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नए विधेयक से ई-कॉमर्स कंपनियों पर कसी नकेल, अब ऑनलाइन शॉपिंग भी दायरे में

नए विधेयक से ई-कॉमर्स कंपनियों पर कसी नकेल, अब ऑनलाइन शॉपिंग भी दायरे में

नई दिल्ली। लोकसभा ने मंगलवार को उपभोक्ता संरक्षण विधेयक 2019 को मंजूरी दे दी। इसमें ग्राहकों की शिकायतों की सुनवाई और निपटारे के लिए पहली बार नियामक बनाने का प्रस्ताव है। मनमानी करने वाली ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों, टेली मार्केटिंग और डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को भी दायरे में लाया गया है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है और 21 दिन के भीतर उसकी शिकायत स्वत: दर्ज मानी जाएगी।

नए विधेयक के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी। अगर उत्पाद में खराबी पाई गई तो ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी यह कहकर नहीं बच पाएगी कि वह तो केवल सामान उपलब्ध कराने का सिर्फ एक मंच है। खराब उत्पाद पर उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा और ग्राहकों को उचित मुआवजा देना पड़ेगा। ई-कॉमर्स कंपनियों को एप या वेबसाइट पर बेचे जाने वाले उत्पाद के निर्माण, उसकी लेबलिंग, दुष्प्रभाव समेत सारी जानकारी देनी होंगी। वे ग्राहकों की खरीदारी का डाटा किसी तीसरे पक्ष को व्यावसायिक गतिविधि के लिए नहीं बेच पाएंगी।

उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, "विधेयक का मकसद उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार व्यवहार से होने वाले नुकसान से बचाना और व्यवस्था को सरल बनाना है। इसमें उपभोक्ता से जुड़े विवाद पर निर्णय प्रक्रिया को और सरल बनाने पर जोर है। विधेयक में कोई भी व्यक्ति कहीं से भी शिकायत दर्ज करा सकेगा।"

-50 करोड़ रुपये तक का जुर्माना खराब उपकरण वाले उत्पाद बेचने पर लगेगा।

-02 साल की जेल भ्रामक विज्ञापन के जरिये उत्पाद बेचा गया तो।-

21 दिनों के भीतर कोई भी शिकायत स्वत: दर्ज मानी जाएगी।

-20 लाख की जगह एक करोड़ तक के मामले सुने जाएंगे जिला फोरम में।

-10 करोड़ तक के मामलों की सुनवाई हो सकेगी राज्य आयोग में।

-01 करोड़ रुपये से ऊपर के मामलों में अपील केंद्रीय प्राधिकरण में संभव।

-प्राधिकरण को तलाशी और जब्ती का अधिकार होगा। इसके तहत उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना होगी, जिसका मुख्यालय दिल्ली में होगा। जिला, राज्य स्तर फोरम गठित होंगे। प्राधिकरण में एक जांच शाखा भी होगी, जिसका प्रमुख एक महानिदेशक होगा। जांच शाखा को तलाशी और जब्ती करने का अधिकार भी होगा।

-खराब सामान पर विक्रेता और निर्माता दोनों नपेंगे। किसी उपकरण या सामान की खराबी पर विक्रेता, निर्माता दोनों पर शिकंजा कसेगा। किसी उत्पाद से काफी संख्या में ग्राहकों को नुकसान पहुंचा है तो क्लॉस सूट एक्शन शुरू किया जाएगा। यानी सभी ग्राहकों की ओर से कंपनी पर मामला चलेगा। जुर्माने के साथ सारे खराब उत्पाद वापस लेने होंगे।

-खराब उत्पाद बेचने पर पांच साल तक की सजा होगी। अगर घटिया या डिफेक्टिव उत्पाद से किसी को शारीरिक हानि या मौत होती है तो इसमें विनिर्माता, सेवाप्रदाता और विक्रेता तीनों की जवाबदेही तय की जाएगी। इसमें घटिया उपकरणों के उत्पादन, आपूर्ति और गलत ढंग से इसकी बिक्री को लेकर कंपनी पर शिकंजा कसा जाएगा।

-ग्राहकों की शिकायत की सुनवाई लंबी नहीं चलेगी। ग्राहकों की शिकायत की सुनवाई लंबी नहीं चलेगी, जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर में एक ही जगह सुनवाई होगी। ऊपरी स्तर पर सिर्फ फैसले पर पुनर्विचार हो सकेगा। ग्राहक और आरोपी कंपनी के बीच निपटारे के लिए भी तंत्र होगा, जिससे विवादों का तेजी से निपटारा हो सके।

-विज्ञापन में किसी उत्पाद की गलत गारंटी देना या दावा करना महंगा पड़ेगा। भ्रामक विज्ञापन पर दो साल जेल या दस लाख के जुर्माने का प्रावधान है। विज्ञापन करने वाले सेलेब्रिटी पर भी जुर्माना होगा। कंपनी या विक्रेता की गलत शिकायत पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना होगा।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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