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सारदा चिटफंड : एसआईटी के चार पुलिस अधिकारियों को सीबीआई ने भेजा नोटिस

सारदा चिटफंड : एसआईटी के चार पुलिस अधिकारियों को सीबीआई ने भेजा नोटिस

कोलकाता। सारदा चिटफंड मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले की प्राथमिक तौर पर जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) में शामिल चार पुलिस अधिकारियों को फिर से नोटिस भेजा है। यह जानकारी सीबीआई सूत्रों ने दी है।

एसआईटी के जिन पुलिस अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है उनमें अर्नव घोष, दिलीप हाजरा, शंकर भट्टाचार्य और प्रभाकर नाग शामिल हैं। सीबीआई के एक अधिकारी ने शुक्रवार को नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि 30 नवम्बर को इन लोगों को नोटिस भेजकर दिसम्बर के पहले सप्ताह में हाजिर होने को कहा गया था, लेकिन इनमें से कोई भी हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद दोबारा नोटिस भेजा गया है। अगर इस बार भी ये लोग हाजिर नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इन अधिकारियों में से अर्नव घोष साल 2013 में विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के आयुक्त थे और सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन एवं उनकी सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार करने के लिए बनाई गई एसआईटी में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। बाकी के तीन उनके सहयोगी थे। इन लोगों ने सारदा प्रमुख को जम्मू-कश्मीर पुलिस से अपने सुरक्षा घेरे में लिया था। इसके बाद उनके पास से कई सारे दस्तावेज बरामद हुए थे। इसमें एक लाल डायरी थी।‌ उसमें इस बात का उल्लेख किया गया था कि शारदा प्रमुख ने किसे कब कितने रुपये दिए, लेकिन जब कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने मामले की जांच संभाली तब एसआईटी ने वह डायरी नहीं दी। डायरी में दावा किया गया है कि उसमें कई तृणमूल नेताओं और मंत्रियों का नाम था जिन्होंने सारदा समूह से पैसे लिए थे और उन्हीं को बचाने के लिए ऐसा किया गया। डायरी के बारे में जानकारी के लिए सीबीआई अधिकारी इन अधिकारियों से पूछताछ करना चाहते हैं, लेकिन बार-बार नोटिस के बावजूद राज्य पुलिस के अधिकारी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि गत तीन अक्टूबर को अरबों रुपये के सारदा चिटफंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पल्लव कांति घोष से घंटों पूछताछ की थी। घोष कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग के चीफ रह चुके हैं। सेवानिवृत्त होने से पहले राज्य सीआईडी में भी उनकी तैनाती रही है। साल 2013 में सारदा मामले का खुलासा होने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और उसकी सहयोगी देवयानी मुखर्जी को गिरफ्तार करने के लिए सआईटी का गठन किया था। राज्य के गृह सचिव की देखरेख में गठित की गई इस एसआईटी के प्रमुख वर्तमान कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार थे एवं पल्लव कांति घोष इस टीम के शामिल थे। इन दोनों के अलावा इसमें आईपीएस विनीत गोयल वर्तमान में मालदा के एसपी अर्णव घोष समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।

उधर, कोलकाता छोड़कर जम्मू-कश्मीर के गुप्त ठिकाने पर छुपे बैठे सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और देवयानी को वहां की स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उनके पास से एक लाल डायरी और सारदा प्रमुख के फोन पर आने वाले लोगों के फोन का रिकॉर्ड भी पुलिस ने जब्त किया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस से सूचना मिलने के बाद एसआईटी की टीम वहां गई थी और उन दोनों को अपनी हिरासत में लेने के साथ साथ उनके पास से बरामद की गई डायरी और फोन का रिकॉर्ड भी ले आई थी।

साल 2014 में कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने सारदा घोटालाे की जांच शुरू की थी। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि वे जांच में सामने आए सभी तथ्यों व दस्तावेजों को सीबीआई के हवाले करें लेकिन आरोप है कि पुलिस की एसआईटी ने ना तो लाल डायरी दी थी और ना ही सुदीप्त सेन के फोन का रिकॉर्ड। यहां तक कि मिडलैंड पार्क स्थित सारदा समूह के कार्यालय से बरामद किए गए सैकड़ों दस्तावेजों में से एक कागज का टुकड़ा भी एसआईटी की टीम ने सीबीआई के हवाले नहीं किया।

दो महीने पहले ही सीबीआई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मामले की प्राथमिक जांच करने वाली एसआईटी के सदस्यों ने सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं को बचाने के लिए लाल डायरी समेत वे सारे साक्ष्य मिटा दिए जिससे सारदा प्रमुख के साथ उनके संबंधों का खुलासा हो सके। इधर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है जिसके बाद सीबीआई की टीम नई ऊर्जा के साथ मामले की जांच में जुटी है। इसी कड़ी में कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार समेत अन्य आईपीएस अधिकारियों को समन भेजा जा रहा है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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