को तबज्जों देने का प्रशासनिक अधिकारियों का तारीफेकाविल काम रहा। जिसमें कांग्रेस की खूब किरकिरी हुई।

रेत भी प्रेत से कम नहीं - खुश किया तो मजे, विरोध किया तो खैर नहीं

चाहे जनप्रतिनिधि, पत्रकार, पुलिस प्रशासन का अधिकारी या अन्य कोई भी हो, जो माफियाओं के साथ मिलकर चलेगा तो मजे करेगा और विरोध किया तो खैर नहीं, इस फार्मूले पर माफियाओं का राज चल रहा है, रेत भी इस समय किसी प्रेत से कम ताकतवर नहीं है, जिस पर खुश हुआ उसे किया मालामाल, जिस पर हुआ नाराज उसका किया जिंदगी जीना भी दूभर, इसलिए भले लोग रेत के प्रेत के विरोध के चक्कर में पडक़र मुसीबत मोल लेना नहीं चाहते। माफियाओं को रूपहले पर्दे पर अक्सर देखा जाता था कि उनका दस्तूर कैसा होता है। फिर शराब व शिक्षा में माफियाओं को केवल सुना पर दिखाई कभी नहीं दिए, लेकिन खनिज कारोबारियों ने माफिया राज कैसा होता है यह जनमानस को भी न केवल प्रत्यक्ष दिखने लगा है वल्कि आम व्यक्ति को समझ भी आ गया है, स्थिति यह है कि आए दिन रेत खदानों पर गोलीबारी होना, किसी को भी मौत के घाट उतारना आम बात हो गई है। रेत से भरे डंपर और ट्रेक्टर साक्षात यमराज के रूप में सडक़ पर दौड़ते हैं। जो अभी तक कईयों की जान ले चुके हैं।

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