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तृणमूल कांग्रेस ने जारी की पहली सूची, 40% सीटों पर महिलाओं को उतारा

तृणमूल कांग्रेस ने जारी की पहली सूची, 40% सीटों पर महिलाओं को उतारा

लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। इस क्रम में मंगलवार को राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य के सभी 42 लोकसभा सीट पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। तृणमूल के लोकसभा उम्मीदवारों की सूची में आठ सांसदों का टिकट काटते हुए आठ विधायकों को उनकी जगह उम्मीदवार बनाया गया है।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से जिन विधायकों को लोकसभा का टिकट दिया गया है वे ममता बनर्जी के विश्वसनीय हैं और विधायक होने के बावजूद उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में एक सांसद से ज्यादा कार्य किया था। उनकी प्रसिद्धी मौजूदा सांसदों से आगे निकल चुकी थी, इसीलिए मुख्यमंत्री ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

बताया गया है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही आठ विधायकों को सांसद का चुनाव लड़ाने का निर्णय लिया गया था। इनमें से सबसे चर्चित विधायक अमर सिंह रॉय हैं क्योंकि वे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के विधायक हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा भाजपा के साथ थी। 2017 के जून महीने से लेकर लगातार 104 दिनों तक दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी के पहाड़ी क्षेत्रों में पृथक गोरखालैंड के नाम पर एक आंदोलन हुआ था और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष विमल गुरुंग को राज्य सरकार ने देशद्रोह की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर भागने के लिए मजबूर कर दिया। उसके बाद पार्टी के दूसरे शीर्ष नेता विनय तमांग को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का कमान दिया गया था। इसके पीछे ममता बनर्जी के राजनीतिक चाणक्यों ने दिमाग लगाया था और तय हो गया था कि लोकसभा चुनाव में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की अहमियत बढ़ेगी। दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के मौजूदा सांसद एसएस आहलूवालिया के खिलाफ अमर सिंह रॉय को उम्मीदवार बनाया गया है।

दूसरे जो सबसे चर्चित विधायक हैं उनका नाम है कन्हैया लाल अग्रवाल्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर से विधायक हैं और उन्हें इस बार इस जिले की रॉयगंज सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। यहां से माकपा के मोहम्मद सलीम सीटिंग सांसद हैं। विधायक रहते हुए उन्होंने पूरे क्षेत्र में तृणमूल के लिए जमकर काम किया था जिसकी वजह से उन्हें वहां से टिकट दिया गया है।

तीसरे विधायक है अबू ताहिर खान। मुर्शिदाबाद के नवादा से विधायक अबू ताहिर खान कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में आए थे। इसके बाद से ही उन्हें लोकसभा का टिकट देने की बात चल रही थी। मुर्शिदाबाद से माकपा के बदरुद्दूजा खान सांसद हैं और उन्हीं के खिलाफ तृणमूल ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह ऐसा लोकसभा क्षेत्र है जहां अल्पसंख्यक निर्णायक भूमिका में हैं और अबू ताहिर खान का अल्पसंख्यक समुदाय में काफी अच्छी पकड़ मानी जाती है।

चौथे विधायक जिन्हें लोकसभा का टिकट दिया गया है उनका नाम है अपूर्व सरकार। मुर्शिदाबाद के कांथी से विधायक हैं। वह भी कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में आए थे और उन्हें बरहमपुर से पार्टी ने लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है। यहां से वो मौजूदा सांसद अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। उनके तृणमूल में आने के बाद से ही आश्वस्त किया गया था कि उन्हें मुर्शिदाबाद से चुनाव लड़ाया जाएगा।

पांचवी विधायक हैं महुआ मोइत्रा। महुआ काफी चर्चित चेहरा रही हैं। एनआरसी के मुद्दे पर असम पहुंचे तृणमूल के छह सदस्य प्रतिनिधिमंडल में महुआ भी शामिल थीं। उन्होंने गुवाहाटी हवाई अड्डे पर महिला पुलिसकर्मियों से हाथापाई की थी, जिसके बाद वह काफी चर्चा में थीं। इसके अलावा विधानसभा के पटल पर किसी भी मुद्दे को मुखर तरीके से रखने के लिए भी वह जानी जाती हैं। महिला होने के बावजूद कई मुद्दों पर अडिग होकर लड़ चुकी हैं इसलिए पार्टी ने उन्हें सांसद का टिकट दिया है। वह नदिया की करीमपुर से विधायक हैं और नदिया जिले के कृष्णानगर से उम्मीदवार बनाया गया है।

