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बीएचयू के 500 करोड़ रुपये सालाना निवेश पर म्यूचुअल फंड कम्पनियों की निगाह

बीएचयू के 500 करोड़ रुपये सालाना निवेश पर म्यूचुअल फंड कम्पनियों की निगाह

काशी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी प्रतिवर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में निवेश करता है। इस पर देश की बड़ी – बड़ी म्यूचुअल फंड कम्पनियों की निगाह लगी रहती है। इसके लिए विश्वविद्यालय के ऊपर से लेकर नीचे तक के वित्त साहबों व उनके आकाओं को पटाने का उपक्रम होता है।

हाल ही में देश के एक बड़े उद्योगपति की इससे संबंधित कम्पनी के सीईओ इस विश्वविद्यालय के एक संकाय में वित्त साक्षरता हब बनाने के लिए 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। उस वित्त साक्षरता हब में छात्रों और बाहर के लोगों को शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश के बारे में सिखाया, बताया जायेगा। समझाया जायेगा कि कहां पैसा निवेश करना ठीक रहेगा, कहां नहीं। इस बारे में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि बीएचयू में कर्मचारियों से पेंशन फंड में जो रकम ली जा रही है, वह नेशनल पेंशन योजना के तहत अब म्यूचुअल फंड आदि में निवेश की जा रही है। जब यह योजना नहीं थी तो कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद ब्याज सहित निश्चित रकम दी जाती थी। अब म्यूचुअल फंड से जितना रिटर्न मिलेगा, बस वही पैसा मिलेगा। यदि जिस फंड में रकम लगाई गई है उसमें रिटर्न अधिक नहीं मिला, शेयर मार्केट में वह नीचे चला गया तो पेंशन फंड में कर्मचारी द्वारा दिया गया पैसा आधा हो सकता है।

फिलहाल बीएचयू में हालत यह है कि इस फंड में कर्मचारियों की जो रकम कटती है और अन्य मद में विश्वविद्यालय के पास जो रकम रहती है, वह बेहतर रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड व अन्य कई जगह निवेश किया जाता है। बीएचयू इस तरह सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये निवेश कर रहा है। ये रकम कहां, किस म्यूचुअल फंड में निवेश करना है, इसका निर्णय बीएचयू के वित्त अधिकारी और निवेश समिति के कुछ लोग तय करते हैं। इसमें अब कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे हैं। विश्वविद्यालय के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि जो कम्पनियां इन अफसरों को खुश कर रही हैं, उनके यहां निवेश किया जा रहा है, चाहे उनमें भले ही घाटा हो। इसलिए इसे पारदर्शी बनाने और अफसरों की जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठने लगी है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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