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शराब ठेकों में भोपाल संभाग शिखर पर, इंदौर-ग्वालियर की हालत खराब

शराब ठेकों में भोपाल संभाग शिखर पर, इंदौर-ग्वालियर की हालत खराब

आज खुलेंगे शेष बचीं 1200 करोड़ की शराब दुकानों के टेंडर

ग्वालियर |
मध्यप्रदेश में नवीनीकरण और दो चरण की टेंडर प्रक्रिया में आवंटन से वंचित रह गर्इं प्रदेशभर की लगभग 1200 करोड़ रुपये कीमत की 470 देशी और 170 विदेशी मदिरा दुकान समूहों के टेंडर आज खोले जाएंगे। खास बात यह है पूर्व में दो बार की टेंडर प्रक्रिया में जहां इंदौर और ग्वालियर संभागों का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। वहीं भोपाल संभाग में मात्र 77 करोड़ की 28 देशी व 9 विदेशी मदिरा शेष रही हैं।

प्रदेशभर में शेष बचीं 470 देशी और 170 विदेशी मदिरा दुकानों के लिए टेंडर बुधबार 21 मार्च को दोपहर 3 बजे तक डाले जाएंगे और टेंडर इसी दिन सायं 5 बजे खोले जाएंगे। शराब के ठेकों में इस बार संभागों की बात करें तो सर्वाधिक खराब स्थिति इंदौर ग्वालियर संभाग की रही है। नवीनीकरण के अलावा दो बार की टेंडर प्रक्रिया के बाद भी इंदौर संभाग में 378 करोड़ की 106 विदेशी व 51 देशी एव ग्वालियर संभाग में 228 करोड़ की 154 देशी और 38 विदेशी मदिरा दुकानों के ठेके नहीं हो सके हैं। उल्लेखनीय है कि मदिरा दुकानों के आवंटन में अच्छा काम नहीं करने पर प्रमुख सचिव ने पिछले वर्ष झाबुआ और धार जिले के जिला आबकारी अधिकारियों को हटा दिया था। इस वर्ष भी भिण्ड जिले के जिला आबकारी अधिकारी को भी अच्छे परिणाम नहीं देने के कारण हटा दिया गया है। इंदौर संभाग में संजय तिवारी और ग्वालियर संभाग में शैलेश सिंह उपायुक्त संभागीय उड़नदस्ता के पद पर हैं। सवाल उठता है कि ग्वालियर और इंदौर संभाग में शेष बची दुकानों का निष्पादन आज नही हो पाता है तो क्या प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव इन संभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे?

‘सोम’ को लेकर असमंजस में सरकार अटके प्रदाय व्यवस्था के आदेश
देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था के लिए स्वीकृत हो चुके डिस्टलरीज के टेंडर भलें मंत्रिमण्डलीय उप समिति द्वारा स्वीकृत कर लिए गए हों, लेकिन काली सूची में शामिल सोम डिस्टलरीज लिमिटेड को नियम विरुद्ध हुए टेंडरों को लेकर सरकार असमंजस में है। यही कारण है कि मंत्रिमण्डलीय उप समिति से अनुमति मिल जाने के बावजूद डिस्टलरीज को वितरण आदेश संबंधी अनुमति पत्र शासन की ओर से आबकारी आयुक्त कार्यालय में नहीं भेजा गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए नए सिरे से हुए टेंडर के बाद देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था एक अप्रैल से संबंधित डिस्टलरीज को करनी है। शासन से अनुमति पत्र मिल जाने के बाद ही आबकारी आयुक्त डिस्टलरीज को वितरण व्यवस्था का अनुमति पत्र प्रदान कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि काली सूची में शामिल सोम डिस्टलरीज को नियम विरुद्ध ठेका दिलाने वाले आबकारी आयुक्त ने मंत्रिमण्डलीय उप समिति के समक्ष भी उन सभी तथ्यों को प्रस्तुत नहीं किया, जिनके अनुसार नई आबकारी नीति के अनुसार काली सूची में शामिल सोम डिस्टलरीज को देशी मदिरा प्रदाय व्यवस्था का ठेका भी नहीं दिया जा सकता। हालांकि सोम डिस्टलरीज को नियम विरुद्ध ठेका दिलाने वाले आबकारी आयुक्त अरुण कोचर सेवानिवृत्ति के बाद भी लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच में फंस सकते हैं। सोम को अनुचित लाभ पहुंचाने को लेकर लोकायुक्त और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में आबकारी आयुक्त की शिकायत पहुंच चुकी है। शीघ्र ही इसमें जांच शुरू होने की बात कही जा रही है।

इनका कहना है

‘आप इसकी चिंता क्यों करते हैं कि किस पर कार्रवाई करनी है किस पर नहीं। किस पर क्या कार्रवाई करना है, यह मुझ पर छोड़ दो। यह आपकी चिंता का विषय नहीं है।’

मनोज श्रीवास्तव
प्रमुख सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग
म.प्र. शासन

‘सोम डिस्टलरीज के भ्रष्टाचार और सरकार द्वारा दिए जा रहे संरक्षण को मैंने विधानसभा में उठाया था। ‘स्वदेश’ में छपी खबरों को विधानसभा में रखा था। विधानसभा में मंत्री ने इस पर जवाब नहीं दिया। लेकिन हम यह मुद्दा तब तक उठाते रहेंगे जब तक कार्रवाई नहीं होगी। ’

डॉ. गोविन्द सिंह, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक लहार

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