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लाखों खर्च, आवारा पशुओं का सड़कों पर आतंक

बीते वर्ष एक छात्रा की जान ले चुकी है पशुओं की लड़ाई

ग्वालियर,न.सं.। शहर में आवारा पशुओं के चलते हो रहे हादसे के बाद भी नगर निगम प्रशासन चेता नहीं है। बीते वर्ष मई माह में शिंदे की छावनी में सांडों के संघर्ष में हुई छात्रा की मौत के बाद भी निगम प्रशासन की नींद अभी तक नहीं खुली है। सड़कों पर जगह जगह आवारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। जिसके चलते फिर कोई बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि इन आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए निगम का अमला अलग से तैनात है जो केवल खानापूर्ति करता है। शहर में गाय, सांड एवं श्वानआदि आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए निगम द्वारा मदाखलत अमले पर लाखों रुपए हर माह खर्च करती है। लेकिन समस्या जस की तस बनी है। इसका प्रमुख कारण है कि शहर में अलग अलग विभागों के अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव है जिसके चलते इन आवारा जानवरों के बीच से होकर आला अधिकारियों के वाहन तो गुजर जाते हैं पर कोई भी इसकी शिकायत निगम आयुक्त या अमले से नहीं करता है। जिसके चलते वह कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते हैं।

इन क्षेत्रों में आवारा जानवर

समाधिया कॉलोनी, तारागंज, सिटी सेंटर, मुरार, सब्जी मंडी, गोले का मंदिर, स्टेशन रोड, चेतकपुरी आदि।

तत्कालीन जिलाधीश ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश

बीते वर्ष मई माह में सांडों की लड़ाई में गई छात्रा की जान के बाद शहरवासियों में दहशत फैल गई थी। जिस पर तत्कालीन जिलाधीश डॉ. संजय गोयल ने नगर निगम को अभियान चलाकर आवारा पशुओं को पकड़ने के निर्देश दिए थे। अभियान निगम ने चलाया भी और आवारा पशुओं को पकड़ा भी, लेकिन कुछ दिनों बाद ही आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान बंद कर दिया गया।


चेतकपुरी पर देर रात महिला के पीछे लगाई दौड़

शहर में सांडों का आतंक जारी है। बीते शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात को चेतकपुरी के पास एक सांड ने जमकर उत्पात मचाया। पहले उसने बीच सड़क पर दौड़ लागकर लोगों को डराया, इतना ही नहीं बाद में सांड ने एक महिला के पीछे दौड़ लगा दी। लेकिन महिला की होशियारी से महिला बाल-बाल बच गई।

सबसे ज्यादा वीआईपी सड़कों पर आतंक

शहर की वीआईपी रोड पर तो इन जानवरों का आतंक देखते ही बनता है। बीच सड़क पर झुण्ड के रूप में खड़े ये जानवर अक्सर यातायात में बाधा खड़ी कर देते हैं। इस सड़क पर दिन में कई बार बड़े प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन वे भी इनको नजर अंदाज करते हुए निकल जाते हैं। यही हाल सिटी सेंटर,गोले का मंदिर, पड़ाव, चेतकपुरी आदि क्षेत्रों का है। कई बार तो इन जानवरों के बीच जब लड़ाई होती है तो माहौल बड़ा भयानक हो जाता है। लोगों को बचने के लिए इधर- उधर भागना पड़ता है और कई लोग चोटिल भी हो जाते हैं।

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