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पी चिदंबरम को बड़ी राहत, ईडी केस में 5 सितंबर तक होगी गिरफ्तारी

-सीबीआई रिमांड के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर 2 सितंबर को सुनवाई

पी चिदंबरम को बड़ी राहत, ईडी केस में 5 सितंबर तक होगी गिरफ्तारी

नई दिल्ली। ईडी वाले केस में सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम की अग्रिम ज़मानत अर्जी पर सुनवाई पूरी कर ली है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट 5 सितंबर को अपना फैसला सुनायेगा। तब तक गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी। कोर्ट सीबीआई रिमांड के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर दो सितंबर को सुनवाई करेगा।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच को कैसे बढ़ाया जाए, ये पूरी तरह से जांच एजेंसी का अधिकार है। केस के लिहाज से एजेंसी तय करती है कि किस स्टेज पर किन सबूतों को जाहिर किया जाए, किन को नहीं। मेहता ने कहा कि अगर गिरफ्तार करने से पहले (अग्रिम ज़मानत की स्टेज पर) ही सारे सबूतों, गवाहों को आरोपित के सामने रख दिया जाएगा तो ये तो आरोपित को सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और मनी ट्रेल को ख़त्म करने का मौक़ा देगा। तुषार मेहता ने कहा कि इस केस में अपराध देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ है। ऐसे मामलों में सज़ा का प्रावधान चाहे कुछ भी हो, कोर्ट हमेशा आर्थिक अपराध को गम्भीर अपराध मानता रहा है।

दरअसल कपिल सिब्बल ने 28 अगस्त को अपनी दलील में कहा था कि सात साल से कम तक की सज़ा के प्रावधान वाले अपराध को सीआरपीसी के मुताबिक कम गम्भीर माना जाता है । तुषार मेहता ने कहा कि कोई अपराध कितना गम्भीर है, उसकी कसौटी केवल उस अपराध के लिए नियत सज़ा की अवधि नहीं हो सकती। मायने ये रखता है कि उस अपराध का समाज और देश पर क्या असर हुआ। इस केस में अपराध देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ है।

मेहता ने कहा कि कोर्ट किसी मामले कि जांच नहीं कर सकता है। यह जांच एजेंसी द्वारा किया जाता है, जो तमाम आधारों को खोजकर कोर्ट के सामने पेश करती है। यह किसी साक्षात्कार या बातचीत जितना साधारण नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस मामले में जारी किया गया आदेश अन्य आतंकी फंडिंग मामलों को भी प्रभावित करेगा। मेहता ने कहा कि अभियोजन पक्ष का यह सिर्फ अधिकार नहीं बल्कि कर्तव्य भी है कि वह सत्य को सामने लाए। मौजूदा स्थिति में चिदंबरम उसी स्थान पर है, जिसमें ईडी के लिए उन्हें पकड़ना नामुमकिन हो जाएगा, अगर उन्हें संरक्षण मिलता है।

तुषार मेहता ने कहा कि हमने आरोपित को विशेष अदालत के सामने पेश किया। अगर हमने आरोपित के साथ बुरा व्यवहार किया होता तो वो अदालत में अपनी बात रख सकता था। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में चिदंबरम के खिलाफ 'गंभीर' आरोप की बात कही गई है। मेहता ने कहा कि अग्रिम जमानत जांच की गति को कम कर सकती है।

मेहता के बाद कपिल सिब्बल ने कहा कि संविधान की धारा 21 मेरा संरक्षण करता है। अग्रिम जमानत मेरा अधिकार है। मेरा अधिकार मुझसे नहीं छीना जा सकता। ईडी ने एक भी फ़र्ज़ी सम्पत्ति, फ़र्ज़ी बैक अकाउंट के बारे में कोर्ट में नही बताया है। चिदंबरम एक सम्मानित टैक्स पेयर हैं और वे समय पर टैक्स देते हैं। सिब्बल ने कहा कि ईडी के हलफनामे में बैंक खाता, प्रॉपर्टी के बारे में है लेकिन अभी तक कोर्ट में एक भी दस्तावेज़ नहीं पेश किया गया।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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