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समझौता ब्लास्ट : एनआईए कोर्ट ने 14 तक फैसला रखा सुरक्षित

समझौता ब्लास्ट : एनआईए कोर्ट ने 14 तक फैसला रखा सुरक्षित

पंचकूला। पानीपत के बहुचर्चित समझौता ब्लास्ट मामले में सोमवार को पंचकूला की विशेष एनआइए कोर्ट में सुनवाई हुई। समझौता ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपित स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, कमल चौहान और राजिंदर चौधरी विशेष एनआईए कोर्ट में पेश हुए। मामले में कोर्ट से आज फैसला नहीं आया। कोर्ट में अधिवक्ता मोमीन मलिक के जरिए सेक्शन 311 के तहत पाकिस्तान की महिला अधिवक्ता रहिला ने अर्जी दायर की है। अर्जी में समझौता ब्लास्ट के पीड़ितों को समन नहीं मिला और उनकी गवाही नहीं हुई। कोर्ट ने इसी के चलते मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च तय की है। अगली सुनवाई में कोर्ट इस अर्जी पर फैसला करेगी। भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली बहुचर्चित समझौता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट मामले में अंतिम बहस पूरी हो चुकी है।

क्या था मामला

भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिनों चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 में बम धमाका हुआ जिसमें 68 लोगों की मौत हो गई। 12 लोग घायल हुए। ट्रेन उस रविवार दिल्ली से लाहौर जा रही थी। मारे जाने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे। इस मामले की जांच पहले हरियाणा पुलिस ने की, लेकिन बाद में कई दूसरे भारतीय शहरों में इसी तर्ज के धमाकों के बाद केस की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दी गई। 2001 के संसद हमले के बाद से बंद की गई ट्रेन सेवा को जनवरी 2004 में फिर से बहाल किया गया था।

15 मार्च 2007 को हरियाणा पुलिस ने इंदौर से दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। ये इन धमाकों के सिलसिले में की गई पहली गिरफ्तारी थी। पुलिस इन तक सूटकेस के कवर के सहारे पहुंच पाई थी। ये कवर इंदौर के एक बाजार से घटना के चंद दिनों पहले ही खरीदी गई थी। इसी तर्ज पर हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर दरगाह और मालेगांव में भी धमाके हुए और इन सभी मामलों के तार आपस में जुड़े हुए बताए गए। समझौता ब्लास्ट मामले की जांच में हरियाणा पुलिस और महाराष्ट्र के एटीएस को एक हिंदू कट्टरपंथी संगठन अभिनव भारत के शामिल होने के संकेत मिले थे। इन धमाकों के सिलसिले में आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ की गई थी।

26 जुलाई 2010 को मामला एनआईए को सौंपा

एनआईए ने 26 जून 2011 को पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। पहली चार्जशीट में नाबा कुमार उर्फ स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामचंद्र, संदीप डांगे और लोकेश शर्मा का नाम था। जांच एजेंसी का कहना था कि ये सभी अक्षरधाम (गुजरात), रघुनाथ मंदिर (जम्मू) संकट मोचन (वाराणसी) मंदिरों में हुए इस्लामी आतंकवादी हमलों से दुखी थे और बम का बदला बम से लेना चाहते थे। बाद में एनआईए ने पंचकूला विशेष अदालत के सामने एक अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 24 फरवरी 2014 से इस मामले में सुनवाई जारी है।

अगस्त 2014 को समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में अभियुक्त स्वामी असीमानंद को जमानत मिल गई। कोर्ट में जांच एजेंसी एनआईए असीमानंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं दे पाई। उन्हें सीबीआई ने 2010 में उत्तराखंड के हरिद्वार से गिरफ्तार किया गया था। साल 2006 से 2008 के बीच भारत में कई जगहों पर हुए बम धमाकों को अंजाम देने से संबंधित होने का आरोप था।

गौरतलब है कि 18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत में दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस में धमाका हुआ था। चांदनी बाग थाने के अंतर्गत सिवाह गांव के दीवाना स्टेशन के नजदीक यह ब्लास्ट हुआ। इस विस्फोट में 67 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक घायल की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हुई। सभी शवों को पानीपत के गांव महराना के कब्रिस्तान में दफना दिया गया था।

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Swadesh Digital ( 10170 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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