Home > देश > असम के मुख्य सचिव को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

असम के मुख्य सचिव को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

-कोर्ट ने कहा, असम सरकार ने संविधान के उलट हलफनामा दाखिल किया -असम में रह रहे एक लाख से ज्यादा विदेशियों को पकड़ने में नाकाम रही सरकार

असम के मुख्य सचिव को पद पर बने रहने का कोई हक नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने असम में डिटेंशन सेंटर्स के मामले पर सुनवाई करते हुए असम सरकार की इस बात के लिए आलोचना की है कि उसने विदेशी करार दिए गए लोगों को डिटेंशन सेंटर्स से कुछ शर्तों पर रिहा किए जाने की बात कही। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि जिन लोगों ने देश में अवैध प्रवेश ले रखा है, उन्हें देश में कैसे रहने दिया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि असम सरकार वहां रह रहे एक लाख से ज्यादा विदेशियों को पकड़ने में नाकाम रही है। असम सरकार उनमें से केवल 900 लोगों को हिरासत में ले सकी है। कोर्ट ने असम के मुख्य सचिव से कहा कि आपको अपने पद पर रहने का कोई हक नहीं है क्योंकि आपने संविधान के उलट हलफनामा दाखिल किया है। हम आपको नोटिस जारी करेंगे।

पिछले नौ अप्रैल को कोर्ट ने कहा कि विदेशियों को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने असम के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे इस बात का हलफनामा दायर करें कि डिटेंशन सेंटर्स से विदेशियों की रिहाई के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि डिटेंशन सेंटर्स में विदेशियों को छोड़ने के लिए जमानत और पुलिस को सूचित करने जैसे उपाय पर विचार करें।

पिछले एक अप्रैल को कोर्ट ने असम में अवैध तरीके से रह रहे विदेशियों को वापस भेजने को लेकर राज्य सरकार के ढीले रवैये पर फटकार लगाई थी। पिछले 13 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने असम सरकार से कहा था कि वह अवैध प्रवासियों के निर्वासन के मामले में गंभीर नहीं है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि आपने इसे मजाक बना दिया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि आपको कोर्ट के 2005 के आदेश को पढ़ना चाहिए, जिसमें कोर्ट ने असम में बाहरी घुसपैठ के खतरे को रेखांकित किया था। इसलिए हम केंद्र सरकार और असम सरकार से जानना चाहते हैं कि वे ये बताएं कि बाहरी घुसपैठ को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान असम सरकार ने कोर्ट को सूचित किया था कि पिछले दस सालों में फॉरेनर्स ट्रिब्युनल ने 50 हजार से अधिक नागरिकों को विदेशी घोषित किया है। जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य के छह डिटेंशन सेंटर्स में करीब 900 लोगों को रखा गया है। इस पर कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार यह बताए कि क्या फॉरेनर्स ट्रिब्युनल की संख्या पर्याप्त है और वे किस तरह से काम कर रहे हैं। पिछले 19 फरवरी को भी इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को फटकार लगाई थी।

Tags:    

Swadesh Digital ( 0 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


Share it
Top