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सदन में नए प्रयोगों से कई गुना कामकाज बढ़ा, पढ़े पूरी खबर

सदन में नए प्रयोगों से कई गुना कामकाज बढ़ा, पढ़े पूरी खबर

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का कामकाज को लेकर जुनून निचले सदन में परिणाम के लिहाज से बहुत प्रभावी साबित हो रहा है। हर दिन ओवरटाइम 17वीं लोकसभा की पहचान बन गया है। साथ ही नए प्रयोगों से लोकसभा में कामकाज कई गुना बढ़ा है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा के बजट सत्र में अब तक की प्रोडक्टिविटी 132 फीसदी तक पहुंच गई है। राज्यसभा में यह प्रतिशत 100 फीसदी है। सोलहवीं लोकसभा के बजट सत्र में प्रोडक्टिविटी 77 फीसदी के आसपास थी। सदन के कामकाज की उत्पादकता में सबसे ज्यादा 41 फीसदी हिस्सा विधायी कामकाज को लेकर है।

करीब 21 फीसदी कामकाज गैर विधायी, 22 फीसदी वित्तीय कामकाज और छह फीसदी अन्य कामकाज हुआ है। यानी विधेयक पारित कराने से जुड़ी चर्चाओं में सदन का सबसे ज्यादा समय बीता है। सदन में 103 घंटे से ज्यादा समय विधेयकों पर चर्चा में बीता है। कुल कामकाज 250 घंटों से ज्यादा हुआ है। रूटीन काम को भी महत्व देने की मंशा से देर रात तक सदन चलाया जा रहा है। शून्यकाल की समयसीमा समाप्त करने से लेकर लगातार नए प्रयोगों की वजह से सदन में कई रोचक चीजें सामने आ रही हैं। लोकसभा अध्यक्ष की कार्यशैली के चलते सदन में व्यवधान की गुंजाइश भी कम हो रही हे। वे हर बदलाव या महत्वपूर्ण कामकाज के पहले अपने चैंबर में प्रमुख दलों के नेताओं के साथ बैठकें करते हैं। प्रश्नकाल में पहले ही दिन रिकॉर्ड 10 पूरक प्रश्नों को लिया। इनकी कार्यशैली के चलते सदन में प्रत्येक दिन प्रश्नकाल में करीब 8 से 10 पूरक प्रश्न लिए जा रहे हैं। प्रश्न काल में सदस्यों से संक्षिप्त में प्रश्न पूछने और मंत्रियों को भी सारगर्भित जवाब देने को कहा है, ताकि सदन में ज्यादा कामकाज हो सके।

लोकसभा अध्यक्ष ने नए सांसदों को मौका जरूर देने का आग्रह राजनीतिक दलों से भी किया है। इस प्रयास में 19 जून से 2 अगस्त तक सदन में नव निर्वाचित 264 सांसदों में से अब तक 240 से अधिक नए सदस्यों को बोलने का अवसर मिला है। एक ही दिन में शून्यकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के 84 सांसदों को अपनी बात रखने का मौका मिला। जिनमें 49 सदस्य नए थे। सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों को बराबर मौका देने के साथ अध्यक्ष ने मौका पड़ने पर मंत्रियों की क्लास लेने से भी गुरेज नहीं किया। वहीं विपक्ष को भी अनावश्यक टोकाटाकी पर फटकार लगाई है। अध्यक्ष को करीब से जानने वालों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष अपने चैंबर में बहुत ही विनम्र होते हैं लेकिन आसन पर आते ही कामकाज को लेकर उनकी आक्रामकता साफ नजर आती है। उनका कहना है कि परंपरा और नियमों में तालमेल होना चाहिए।

शून्यकाल की समय सीमा समाप्त की

-नए सांसदों की भागीदारी के मद्देनजर जरूरत होने पर भोजनावकाश का समय आगे बढ़ाया।

- शून्यकाल की समय सीमा समाप्त की।

- सदन में आसन पर ज्यादा समय तक बैठते हैं।

- हिंदी के ज्यादा प्रयोग को लेकर प्रतिबद्ध। हिंदी के प्रयोग के लिए उन्होंने पुरानी आइस - नोस की परंपरा की जगह हां और ना का प्रयोग शुरू किया।

धन्यवाद बोलने की जरूरत नहीं

- अध्यक्ष का निर्देश, बोलने का मौका लॉटरी से मिला है इसलिए धन्यवाद का प्रयोग करने की जरूरत नहीं

- सांसदों के जन्मदिन पर सदन के भीतर स्वंय व लोकसभा टीवी के माध्यम से शुभकामना देने की परंपरा शुरू की।

- सांसदों को सीधे मार्शल से बात करने की परंपरा समाप्त की।

- सांसदों की जानकारी बढ़ाने के लिए ऑनलाइन रेफरेंस की सुविधा शुरू की।

- सांसदों द्वारा सदन में उठाए गए विषय की डिजिटल प्रति उन्हें तुरंत मुहैया कराने की सुविधा उपलब्ध कराई। जिससे वे अपने क्षेत्र के लोगों को इसे भेज सकें और सोशल मीडिया पर इसका प्रयोग कर सकें। सदन में सभी दलों के सांसदों ने इसे सराहा।

- लोकसभा को पेपरलेस बनाने की मुहिम शुरू की जा रही है।

- लोकसभा से आम लोगों को संदेश देने के लिए वृक्षारोपण व स्वच्छता अभियान संसद में शुरु किया। जल संरक्षण और कुपोषण को लेकर भी अभियान शुरु करने को कहा।

- सदन में कामकाज की उत्पादकता के लिहाज से पिछले 20 सालों का रिकार्ड टूटा।

- मौजूदा सत्र में भी उत्पादकता प्रतिशत सौ फीसदी से 128 और अब 132 तक पहुंच गया।

- सदन को आधुनिक रूप देने और डिजिटलीकरण के लिए पूरी टीम लगाई गई है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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