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करतारपुर ट्रैवलॉग : नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात

नीरू सिंह ज्ञानी

करतारपुर ट्रैवलॉग :  नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात

करतारपुर के लिए भारत से गए पहले जत्थे में शामिल ग्वालियर की भाजपा नेत्री नीरू सिंह ज्ञानी (जगजीत कौर) का यात्रा अनुभव

नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात। ' वे कहते हैं कि यह दिव्य खुमारी कोई ऐसा नशा नहीं है कि बस चढ़ा और उतर गया। गुरु नानक देव जी की मैं शुक्रगुजार हूं जिनकी कृपा मुझ पर हुई "नानक तेरी जय होवे" बाबा नानक तेरी जय होवे जिनकी मुझ पर बहुत कृपा हुई और मुझे करतारपुर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन किए। हमारे देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी और केंद्र सरकार का मैं धन्यवाद देना चाहूंगी कि मुझे विशेष जत्था में शामिल किया, जिसमें 570 महानुभावों को आमंत्रित किया था ।मेरे साथ ही केंद्र मंत्री हरदीप पूरी पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ,पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल ,हरसिमरत बादल ,सुखबीर बादल , पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जत्थेदार अकाल तख्त हरप्रीत सिंह जी ,गुरदासपुर के सांसद सनी देओल ,भारत देश के विभिन्न राज्यों से उपस्थित विधायक, बुद्धिजीवी, सांसद और दुनियाभर से आए हुए कुछ ही चयनित महानुभव इस जत्थे में हमारे साथ शामिल थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इस इमीग्रेशन सेंटर का उद्घाटन किया और हमारे जत्थे को रवाना किया ।सभी उपस्थित लोगों ने जकारा बुलाया "बोले सो निहाल सत श्री अकाल" यह वह ऐतिहासिक पल थे जिसका सभी श्रद्धालुओं को इंतजार था। 72 साल की अरदास" जिन गुरुद्वारों को हमसे विछोड़ाया गया है उसके खुले दर्शन दीदार का दान खालसा जीनू बक्शों "यही अरदास अब पूरी होने जा रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने उद्घाटन के बाद हम सभी भारत देश के उस गेट पर खड़े हो गए जिस गेट पर खुलने से हम प्रत्यक्ष रूप से गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शन करने के लिए जा सकते थे ।वह आखरी 10 मिनट भी सभी के लिए मुश्किल हो रहे थे क्योंकि वह गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे जिसके खुलते ही वह देश के उस तरफ पहुंच जाएंगे ,जहां पर गुरु नानक साहब की करतारपुर साहिब गुरुद्वारा स्थित है।

पाकिस्तान की तरफ से जैसी ही भारत देश को संकेत मिले तो भारत देश का गेट खोल दिया गया। जैसे ही गेट खुला तो लोगों में आतुरता और उत्सुकता थी कि लोगों ने पूरे उत्साह और जोश के साथ जकारा लगाते हुए भारत देश के गेट को पार करते हुए पाकिस्तान में प्रवेश किया । यह वही स्थान था और वही पल थे जब पाकिस्तान और हिंदुस्तान बरसों की दीवार अब गिर चुकी हो। यह ऐतिहासिक पल ऐसे प्रतीत हो रहे थे जैसे ईस्ट जर्मनी और वेस्ट जर्मनी के बीच बर्लिन की दीवार गिर गई हो।

अब बस कुछ ही समय में बचा था जब यह गलियारा पार करते ही हम गुरुद्वारा साहिब जल्द ही पहुंचने वाले थे ।पाकिस्तान प्रवेश करने पर काफी कड़ी सुरक्षा थी और पाकिस्तान लोगों का भी हमारी तरफ पूर्ण सदव्यवहार था। वहां पहुंचकर हमें इमिग्रेशन काउंटर पर परमिट दे दिया गया। यह सुबह जाकर बस वहां से शाम को वापस आना तक का था। वहां पर छोटी बस और बड़ी बस की व्यवस्था थी और बैटरी ऑपरेटेड गाड़ियां भी थी।

