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यात्री कर रहे टॉवल चोरी, अटेंडेंट के वेतन से कट रहे पैसे

यात्री कर रहे टॉवल चोरी, अटेंडेंट के वेतन से कट रहे पैसे


ग्वालियर, न.सं.। ट्रेनों में एसी क्लास में यात्रा करने वालों की गिनती समझदार और हायर क्लास यात्रियों के रूप में होती है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि ऐसे यात्री ट्रेनों में मिलने वाले फेस टॉवल (तौलिया) और चादर साथ ले जाने में भी माहिर हैं। प्रत्येक ट्रेन की बोगी से प्रतिदिन पांच फीसदी फेस टॉवल गायब हो जाते हैं। इसके साथ ही एक-दो चादर भी कम मिलते हैं। इससे कोच अटेंडेंट परेशान हैं कि पढ़े-लिखे पैसे वाले यात्री भी चंद रुपयों का सामान चोरी कर ले जाते हैं, जिसकी कीमत अटेंडेंट को अपने वेतन से देना पड़ती है। ऐसे मामले घटने की बजाय और बढ़ रहे हैं, जिससे अटेंडेंट परेशान हैं। ट्रेनों की एसी बोगियों में यात्रा करने वाले यात्रियों को बेडरोल (चादर), कम्बल, तकिया और फेस टॉवल दिया जाता है। ये चीजें यात्रियों को सिर्फ उपयोग के लिए मिलती हैं। यात्रा पूरी होने पर इसे बर्थ पर छोड़ने का नियम है, लेकिन यात्रियों तक यह सुविधा पहुंचाने वाला कोच अटेंडेंट कुछ यात्रियों की हरकतों से परेशान है। दरअसल यात्री इसे किराए की राशि में मिलने वाली सुविधा मानकर या फिर कहें कि जानबूझकर अपने बैग में रख ले जाते हैं। गिनती में चादर और फेस टॉवल कम मिलते हैं, जिसकी कीमत अटेंडेंट को अपने वेतन से चुकाना पड़ती है।


इसलिए टॉवल देने से कतराते हैं अटेंडेंट

छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के कोच अटेंडेंट ने बताया कि अधिकांश अटेंडेंट यात्रियों को फेस टॉवल देने में कोताही बरतता है। इसका कारण यही है कि सबसे ज्यादा टॉवल ही गायब होते हैं। हर फेर में पांच फीसदी टॉवल कम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए एक बोगी के लिए 100 टॉवल दिए गए हैं तो उनमे से पांच टॉवल गायब मिलते हैं। एक टॉवल की कीमत 25 रुपए है। यह राशि अटेंडेंट के वेतन से कटती है। चादर गायब हो तो 125 रुपए की दर से राशि कटती है।

एसी थ्री में ज्यादा मामले

अटेंडेंट बताते हैं कि एसी थ्री टायर में सबसे ज्यादा टॉवल व चादर गायब होते हैं। हालांकि हायर क्लास में भी टॉवल व चादर गायब होते हैं, लेकिन इसकी संख्या थ्री टायर के मुकाबले कम है।

देखने के बाद भी चुप रहते हैं अटेंडेंट

एक अटेंडेंट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कभी-कभी तो यात्री हमारे सामने ही तौलिया बैग में रख लेते हैं। उनसे कुछ कहो तो वे झगड़ पड़ते हैं। ऐसे में चुप रहना ही बेहतर है।

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