छठे विधायक हैं असित माल। बीरभूम के हासन से विधायक असित माल इस बार बोलपुर से लोकसभा के उम्मीदवार बने हैं। यहां से मौजूदा सांसद अनुपम हाजरा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था और मंगलवार की शाम उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें टिकट देगी इसीलिए अनुपम हाजरा के खिलाफ असित माल चुनाव लड़ेंगे। इलाके में उनकी अच्छी पकड़ है और अनुपम हाजरा के जाने के बाद वह एक बड़ा नाम हैं जिस पर टीएमसी दाव लगा सकती है।

सातवें विधायक हैं सुब्रत मुखर्जी। बालीगंज से विधायक सुब्रत मुखर्जी राज्य के पंचायत मंत्री भी हैं। उन्हें बांकुड़ा से उम्मीदवार बनाया गया है। यहां से तृणमूल के सांसद थीं मुनमुन सेन। उन्हें आसनसोल में उम्मीदवार बना दिया गया है। मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने काफी काम किया है और क्षेत्र के लोगों में उनकी गहरी पैठ है। इसलिए उन्हें टिकट दिया गया है।

आठवां सबसे चर्चित चेहरा है श्यामल सांतरा। बांकुड़ा के कौतुलपुर से विधायक श्यामल बांकुड़ा के ही विष्णुपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए गए हैं। यहां से मौजूदा सांसद सौमित्र खां ने भाजपा का दामन थाम लिया है और श्यामल की पूरे इलाके में अच्छी पकड़ थी इसलिए पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

आठ सांसदों के टिकट कटे

पार्टी ने जिन आठ सांसदों का टिकट काटा है, उनमें पहला नाम डॉ सुगत का है। उन्होंने साल 2014 में जादवपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। उसके बाद साल 2017 में चर्चा में आए थे। दूसरे सबसे चर्चित सांसद है सुब्रत बक्शी। वैसे तो इन्हें ममता बनर्जी का नजदीकी बताया जाता है और वो पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं लेकिन संगठन की जिम्मेदारियां बड़े पैमाने पर संभालने की वजह से उन्हें लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ाया गया। इसको लेकर उन्होंने स्वयं अपील भी की थी। तीसरा सबसे चर्चित नाम इदरीश अली का है। साल 2014 में तृणमूल के टिकट पर सासंद बनने के बाद से ही वो लगातार विवादों में रहे हैं। अमूमन सांप्रदायिक बयानबाजी के लिए वह सुर्खियों में छाए रहते थे। चौथा चर्चित नाम संध्या रॉय का है। फिल्म जगत से जुड़ी होने की वजह से संध्या रॉय सांसद बनने के बाद संसद से लेकर जमीनी स्तर तक काफी कम सक्रिय थीं। इलाके के लोग उनसे बेहद नाराज रहते थे, जिसके बाद उनका टिकट कटना तय था और कट गया।

टिकट कटने वाले नेताओं में पांचवां बड़ा नाम डॉक्टर उमा सोरेन का है। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से उन्होंने खुद ही टिकट नहीं लेने की अपील की थी और पार्टी ने भी उनके स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें लोकसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया। छठा चर्चित चेहरा तापस पाल का है। अभिनेता तापस पाल अपने पूरे कार्यकाल में सबसे विवादित सांसद रहे हैं। रोज वैली चिटफंड मामले में वह 16 महीने तक जेल में भी रहे। सातवां चेहरा पार्थ प्रतिम रॉय का है। पार्थ प्रतिम भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। दगाबाजी की आशंका के मद्देनजर यह तय था कि उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिलेगा। आठवां चेहरा तापस मंडल का है। मुकुल रॉय के भाजपा में चले जाने के बाद तापस मंडल की ममता बनर्जी के साथ अनबन रहती थी, जिससे उनका भी टिकट कटना पहले से ही निश्चित लग रहा था। इसके पहले तृणमूल के दो सांसदों सौमित्र खान एवं अनुपम हाजरा को पार्टी से निलम्बित किया जा चुका है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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