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क्रिकेट संसार में यंगिस्तान की खलबली

क्रिकेट संसार में यंगिस्तान की खलबली

-रमेश ठाकुर

भविष्य में विश्व क्रिकेट जगत पर राज करने के लिए हिंदुस्तान में खिलाडिय़ों की नई टीम तैयार हो गई है। उन्नीस साल के लडक़ों ने अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतकर क्रिकेट की दुनिया को ललकार दिया है कि भविष्य में उनकी बादशाहत होने वाली है। वर्ल्ड कप के फाइनल में हमारे लडक़ों ने धुरंधर टीम को धूल चटाकर खिताब पर अपनी हुकूमत कामय कर ली। भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में बिना कोई मैच हारे खिताब पर शान से अपना नाम दर्ज कराया। उनके इस करिश्माई जीत पर पूरा देश गद्गद् है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर, उघोगपतियों, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी, फिल्मी सितारे आदि नामचीन लोगों ने नवभारत की उदय होती नई पौध के इन खिलाडिय़ों को बधाई दी है। पूरे देश से इन खिलाडिय़ों के लिए बधाईयों का तांता लगा हुआ है। खिलाडिय़ों के घरों पर ढोल-नगाड़े बजाए जा रहे हैं। लोग खुशी से झमू रहे हैं और अपने आस-पड़ोस मिठाईयां बांट रहे हैं। मिठाईयां बंटे भी क्यों न, इतनी बेहतरीन जीत जो देश को दी है। लडकों की इस कामयाबी पर पूरा मुल्क गौरवान्वित महसूस कर रहा है। पिछले कुछ सालों से विश्व क्रिकेट में भारत का डंका बजा हुआ है। सिलसिला आगे भी ऐसा कायम रहेगा, इस बात के संकेत इस जीत ने दे दिए हैं। खिलाडिय़ों के घरों में मीडिया वालों का हुजूम लगा हुआ। अपने बेटों की कामयाबी पर घर वाले भी फूले नहीं समा रहे।

इस बेहतरीन जीत की सबसे बड़ी वजह भारत के पूर्व कप्तान व अंडर-19 टीम के मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ का गणित व अनुशासन माना जा रहा है। क्रिकेट की दुनिया में दीवार के नाम से पहचाने जाने वाले द्रविड़ ने अपना पूर्व का अुनभव झोंक दिया था, जिसका नतीजा हमारे सामने है। पूरे टूर्नामेंट में उनकी तकनीकी तैयारियों की चमक खेल के हर विभाग में विरोधी टीमों को हराने में देखने को मिली। द्रविड़ वर्ष 2015 से भारत ‘ए’ और अंडर-19 टीम को कोचिंग दे रहे हैं। वह दुनिया के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जो 150 टेस्ट खेलने के बाद भी जूनियर टीम के साथ हैं और अपने खिलाडिय़ों से शानदार प्रदर्शन करवा रहे हैं। देखने को मिलता है कि ज्यादातर सीनियर खिलाड़ी जूनियरों से जुड़ाव नहीं रखते। द्रविड़ की सोच दूसरों से अलहदा रहती है। फाइनल में जीत की पटकथा कैसे लिखी गई, इस पर बात करें तो भारत की जीत का सबसे पहला कारण गेंदबाजी रही। फाइनल मैच में हमारे गेंदबाजों ने कंगारुओं पर चौतरफा दबाव बनाए रखा। हिंदुस्तान के पांच गेंदबाजों को बड़ी सफलता मिली। ईशान पोरेल, शिवा सिंह, अनुकूल रॉय ओर कमलेश नागरकोटी ने दो दो विकट लिए. जबकि शिवम मावी को एक विकेट मिला। भारत के गेंदबाज समय-समय पर विकेट गिराते रहे, जिससे ऑस्ट्रेलिया टीम दबाव में रही और बड़ा स्कोर नहीं बना सकी।

गेंदबाजी में झंडे बंलुद करने के बाद मौका आया बल्लेबाजी का। बल्लेबाजी में भी भारतीय खिलाडिय़ों ने धूम मचा दी। भारतीय टीम का दस ओवर तक कोई विकेट नहीं गिरा। विकेट नहीं गिरने से भारतीय खिलाडिय़ों का हौसला और बुलंद हो गया। पहला विकेट कप्तान पृथ्वी शॉ के रूप में गिरा। पर, उस नुकसान से टीम दबाव में नहीं आई बल्कि मनजोत और उप-कप्तान शुभमन गिल मैदान पर जमकर डटे रहे हैं। दोनों ने चारों ओर रन बनाए। स्कोर बोर्ड पर लगाातर रन जुड़ते रहे। इससे विरोधी टीम का मनोबल धीरे-धीरे जबाव देने लगा। 22 वें ओवर में भारत का दूसरा खिलाड़ी आउट हुआ। लेकिन मैदान पर दूसरे खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ अपनी गति से रन बनाते गए। जीत का एक कारण ऑस्ट्रेलियन टीम का कमजोर प्रदर्शन भी माना जा रहा है। खासतौर पर कंगारू गेंदबाज शुरू से ही भारतीय बल्लेबाजी पर दबाव बनाने में नाकाम रहे। इसका पूरा फायदा टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने उठाया। वहीं मनजोत कालरा पर भी कंगारू गेंदबाज किसी प्रकार का अंकुश लगाने में नाकामयाब रहे। उनके चौकों-छक्कों ने कंगारूओं की कमर ही तोडक़र रख दी। भारतीय खिलाड़ी अपने निराले अंदाज में रन जोड़ते रहे। खेल चालीस ओवर तक पहुंचने से पहले ही निर्णय बता चुका था।

लडक़ों की इस जीत पर बीसीसीआई ने दिल खोलकर इनामों की झड़ी लगा दी है। दरअसल बीसीसीआई का यह उत्साहवर्द्धन खिलाड़ियों को नई संजीवनी देने का काम करेगा। वर्ल्ड कप जीतने वाले सभी 16 खिलाडिय़ों को बीसीसीआई की तरफ से पुरस्कारों का एलान किया गया है। बीसीसीआई अंडर-19 भारतीय टीम के हर खिलाड़ी को 20-20 लाख रुपये देगी। इसके साथ ही भारतीय टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ को 50 लाख रुपये का इनाम मिलेगा। सहायक स्टॉफ को भी 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे। दरअसल करिश्माई जीत के बाद ऐसा सम्मान देना बनता भी है। उम्मीद करनी चाहिए कि लडक़े अपने प्रदर्शन को भविष्य में भी ऐसे ही बरकरार रखेंगे और भारत का नाम रौशन करते रहेंगे।

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