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पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 103वीं जयंती पर उपराष्ट्रपति - पीएम मोदी ने किया याद

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 103वीं जयंती पर उपराष्ट्रपति - पीएम मोदी ने किया याद

नई दिल्ली। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 103वीं जंयती पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अवाला कई केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने बुधवार को ट्वीट कर लिखा कि आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती है। इस अवसर पर मैं आधुनिक भारत के मूर्धन्य विचारक की पावन स्मृति को प्रणाम करता हूं। उन्होंने लिखा कि उपाध्याय जी भारत की सामाजिक सच्चाइयों को भलीभांति परिचित थे। उन्होंने एकात्म मानवतावाद के जरिए सदियों से समाज के हाशिए पर खड़े दुर्बल वर्गों को सामाजिक आर्थिक विकास की मूलधारा में सम्मिलित करने के लिए अंत्योदय जैसे विशेष प्रयास करने का आग्रह था।

अन्य ट्वीट में उपराष्ट्रपति ने लिखा कि उपाध्याय जी का मानना था कि प्रकृति सम्मत विकास ही संस्कृति है, प्रकृति विरुद्ध विकास समाज में विकृति पैदा करता है। समावेशी विकास ही स्थाई विकास है।

पं दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर 1.46 मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें प्रधानमंत्री उनके जयंती पर हुए देश में हुए कार्यक्रमों का उल्लेख कर रहे हैं और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्यपणा करते हुए नजर आ रहै हैं। वीडियो के माध्यम से मोदी प्रधानमंत्री पंडिय उपाध्याय के द्वारा देश व समाज के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वे बता रहे है कि पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने कैसे भारत की राजनीति, अर्थनीति और समाजनीति के लिए काम करते थे। उपाध्याय जी भारत के वैभव के लिए सात आदर्शों की वकालत करते थे। वे कहते थे कि कर्मठता, समानता, सम्पन्नता, ज्ञान, सुख, शान्ति और एकरस समाज ही मानवता का मूल है।

मोदी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि एकात्म मानववाद के प्रणेता एवं अंत्योदय के विचार को अपने जीवन में जीने वाले महामानव, चिंतक, विचारक एवं प्रचारक, पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती के दिन नमन एवं स्मरण करता हूं। लोक कल्याण एवं ग़रीब कल्याण का जो मार्ग उन्होंने प्रशस्त किया था उस पर हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर गृहमंत्री अमित शाह ने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। उन्होंने लिखा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय एक ऐसे युगद्रष्टा थे। जिनके द्वारा बोये गए विचारों व सिद्धांतों के बीज ने देश को एक वैकल्पिक विचारधारा देने का काम किया। उनकी विचारधारा सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए थी और भारत को उसके गौरव पर पुनर्स्थापित करने के लिए थी।

शाह ने पंडिय दीनदयाल ने समाज के लिए किए गए कार्यों को उल्लेख करते हुए लिखा कि दीनदयाल जी कहते थे कि जब तक हम समाज के गरीब-से-गरीब व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचाते, तब तक देश की स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं। यह उनके तपस्यापूर्ण जीवन और विचार-शक्ति का ही असर था कि न जाने कितने राष्ट्रभक्तों ने जीवन के सभी सुखों को त्याग देश सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

वहीं आखिरी ट्वीट में शाह ने लिखा कि आज एक भाजपा कार्यकर्ता के नाते हमको गर्व है कि गत पांच वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रही सरकार ने गरीब-कल्याण के अपने अडिग लक्ष्य से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद के दर्शन और अंत्योदय की विचारधारा को साकार कर के दिखाया है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी पं. उपाध्याय की जयंती पर उन्हें नमन किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि लोक कल्याण एवं ग़रीब कल्याण का जो मार्ग पंडित जी ने प्रशस्त किया था उस पर हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जय प्रकाश नड्डा ने ट्वीट किया कि देश को अंत्योदय व एकात्म मानववाद की दृष्टि देने वाले, प्रखर राष्ट्रवादी, अद्वितीय संगठनकर्ता आदरणीय पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। हम सब को अंत्योदय की भावना से प्रेरित 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को आत्मसात कर जनता की सेवा एवं संगठन कार्य करना है।

इसके अलावा तमामा केंद्रीय मंत्रियों ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 103वीं जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय था जो जलेसर रोड स्टेशन में सहायक स्टेशन मास्टर थे। 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता में 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना हुई एवं दीनदयाल उपाध्याय को प्रथम महासचिव नियुक्त किया गया। 11 फरवरी, 1968 को पं. दीनदयाल उपाध्याय की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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