वाहनों द्वारा हमने 4 किलोमीटर का पुल पार किया ।दर्शन करने के लिए महज 4 किलोमीटर की दूरी को 72 साल लग गए थे। रावी नदी को भी देखा जिसको को पार करते वक्त धन गुरु नानक धन गुरु नानक की आत्मा से आवाज आनी शुरू हो गई थी। तेरी कृपा हुई है। गुरु नानक तेरी जय होवे। गुरुद्वारा साहब पहुंच गए ।गुरबाणी कीर्तन जी आवाज कानों में पड़ी "प्रगट आई सगले जोगी अंतर गुरु नानक की वडियाई"इसी वाणी से पूरा गुरुद्वारा गूंज रहा था।दर्शनी देवड़ी का नवनिर्माण खूबसूरत तरीके से किया हुआ है।

विशाल कैंपस में स्थित यह गुरुद्वारा का परिसर बिल्कुल ही नया बनाया गया था।जोड़ा घर भी बनाया गया था और वहां पर काफी श्रद्धालु सेवा कर रहे थे ।गुरुद्वारा साहिब जहां पर गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश है वह कई वर्षों से यथावत उसी स्थिति में है। गुरुद्वारे के आसपास विशाल‌ परिसर में और उसकी बाउंड्री पर बारादरी बनाई गई है जहां आए हुए श्रद्धालु रह सकते हैं। हजार पंद्रह सौ लोगों का लंगर हॉल भी बनाया गया है ,सरोवर साहब भी है और यहां पर म्यूजियम लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है ।इस गलियारे में ही सभी सुविधाएं टॉयलेट्स भी बनाई गई हैं ।

गुरु नानक देव जी की जीवनी पर पेंटिंग्स की प्रदर्शनी भी वहां पर लगाई गई थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के श्रद्धालु भी कई संख्या में वहां पर मौजूद थे जिनको वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी संबोधित किया और नवजोत सिंह सिद्धू ने भी संबोधित किया। गुरुद्वारा साहब के अंदर पहुंचते ही धन धन गुरु नानक देव जी का स्थान थड़ा साहिब बना हुआ है जहां हमने मत्था टेका और पहली मंजिल पर गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश है जहां पर प्रसाद चढ़ाया और मत्था डेककर कीर्तन सुना।श्रृद्धा के इन अदभुत रूहानियत पलों को समेटने की कोशिश कर रही थी।

गुरुद्वारा साहिब के बाहर ही लगी हुई मजार बनी हुई थी । मुसलमानों ने गुरु नानक देव जी के फूल को यहां दफनाया था ,क्योंकि उनका मानना था कि गुरु नानक देव जी उनके भी पीर हैं । गुरु नानक देव जी जब ज्योति ज्योत समा गए तो गुरु नानक नाम लेवा ने कहा कि उनका अंतिम संस्कार किया जाए और मुसलमानों ने कहा कि नहीं उनके रीति रिवाज से उनको दफनाया जाए लेकिन जब चादर उठाकर देखा तो वहां पर दो फूल थे। जिनमें से एक का अंतिम ससकार किया गया और दूसरे को दफनाया गया।

गुरु नानक देव जी तो जगतगुरु थे उनका संदेश था ना को बेरी न ही बेगाना ।अवर आलाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे । पूरे संसार की इंसानियत को एक ही इंसानियत माना और समरसता का संदेश दिया। गुरु नानक देव जी की ही कृपा थी कि ऐसा नजारा मुझे दिखाई दिया जहां एक ही धार्मिक स्थल पर जहां सिर्फ आस्था और इबादत थी ।हिंदू मुसलमान सिख सभी एक ही जगह पर वहां पर उपस्थित थे । गुरु गुरु नानक देव जी की ही कृपा थी की लोग वहां एक ही पीर जगतगुरु बाबा के दर्शन के लिए उपस्थित थे जैसे कई नदियां अलग अलग होने पर भी एक समुद्र में समा जाती है यह वही समय प्रतीत हो रहा था इंसानियत के समुद्र में सभी समा गए हो । लग रहा था समय जैसे रुक गया हो।

कीर्तन सुनकर और पाठ करके उनकी गुरु नानक देव जी की पर संदेश गुरुद्वारा साहिब में पूरा होता दिखाई दिया।अपने आप को मैं बहुत ही धन्य और सौभाग्यशाली मानती हूं और मन में बहुत ही कृतज्ञ समझती हूं कि मेरे इतने अच्छे दर्शन हुए।

"नानक निवा जो चले लगे ना ‌ तति वाओ"


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