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महिला उत्थान में ''दिशा'' का समेकित प्रयास

सरसंघचालक जी का आह्वान - मातृशक्ति का प्रबोधन करने में पुरूष आगे आएं

महिला उत्थान में

समाज निर्माण में महिलाओं की हो भागीदारी: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। राष्टीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन जी भागवत ने पुरूषों का आह्वान किया है कि वे मातृशक्ति का प्रबोधन करें और तब तक करें जब तक कि वे आगे नहीं बढ़ जातीं। इसके लिए उन्हें भरपूर संरक्षण, अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करें। श्री भागवत मंगलवार को स्त्री अध्ययन प्रबोधन केंद्र, ''दृष्टि'' द्वारा आयोजित 'स्टेटस आफ वूमन इन इंडिया रिपोर्ट पब्लिकेशन' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को प्रबोधन देने की शुरूआत अपने ही घर से करें। शुरूआत खुद से हो जाती है तो समाज में तेजी से बढ़ेगा। श्री भागवत ने कहा कि महिला का उत्थान महिलाओं के द्वारा ही होना चाहिए। पुरूषों को यह अहम् नहीं पालना चाहिए कि वे महिलाओं का उत्थान कर सकते हैं। महिला के विकास के उत्थान का पथ निश्चित करने वाले पुरूष कदापि नहीं हो सकते बल्कि महिला पुरूष के विकास के उत्थान का पथ निश्चित कर सकती है। वह इसलिए कि वह शक्तिस्वरूपा है। शक्ति का प्रमुख कारण वात्सल्य का होना है।

उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने का काम ग्रहस्थ करते हैं। और ग्रहस्थी चलाने में स्त्री और पुरूष का होना अनिवार्य है। प्रकृति ने पुरूष को शिकार और परिश्रम करने का गुण दिया है लेकिन स्त्री की संवेदनशीलता और वात्सल्य पुरूष के गुणों पर भारी है। स्त्रियों के उत्थान के कार्य में ''दृष्टि'' के प्रयासों को बेजोड़ बताते हुए श्री भागवत ने कहा कि महिलाओं ने घर-घर जाकर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो या जंगल सब जगह मेहनत और साहस से वह कार्य कर दिखाया जो पुरूषों के लिए चनौती हो सकता है। क्यांेकि स्त्रियों के मन की बात एक स्त्री ही ठीक से समझ सकती है। स्त्रियों से क्या पूछना है? क्या पता करना है? इन्हें ही मालूम है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को बारीकी से पढ़ना चाहिए और एक सशक्त समाज बनाने की दिशा में अपना योगदान देना चाहिए। क्योंकि आज के प्रसंग को कल इतिहास का इतिहास लिखेगा।

इस अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ''दिशा'' के प्रयासों को अभूतपूर्व और साहसिक बताते हुए कहा कि महिलाओ ंने इस चुनौती भरे कार्य को भी कर दिखाया। संपूर्ण भारत में सर्वे करके सरकार को उनके विकास और उत्थान के लिए एक दिशा दे दी है। सीतारमण ने कहा कि हमारे कानूनों में महिलाओं को अधिकार देने की बात तो की जाती है लेकिन, सही मायने में मिलते नहीं। अब समय आ गया है कि उन्हें सही मायने में भागीदारी मिले। वे शिक्षा, स्वास्थ्य और अभिगम ;एक्सेसद्ध के क्षेत्र में बेहतर काम कर सकती हैं। महिलाओं ने समाज में अपनी उपयोगिता प्रमाणित की और वैश्विक स्तर पर अपने शौर्य और पराक्रम का लोहा मनवाया। सर्वे में जो आंकड़े आए हैं, उन्हें घर-घर ले जाकर बहनों को बताएं और उन्हें जागरूक करें।

इससे पहले ''दृष्टि'' संस्था की सचिव डा. अंजलि देशपांडे ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। संस्था के प्रयासें के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि स्त्रियों की दशा और समाज में उनकी सहभागिता को लेकर देशभर से उनके बारे में सर्वे करवाने का कार्य किया। ताकि पता चले कि महिलाओं की स्थिति किस प्रकार है? उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने इस रिपोर्ट को देखकर खामियों को दूर करने का प्रयास किया है। इस रिपोर्ट को असम, मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश की सरकारें को भी सौंपा गया है, वहां उपाय सोचे जा रहे हैं। योजनाएं दी जा रहीं हैं।

प्रोजेक्ट निदेशक डा. मनीषा कोठेकर ने विस्तारपूर्वक अपने अध्ययन व कार्यानुभवों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सात हजार से अधिक महिलाएं इस प्रोजेक्ट मे ंलगीं थीं। 7495 महिलाओं का साक्षत्कार लिया गया है, जो बेहद चुनौतीपूर्ण था। दो केंद्रीय शासित प्रदेशों को छोड़कर बाकी सभी जगह 465 जिलों में महिलाओं ने घर-घर जाकर सर्वे पूर्ण किया। अंत में राष्ट सेवा समिति की संचालिका शांताक्का ने सर्वे के कार्य में असाधारण योगदान के लिए डा. मनीषा कोठेकर, डा. शिल्पा पुराणिक, डा. लीना गहाड़े, प्रो. सरोज कोल्हे, श्रीमती हर्षदा पुरेकर और श्रीमती अर्चना सोवनी को सम्मानित किया।

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