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चांद की तीसरी कक्षा में 2 दिनों तक चक्कर लगाएगा चंद्रयान-2

चांद की चौथी कक्षा में 30 अगस्त को और 1 सितम्बर को पहुंचेगा पांचवीं कक्षा में

चांद की तीसरी कक्षा में 2 दिनों तक चक्कर लगाएगा चंद्रयान-2

दिल्ली। चंद्रयान-2 ने बुधवार को सुबह 9.04 बजे चांद की तीसरी कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है। इसी कक्षा में चंद्रयान-2 अगले 2 दिनों तक चांद का चक्कर लगाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 30 अगस्त को चंद्रयान-2 को चांद की चौथी में और 1 सितम्बर को पांचवीं कक्षा में डालेगा।

इसरो के मुताबिक अब चंद्रयान-2 चांद के चारों तरफ 179 किमी की एपोजी और 1412 किमी की पेरीजी में 2 दिनों तक चक्कर लगाएगा। इसके बाद 30 अगस्त को चांद की चौथी और 1 सितम्बर को पांचवीं कक्षा में डाला जाएगा।चंद्रयान-2 ने 22 अगस्त को सुबह 9:02 मिनट पर चन्द्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने चंद्रयान-2 के तरल रॉकेट इंजन को दाग कर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाने के अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इसरो वैज्ञानिकों ने इसी दिन चंद्रयान-2 की गति को 10.98 किमी प्रति सेकंड से घटाकर करीब 1.98 किमी प्रति सेकंड किया था, ताकि चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव में आकर चांद से न टकराने पाए।

इसरो के मुताबिक 30 अगस्त की शाम 6.00-7.00 बजे के बीच चंद्रयान-2 को 126x164 किमी की कक्षा में डाला जाएगा। इसके बाद 01 सितम्बर को शाम 6.00-7.00 बजे के बीच 114x128 किमी. की कक्षा में डाला जाएगा। चांद के चारों तरफ 4 बार कक्षाएं बदलने के बाद चंद्रयान-2 से विक्रम लैंडर बाहर निकल जाएगा और अपने अंदर मौजूद प्रज्ञान रोवर को लेकर चांद की तरफ बढ़ना शुरू करेगा। 3 सितम्बर को इसरो वैज्ञानिक 3 सेकंड के लिए विक्रम लैंडर का इंजन ऑन करके उसकी कक्षा में मामूली बदलाव करेंगे ताकि यह पता चल सके कि विक्रम लैंडर ठीक ढंग से कार्य कर रहा है या नहीं। इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर को 4 सितम्बर को चांद के सबसे नजदीकी कक्षा में पहुंचाएंगे। अगले तीन दिनों तक विक्रम लैंडर इसी कक्षा में चांद का चक्कर लगाता रहेगा। इस दौरान इसरो वैज्ञानिक विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के सेहत की जांच करते रहेंगे।

चंद्रयान-2 का अगला अहम कदम दो सितम्बर को होगा, जब लैंडर को ऑरबिटर से अलग किया जाएगा। तीन सितम्बर को लगभग तीन सेकंड की एक छोटी-सी प्रक्रिया होगी, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि लैंडर के सभी सिस्टम सही काम कर रहे हैं। उसके बाद सात सितम्बर को फाइनल लैंडिंग की जाएगी। सात सितम्बर को सुबह 1:55 बजे लैंडर चंद्रमा के साउथ पोल पर सतह पर लैंड करेगा। चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले लैंडर संबंधी दो कक्षीय प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 का सफर सोमवार को दिन के 2 बजकर 43 मिनट पर श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शुरू हुआ था। चंद्रयान-2 ने 22 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद पहली बार अपने एलआई4 कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें भेजीं थीं। इसके बाद चंद्रयान-2 ने पहली बार चांद की खूबसूरत तस्वीर भेजी। लैंडर विक्रम ने यह तस्वीर 2650 किलोमीटर की ऊंचाई से ली थी। इस चित्र में मरे ओरिएंटेल बेसिन और अपोलो क्रेटर्स की पहचान की गई। चंद्रयान-2 के कैमरे ने 26 अगस्त को चांद की कुछ और तस्वीरें भेजीं जो टेरेन मैपिंग कैमरा (टीएमसी -2) द्वारा चांद की सतह की लगभग 4375 किमी की ऊंचाई से ली गई थीं। इसरो के अनुसार इन तस्वीरों में जैक्सन, मच, कोरोलेव और मित्रा नामक स्थान दिखाई दिए हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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