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महबूबा का आतंकियों से प्रेम ले डूबा सरकार को

भाजपा और पीडीपी की जम्मू कश्मीर में लंबी दोस्ती टूट गई।

नई दिल्ली | भाजपा और पीडीपी की जम्मू कश्मीर में लंबी दोस्ती टूट गई। हालांकि हाल के दिनों में दोनों दलों के रिश्तों में कुछ ज्यादा ही कड़वाहट आ गई थी। संघर्ष विराम के दौरान आतंकी घटनाओं में तेजी और पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के बाद हालात ज्यादा बिगड़ गए । केंद्र के साथ शुरू से ही राज्य सरकार का तालमेल न बैठना दोनों के रिश्तों में लगातार कड़वाहट भर रहा था। इसके लिए बहुत हद तक महबूबा सरकार जिम्मेदार रही जिसने गठबंधन की शर्तों को पूरा नहीं किया । 2015 में भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में सरकार बनाई, तब मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने। उसके बाद घाटी में दंगा शुरू हुआ। कश्मीर में प्रधानमंत्री दौरे के दौरान दंगा भड़का।

अप्रैल 2016 में मुफ्ती मोहम्मद के निधन के बाद महबूबा मुफ्ती घाटी की पहली मुख्यमंत्री बनी। उसके बाद जुलाई में यहां लगातार कफ्र्यू लगा। यह वह समय था जब सेना ने आतंकी बुरहान वानी को मौत के घाट उतारा। करीब तीन महीने से अधिक समय तक कश्मीर बंद रहा। यही नहीं कश्मीर में इंटरनेट सेवा भी बंद रही। इस दौरान करीब 68 लोग मारे गए जबकि दो सुरक्षा बल शहीद हुए। इस दौरान भड़के 9000 लोगों के घायल होने की बात कही गई।

वहीं 2016 सितंबर में सर्जिकल स्ट्राइक हुई जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों के कैंप पर हमला बोला। पाकिस्तान इस हमले को लेकर हमेशा से इनकार करता आ रहा है। उरी की घटना के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच स्थिति आज तक सामान्य नहीं हुई है। वर्ष 2017 में भी कई बार आतंकी हमले हुए। 31 दिसंबर 2017 से जनवरी 2018 के दौरान दक्षिण कश्मीर के लेथापोरा में जैश-ए मोहम्मद के आतंकी हमले में पांच सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए जबकि तीन घायल हुए थे। 24 घंटे तक चले इस हमले में तीन आतंकियों की मौत हुई थी।

वहीं 19 जनवरी को दक्षिण कश्मीर के पुलवामा शहर में आतंकी द्वारा ग्रेनेड हमले में आठ पुलिस वाले घायल हुए। वहीं बारामुला पुलिस स्टेशन पर आतंकी हमला हुआ। 1 फरवरी को भी आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों पर हमला किया। वहीं महज दो दिनों के अंदर आतंकी हमला हुआ जिसमें दो आम लोगों के साथ तीन सीआरपीएफ के जवान घायल हुए।

रमजान में हुई घटनाएं :--

- महज एक महीने में घाटी में 65 आतंकी घटनाएं हुईं ।

- 22 ग्रेनेड हमले सुरक्षा बलों पर हुए ।

- 23 बार सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध फायरिंग हुई ।

- 07 बार नागरिकों पर हमले हुए ।

- 12 बार हथियार लूट की कोशिश ।

- 03 घुसपैठ की कोशिशें, 14 आतंकी ढेर ।

- 15 बार आईबी व एलओसी पर सीजफायर तोड़ा ।

अब सेना के निशाने पर होंगे मोस्ट वांटेड आतंकी

मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सेना को आतंकियों के खिलाफ फिर से ऑपरेशन शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। आपको बता दें कि रमजान के महीने में केंद्र सरकार ने एकतरफा सीजफायर की घोषणा की थी। जिसे ईद के अगले ही दिन खत्म कर दिया गया। सीजफायर खत्म करने के एक दिन बाद सुरक्षा बलों ने बांदीपोरा में दो आतंकियों को मार गिराया था। लेकिन सेना के सामने आतंकियों से निपटने की चुनौती अभी भी खत्म नहीं हुई है। लश्कर और हिजबुल जैसे आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में हिंसा फैला रहे हैं। पिछले साल कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा कमांडर बाशिर अहमद वानी, अबु दुजाना, अबु इस्माइल, हिजबुल कमांडर सबजर भट और जैश-ए-मोहम्मद के खालिद को सेना ने मार गिराया गया था। लेकिन अभी भी ऐसे कई आतंकी हैं, जो कश्मीर और देश के लिए खतरा बने हुए हैं। जानें कौन हैं वो लोग जो मौजूदा समय में कश्मीर में हैं मोस्ट वांटेड ।

अलकायदा का जाकिर मूसा : सूची में अलकायदा का आतंकी टॉप पर है। हिजबुल से अलग होने के बाद मूसा ने अलकायदा का कश्मीर चैप्टर (अलकायदा के अंसार गजवात-उल-हिन्द) शुरू किया था। मूसा कश्मीर में युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए कश्मीर और अन्य इलाकों में इस्लामिक खिलाफत का प्रोपैगैंडा फैला रहा है और इसी के चलते सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड सूची में टॉप पर है।

हिजबुल मुजाहिदीन का रियाज नाइकू : कश्मीर में हिजबुल का चीफ नाइकू टॉप कैटगरी का आतंकी है। 29 साल का नाइकू हिजबुल का सबसे अनुभवी कमांडर है। बताया जाता है कि ये तकनीकि रूप (टेक सेवी) से बेहद मजबूत है। इस पर पुलिसकर्मी समेत कई लोगों की हत्या करने के मामले दर्ज हैं।

जीनत-उल-इस्लाम : इन दोनों के बाद जीनत-उल-इस्लाम का नाम आता है जो बीते साल अबु इस्माइल के मारे जाने के बाद से लश्कर की कमान संभाल रहा है। जीनत उल इस्माल शोपियां के सुजान जानीपुरा का रहने वाला है। 28 साल के जीनत को फरवरी में शोपियां में हुए हमले में प्रमुख आरोपी माना जा रहा है। इस हमले में तीन 3 जवान मारे गए थे। आईईडी एक्सपर्ट माना जाने वाला जीनत-उल-इस्लाम पहले अल-बदर आतंकी संगठन में काम करता था। साल 2008 में वह एक बार गिरफ्तार हुआ था जिसमें उसने कबूल किया था कि वो ओवर ग्राउंड वर्कर रहा है। साल 2012 में उसे रिहा कर दिया गया।

नवीद जट्ट : मूसा, नाइकू और जीनत के बाद नंबर आता है नवीद जट्ट का। लश्कर-ए-तैयबा के इस आतंकी को अबु हंजला के नाम से भी जाना जाता है। इस साल की शुरूआत में वह श्रीनगर के एक सरकारी अस्पताल से भागने में कामयाब हो गया था। नवीद और अन्य पांच आतंकियों को चेकअप के लिए अस्पताल लाया गया था, जहां कुछ आतंकियों ने अचानक हमला किया और नवीद को लेकर भाग निकले थे। इस हमले में पुलिस के दो जवान शहीद हुए थे। हाल ही में मारे गए पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के मामले में भी नवीद का नाम सामने आ रहा है। माना जाता है कि नवीद पाकिस्तान के मुल्तान का रहने वाला है और साल 2014 में गिरफ्तार किया गया था।







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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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