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विदेश मंत्रालय ने जारी की मालदीव को लेकर ‘ट्रेवल एडवाइजरी’

विदेश मंत्रालय ने जारी की मालदीव को लेकर ‘ट्रेवल एडवाइजरी’

नई दिल्ली। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने हिन्द महासागर में स्थित मालदीव को लेकर यात्रा चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने सभी भारतीयों को मालदीव की यात्रा करने से फिलहाल बचने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अभी मालदीव में हालात ठीक नहीं हैं, ऐसे में भारतीय मालदीव जाने से बचें। मंगलवार को जारी ‘ट्रेवल एडवाइजरी’ में कहा गया है कि मालदीव में राजनैतिक हालात और लॉ एंड ऑर्डर को लेकर भारत सरकार चिंतित है। ऐसे हालात में भारतीयों को हालात ठीक नहीं होने तक मालदीव की यात्रा टालने का सुझाव दिया जाता है। साथ ही मालदीव में रह रहे भारतीयों को सुझाव है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर चौकस रहें और सार्वजनिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।

हिन्द महासागर में बसे द्वीप के देश मालदीव में पिछले कुछ दिनों से हालात बेकाबू हो गए हैं। मालदीव में राजनीतिक संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। वहां की सरकार ने देश में सोमवार को आपातकाल घोषित कर दिया, लेकिन इससे कुछ देर पहले राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने देश की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद, न्यायाधीश अली हमीद और पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम को गिरफ्तार करवा लिया। इससे पहले स्थानीय सरकार ने अदालत के फैसले को मानने से इंकार करते हुए संसद को स्थगित कर रखा है। देश की सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे मानने से राष्ट्रपति यमीन ने मना कर दिया। भारतीय समय के मुताबिक, सोमवार शाम राष्ट्रपति की सहयोगी अजिमा शुकूर ने देश में आपातकाल की घोषणा की।

उल्लेखनीय है कि अब्दुल्ला यमीन साल 2013 से देश के राष्ट्रपति हैं, लेकिन उनके ऊपर भारत और अमेरिका का दबाव है कि वह कैद की सजा पाए पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद को रिहा करे। नाशीद के अलावा 8 अन्य राजनीतिक लोगों को भी रिहा करने का दबाव सरकार पर है। इससे पहले, सोमवार को यमीन ने कहा था कि कानूनी संकट के कारण सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक विरोधियों के रिहा करने के आदेश के पालन पर अमल करने में समस्या आ रही है।

विदित हो कि 2012 में इस द्वीप के चुने हुए पहले लोकतांत्रिक राष्ट्रपति नाशीद की गिरफ्तारी के बाद से राजनीतिक संकट बना हुआ था। उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर किया गया। उसी साल यमीन ने चुनाव में नाशीद को हरा दिया, जिससे राजनीतिक तनातनी और बढ़ गई। यमीन के राष्ट्रपति बनने के बाद उन पर आतंकवाद फैलाने के आरोप लगाए गए। नाशीद को जनवरी, 2016 में इलाज के लिए इंग्लैंड जाने की इजाजत मिल गई और उसके बाद से निर्वासन में ही रहे और फिलहाल श्रीलंका में रह रहे हैं।

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