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वर्तमान की आवश्यकता जैविक खेती

मेरे लिए जैविक खेती पशु कल्याण जितनी ही महत्वपूर्ण है। दोनों हजारों प्रजातियों को बचाते हैं और संसार को मनुष्यों के लिए बेहतर जगह बनाते हैं।

वर्तमान की आवश्यकता जैविक खेती

मेरे लिए जैविक खेती पशु कल्याण जितनी ही महत्वपूर्ण है। दोनों हजारों प्रजातियों को बचाते हैं और संसार को मनुष्यों के लिए बेहतर जगह बनाते हैं। जब मैं महिला और बाल विकास मंत्री बनी, तो हमने एक नई परियोजना शुरू की - हम 15 दिनों के लिए दिल्ली हाट में एक वार्षिक मेला आयोजित करते हैं, जो इसके लिए सबसे अच्छा स्थान है, जिसमें समूचे भारत से 300 से अधिक आर्गेनिक महिला किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बुलाया जाता है। इस वर्ष हमने 2 करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे थे। हम 50 महिलाओं को सृष्टि द्वारा अहमदाबाद में आयोजित एक विशाल आर्गेनिक मेले में भी भेजते हैं और अब हम फरवरी में मुंबई में ऐसे एक मेले के लिए तैयारी कर रहे हैं।

मैं यह भी सुनिश्चित करती हूं कि एक या अधिक महिला जैविक किसानों, या समूह, को भारत में महिलाओं के लिए सर्वोच्च पुरस्कार, नारी शक्ति पुरस्कार मिले। वर्ष 2016 में मैं जिस सबसे अच्छी प्रदर्शनी में गई थी वह भारत की घुमन्तु किसान प्रजातियों पर और उनके सांस्कृतिक रूपों, ऊंटों और उनके दूध को संरक्षित करने वाले कई एनजीओ द्वारा आयोजित की गई थीं। इस साल मेरे द्वारा देखी गई सबसे अच्छी प्रदर्शनी नोएडा में एक विशाल आर्गेनिक प्रदर्शनी थी जिसमें 700 से अधिक कंपनियों, संस्थानों, एनजीओ और लोगों ने भाग लिया था। यह ओएफएआई द्वारा आयोजित की गई थी जिसका मुख्यालय गोवा में है और जिसके प्रमुख डा.क्लॉड अल्वारेस हैं। मैंने अपनी बहन के लिए लाल रत्ती (किसी समय पर सोने का वजन करने के लिए प्रयुक्त) और सफेद वैजयंती बीज से एक किसान की पत्नी द्वारा बनाई गई बालियों की एक खूबसूरत जोड़ी खरीदी। सिक्किम मंडप सबसे प्रभावशाली था और सिक्किम के मुख्यमंत्री को पूरे राज्य को आर्गेनिक बनाने के लिए किए गए कार्यों हेतु भारत रत्न मिलना चाहिए।

चावल की सैकड़ों किस्में थीं, जिनमें से एक को उबालने की जरूरत नहीं होती है, बस गर्म पानी डालने से काम चल जाता है। मैंने पहले कभी नहीं देखी गई सब्जियां देखीं - विशाल लंबे, सफेद, बैंगन, कद्दू, ककड़ी और मिर्च की हरेक किस्म। मैंने लाल आलू और सफेद से बैंगनी तक की राजमा की कम से कम 50 किस्मों को देखा। जब मैंने गांव की सब्जियों वाला दोपहर भोजन खाया, तो सोचा कि मैं मर कर खाने के स्वर्ग में पहुंच गई! मैं चाहती हूं कि आप इन महिलाओं को जानें, जिन्होंने लंबे समय से भुला दी गई सब्जी किस्मों के पुराने बीज इकट्ठा करके हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी है।कर्नाटक के सिरसी में वनस्त्री मलनाड गार्डन एण्ड सीड सेवर्स कलेक्टिव को महिलाओं द्वारा चलाया जाता है। उन्होंने टिनी स्पैरो भिंडी से लेकर गन्ने की पुरानी किस्मों तक, सब्जियों की 120 किस्मों को प्रलेखित किया है। ये सभी विरासती बीज हैं।

अन्नदाना संगिता शर्मा द्वारा शुरू किया गया कर्नाटक का एक एनजीओ है। पिछले कुछ वर्षों से यह धारणीय कृषि प्रथाओं को व्यवहार में ला रहा है तथा लोगों को उन्हें सिखा रहा है और 200 से अधिक सब्जी के पुराने बीजों का संरक्षण कर रहा है। उन्होंने महसूस किया कि बीज निगम और कृषि संस्थान बीजों में विषैले पदार्थों, रसायनों और कीटनाशकों को मिला रहे थे, जिससे सभी खाद्य पदार्थ संदूषित हो रहे थे। इसलिए उन्होंने बीज एकत्र करने, उगाने और उन्हें किसानों को वितरित करने का फैसला किया। अब तक उन्होंने सीमांत किसानों को 3 लाख मुफ्त बीज पैकेट वितरित किए हैं और उन्हें बागवानी का शौक रखने वाले लोगों को कम कीमत पर बेच रहे हैं। मिट्टी के स्वास्थ्य प्रबंधन पर उनके पास एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसे सीड-टू-सीड कहा जाता है। उनके कोर समूह में अब 18 किसान हैं जो इस बारे में सिखाते हैं।

