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सूखे काबर में भरा पानी तो परदेश से लौटे मछुआरे

सूखे काबर में भरा पानी तो परदेश से लौटे मछुआरे

बेगूसराय। सूख चुके एशिया फेमस काबर झील में पानी आते ही मछुआरों के चेहरे खिल चुके हैं। काबर सूखने के बाद रोजी रोजगार की तलाश में दिल्ली, पंजाब, बंगाल और असम गए मछुआरे काबर में पानी भरने की सूचना परिजनों से मिलते ही वापस आ गए हैं। लबालब भरे पानी से काबर में हरियाली छा गई है। सैकड़ों नाव दिनभर इधर से उधर मछली मारने के लिए चक्कर लगा रही है।

कहीं अरसी लगाया जा रहा है तो कहीं फानी, कहीं मछली मारने के लिए जाल बिछाया जा रहा है तो कहीं मछलियों की एक साथ घेराबंदी की जा रही। खांजहांपुर, चेरिया वरियारपुर, करोड़, मेहदा शाहपुर, चेरिया वरियारपुर, गढ़खौली, मणिकपुर, एकम्बा, परोड़ा, नारायण पीपर, कुंभी, गुआवाड़ी के पांच सौ से अधिक मछुआरे प्रत्येक दिन सुबह से लेकर रात तक लगातार अपने पारंपरिक पेशा को बढ़ावा देने के लिए, बचाने के लिए काबर में नाव चला रहे हैं। अब उन्हें इंतजार है बाहर से आने वाले सैलानियों का, जो कि नाव से एक बार फिर काबर झील का भ्रमण कर सकें।

मछुआरा विजय सहनी, राम अवतार सहनी, सुखदेव सहनी, लूरो सहनी, भोला सहनी, गोपाल सदा, मुसहरू सदा, गोकुल सदा आदि बताते हैं कि प्राकृतिक विपदा के कारण काबर सूख गई थी, तो हम लोग का भी रोजी रोजगार समाप्त हो गया था। जिसके बाद हम सब मजदूरी करने परदेस चले गए। लेकिन इस बार माता जयमंगला की कृपा से इंद्रदेव ने काबर में फिर जल भर दिया है तो सूखे काबर में माता जयमंगला के ही कृपा से मछली भी आ गई है। सिमरा, चातर, बनछही, महालय, कोचालय, कुआंडोभ, लहरघाट, मगरदाहा में पानी भर चुका है। अब हम लोगों का रोजी रोजगार शुरू हो चुका है। काबर से सिंधी, पोठी, के, गिलास कप आदि मछलियां निकल रही है। अभी मछलियां छोटी है लेकिन जिस तरह से पानी का जमा हुआ है तो जल्द ही वह बड़ी हो जाएगी। सूखे काबर में बड़ी संख्या में किसानों ने धान, मक्का आदि की फसल लगाई थी जो कि मछलियों के चारा के काम आ रहे हैं।

दूसरी ओर काबर सूखने से किसानों के चेहरे खिल गए थे। 15 हजार हेक्टेयर से अधिक में फैला काबर जब सूख गया था तो किसानों ने बड़ी संख्या में फसलें लगाई थी। जो कि पानी भरने के बाद डूब गई है इसे निकालने के लिए किसान जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। बता दें कि बेगूसराय जिला में स्थित काबर झील कभी एशिया में मीठे पानी का सबसे बड़ा झील रहा। इसे दस रामसेट साइट में शामिल यह पक्षी विहार बनाया गया था। जहां की बड़ी संख्या में विदेशी साइबेरियन पक्षी प्रवास करने आतेे थे। मछलियां की 30 से अधिक प्रजाति यहां पाई जाती थी। मछली और पक्षी के साथ-साथ सालों भर पानी रहन के कारण बड़ी संख्या संख्या में यहां पर्यटक भी आते थे। लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण पिछले साल यह पूरी तरह से सूख गया था।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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