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जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर तुष्किरण नीति के चलते हारता रहा भारत

जो 70 सालों में नहीं हुआ, वह मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने कर डाला

जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर तुष्किरण नीति के चलते हारता रहा भारत

वेब डेस्क। जम्मू-कश्मीर मसला सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच एक-दो नहीं 49 वार्ताएं की गईं, लेकिन सबके सब असफल रहीं। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने चार बार भारत पर प्रत्यक्ष आक्रमण भी किया। भारत हर बार युद्धभूमि में विजयी रहा, लेकिन कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण वार्ता की मेज नीति में तीन बार हारा। सिर्फ ​जीता तो 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के समय कारगिल युद्ध के दौरान। यह पहला अवसर पर जब​ केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान से बिना युद्ध और बिन वार्ता के भारत के विजयी स्वप्न को साकार किया है।

वरिष्ठ स्तम्भकार दिलीप अग्निहोत्री ने कश्मीर पर केन्द्र सरकार के फैसले को हिम्मतवाला बताते हुए कहा कि जो 70 सालों में नहीं हुआ, वह मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने कर डाला। इस फैसले के बाद एक हिन्दुस्थान, एक ​​संविधान, ए​क निशान और एक विधान का सपना साकार हुआ है। पूर्व सैनिक दिवाकर सिंह ने कहा कि 14 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान ने जन्म लेते ही नारा लगा दिया था 'हंसकर लिया है पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिन्दुस्थान। जम्मू-कश्मीर के बिना पाकिस्तान अधूरा है।' उनकी मंशा को 'मोदी और शाह' की जोड़ी ने बिना वार्ता किये श्रावण मास के तीसरे सोमवार और नागपंचमी पर एक ही झटके में खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी और अमित शाह ने अपने फैसले से पाकिस्तान तथा कट्टरपंथी अलगाववादियों के ​दिवास्वप्न को खत्म किया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाय, कम है।

भारत पर चार बार प्रत्यक्ष आक्रमण

पूर्व सैनिक बीके गुप्त कहते हैं कि कांग्रेस की तुष्टिकरण के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच चार समझौतों के पहले या बाद में पाक ने चार बार प्रत्यक्ष आक्रमण किया। अप्रैल, 1950 में कराची में पं. नेहरू और लियाकत अली खां के बीच, जनवरी, 1966 में लालबहादुर शास्त्री और अयूब खान के बीच, जुलाई 1972 में शिमला में इन्दिरा गांधी और जुल्फिकारअली भुट्टो के बीच तथा फरवरी, 1999 में लाहौर में अटल बिहारी वाजपेयी-नवाज शरीफ में सद्भावना बैठकें हुईं लेकिन इस सब प्रयत्नों के बावजूद पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध का न्योता दिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान द्वारा थोपे गए इन युद्धों में प्रत्येक बार भारतीय फौज आगे बढ़ी, परन्तु तत्कालीन सरकारों को समझौते करने पड़े।

हर बार युद्धभूमि में विजयी भारत वार्ता की मेज नीति में हारा

प्रथम ​तीन युद्धों व समझौतों में पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर की 2 लाख, 22 हजार, 236 वर्ग किमी. धरती में से लगभग 83 हजार वर्ग किमी. भूमि छीन ले गया। इस पाक कब्जे की भूमि में से पाकिस्तान ने 5,180 वर्ग किमी. चीन को 1960 में भेंट कर दी। केवल सन् 1999 का ​कारगिल युद्ध ऐसा है, जिसमें भारत विदेशी दबाव में झुका नहीं और पाकिस्तान से एक-एक इंच जमीन खाली करवाने में सफलता प्राप्त की। वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने कहते हैं कि पाकिस्तान केवल शक्ति की भाषा को समझता है। अनुच्छेद-370 ने देश की एकता और अखण्डता को संकट में डाल दिया था। उन्होंने कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण ही भारत 72 वर्षों से इस डंस को झेल रहा ​था। केन्द्र सरकार का यह निर्णय बलिदान हुये श्यामा प्रसाद मुखर्जी, विस्थापित कश्मिरी पंडितों, हजारों सैनिकों और लाखों नागरिकों के साथ देश को गौरवान्वित करने वाला तथा विजय का दिन है। (हि.स.)

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