निरंजना मारू वर्धा से हैं और उन्होंने चेतना विकास नामक एक एनजीओ का गठन किया है। उनके पास पेड़, घास, कंद तथा चारे का एक प्रदर्शन फार्म है और वह स्थानीय किसानों को एक मिश्रित फसल प्रणाली सिखा कर बंजर भूमि के पुनरूद्धार पर ध्यान केंद्रित करती है। साबरमती टीकी, प्रो.राधामोहन की बेटी हैं जिन्होंने नयागढ़ में अवक्रमित भूमि खरीदी और, लोगों द्वारा असंभव कहे जाने के बावजूद, इसे फिर से उपजाऊ बनाने का फैसला किया। उन्होंने खेत को रुंं१ें३्र@ॅें्र'.ूङ्मे नाम दिया। साबरमती और उनकी टीम ने इस खेत में 314 परम्परागत चावल की किस्मों को उगाया और उसके बीज उड़ीसा के किसानों को वितरित किए।

पैबल गार्डन एक भूमि पुनरूद्धार परियोजना है जो दीपिका कुंडजी द्वारा 7 एकड़ की लेटराइट मिट्टी पर शुरू की गई थी, जहां भारी कटाव के चलते मिट्टी की ऊपरी परत बिल्कुल समाप्त हो गई थी। उन्होंने और उनके भागीदार ने मिल कर पुराने जंगल को वापिस लगाया, जलराशियां बनाई, आर्गेनिक गाद तथा आस-पड़ोस के रसोई कचरे को डाल कर मिट्टी को फिर तैयार किया। आज उस भूमि में सब्जियों, जड़ी बूटियों और औषधीय पौधों की 80 किस्में पैदा होती है, जिनमें से कई लुप्तप्राय हैं और बाजारों में कभी नहीं देखी जाती। इन पौधों के बीज अन्य किसानों और बीज बचतकर्ताओं के साथ साझा किए जाते हैं।

मोहिनी भीस्ट रायगढ़, नैनीताल से आती हैं और जन प्रेरणा संगठन नामक महिला किसानों के नेटवर्क का हिस्सा हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने और उनके दोस्तों ने पारंपरिक बीज की खोज शुरू की। उन्होंने स्थानीय गेहूं, बाजरा, मक्का, जौ और सब्जियों के बीज का एक बैंक बनाया है, जहां से किसान खुले-आम बीज ले सकते हैं बशर्ते वे फसल के बाद दुगनी मात्रा को लौटा दें।

डा. वंदना शिवा का योगदान कौन भूल सकता है, जो 1984 से गैर-हिंसक खेती और जैव विविधता के लिए लिख रही और काम कर रही हैं। वह 5,000 फसल किस्मों के संरक्षण में सक्रिय रूप से शामिल हैं, उनमें से 3,000 प्रकार के चावल, 150 प्रकार के गेहूं, 150 प्रकार के राजमा और बाकी सब्जियां और दालें हैं। उनका शेरपुर, उत्तराखंड में 45 एकड़ जमीन का अपना बीज बैंक है। मैं नवदान्या से अपने कई मासिक राशन खरीदती हूं।

इस साल दिवाली के लिए, मैंने उपहार के रूप में बेकार मिठाई/मूर्तियां/गणेश/खजूर या बादाम नहीं दिए। मैंने समूचे भारत में छोटे आर्गेनिक किसानों से आर्गेनिक अनाज, दालें, जाम, अचार खरीदे और इन्हें दिया। कहने की आवश्यकता नहीं है कि प्रत्येक प्राप्तकर्ता पहले से अधिक खुश था। आखिरकार, हम में से प्रत्येक को अच्छा खाना पसंद है और उदाहरण के लिए आर्गेनिक जंगली चावल का स्वाद अद्भुत था! हम भी सुरक्षित महसूस करना पसंद करते हैं - कि हमारा खाना हमें कैंसर नहीं कर रहा है। और हम केवल तभी ऐसा कर सकते हैं जब हम गैर-रासायनिक, गैर विषैले भोजन पर जोर दें। यदि आप किसी किसान को जानते हैं, तो उन्हें यह बदलाव लाने के लिए कहें। स्टार्टर उपहार के रूप में, आप इन महिलाओं से बीज खरीद कर उन्हें किसानों को दे सकते हैं।

दो हिंदी लोकोक्तियां हैं - कठिया गेंहू करगी धान, जो बोवे वह चतुर किसान। कठिया गेहूं और करगी चावल (दोनों आर्गेनिक पुरानी किस्मों वाले) उगाने वाले किसान चतुर हैं क्योंकि ये दोनों शुष्क, वर्षा सिंचित स्थितियों में पैदा हो सकते हैं।

कोदों करे भले में छोटे, छोटे बड़े भरते पेट - कोदों, जो एक प्रकार का मोटा अनाज है, भले ही आकार में छोटा हो सकता है लेकिन यह प्रतिकूल परिस्थितियों में बच्चों से बुजुर्गों तक सभी का पेट भरता है।

शामिका मोने ने भारत के आर्गेनिक बीजों पर एक स्रोत पुस्तक लिखी है। आपको निश्चित रूप से इसे ओएएआई, मैपूसा, गोवा से े८ङ्मां्र@ॅें्र'.ूङ्मे के माध्यम से खरीदना चाहिए।

( लेखिका केन्द्रीय मंत्री व पर्यावरण विद् हैं )


मेनका गांधी ( 5 )

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