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दलाई लामा ने नहीं लांघी लक्ष्मण रेखा, स्तूप के नीचे ही की पूजा-अर्चना

दलाई लामा ने नहीं लांघी लक्ष्मण रेखा, स्तूप के नीचे ही की पूजा-अर्चना

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के संकिसा में तीन दिन के प्रवास पर आए बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने प्रवास के दूसरे दिन सोमवार को बौद्ध स्तूप की पूजा-अर्चना की। धर्मगुरु ने न्यायालय के आदेश पर वर्ष 1986 से खींची गई लक्ष्मण का उल्लंघन नहीं किया। दलाईलामा सैकड़ों विदेशी अनुयाइयों के साथ बौद्ध बिहार से बौद्ध स्तूप पहुंचे जहां उन्होंने प्रतिबंधित स्थान से पहले ही स्तूप को नमन किया।

विवाद के चलते न्यायालय ने स्तूप पर पूजा-अर्चना करने पर रोक लगा दी है। न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए शांति दूत दलाई लामा ने वहां की माटी को उठा कर माथे से लगाते हुए कहा कि इस धरती की माटी तथागत के चरण पड़ने से पवित्र हो गई है। बौद्ध धर्म गुरु ने कहा कि हमेशा तथागत ने अपने शिष्यों को मर्यादित रहने की शिक्षा दी। उन्होंने विश्व शांति का उपदेश दिया। इस वजह वह तथागत के संदेश को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधित स्थान पर न जाकर बेरीकेटिंग की सीमा में ही तथागत को नमन कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां के स्थानीय बौद्ध अनुयाई हर आयोजन के समय स्तूप के ऊपर जाकर पूजा अर्चना की जिद करते चले रहे हैं। उन्हें पूरा भरोसा था कि दलाई लामा यहां आकर स्तूप के ऊपर पहुंच कर पूजा अर्चना करेंगे लेकिन शांति दूत दलाई लामा ने प्रवास के दूसरे दिन दिन यहां ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिससे न्यायालय के आदेश की अवमानना होती। उन्होंने मर्यादा व न्यायालय को ध्यान में रखते हुए पूजा-अर्जना की।

संकिसा में तीन दिन के प्रवास पर आए बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा कि हर अनुयाई का मुख्य उद्देश्य तथागत की देशनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का होना चाहिए। दलाई लामा ने प्रवचन के बाद बताया कि आज वह पड़ोसी जिला मैनपुरी की तहसील भोगांव में पहुंच कर लोगों को बुद्ध धर्म का अनूठा सन्देश देंगे। इसके बाद वहां से आने के बाद वह बौद्ध बिहार संकिसा के थ्री स्टार होटल में रात विश्राम करेंगे। तथागत का अवतार कहे जाने वाले दलाई लामा के यहां आने से जहां संकिसा बुद्धमय हो गया है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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