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खंडवा: मासूम को छोड़ भागी निर्दयी माँ, समाजसेवियों ने दिया पद्मिनी नाम

खंडवा: मासूम को छोड़ भागी निर्दयी माँ, समाजसेवियों ने दिया पद्मिनी नाम

खंडवा। किस्मत या कहें नसीब की परिभाषा अब तक कोई नहीं गढ़ पाया। खुद इसके रचयिता चित्रगुप्त भी नहीं। सूनी गोद भरने के लिए कोई मंदिर, गिरजाघरों और मजारों पर माथे टेकते नहीं थकता। तो किसी को बिन माँगे ऐसी फरियाद मिल जाती हैं। खंडवा रेलवे स्टेशन पर 21 जनवरी को रात्रि में कुछ ऐसा ही हुआ। 15 दिन की नवजात को उसकी माँ रेलवे स्टेशन पर कडक़ड़ाती ठंड में प्लेटफार्म पर पटक गई। रेल पुलिस तक जानकारी पहुंची। सामाजिक संस्थाओं ने जिला अस्पताल पहुंचाया। बुरहानपुर की बाल कल्याण समिति जांच कर गई। अब इसे इंदौर की संस्था के सुपुर्द किया जाएगा। इसी बीच सैकड़ों लोगों को पता चला तो वे बच्ची को अपनाने दौड़ पड़े। लेकिन कानून के दायरे में ही बच्ची को अदालत के जरिये गोद दिया जाएगा। घटना पर सवाल कई उठ खड़े हुए। पाजिटिव यह था कि माँ शब्द ही बहुत बड़ा है। फिर उसने क्यों अपने खून से सींचकर जिसे बनाया, उसे छोड़ गई। उस माँ की भी कुछ तो मजबूरी रही होगी।

बच्ची को बाल आश्रय इंदौर भेजा जाएगा...

नवजात बालिका को गहन चिकित्सा इकाई में डाक्टर कृष्णा वास्कले एवं सिस्टर बेशर मादिया, आयुषी, लक्ष्मी, सुरली, भारती, सुरेखा की देखरेख में रखा गया एवं लगातार उसके स्वास्थ में सुधार हो रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने भी नियमित रूप से उसकी देखरेख कर रहे हैं। बच्ची जिस दिन आई थी उसका वजन 2.7 किग्रा था। बाल कल्याण समिति बुरहानपुर की टीम बालिका को देखने पहुंची तब बच्ची स्वस्थ होकर उसका वजन 2.42 किग्रा था। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रघुुनाथ महाजन, समिति सदस्य बेला तारकश, मंसूर सेवक, संदीप शर्मा, समाजसेवी सुनील जैन, महिला शक्तिकरण अधिकारी मनोज कुमार दिवाकर, राजकुमार साहू ने बच्ची के हाल जाने उसका नामकरण पद्मिनी के रूप में किया। नवजात को तीन-चार दिनों में बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार बाल आश्रय इंदौर भेजा जाएगा।

बेटी अभिशाप नहीं वरदान है...

समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि सरकार का पूरा ध्यान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर है और सरकारें इसके लिए योजना बना कर काम भी कर रही है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि बेटी अभिशाप नहीं वरदान है लेकिन अज्ञानता व अभिशाप मानकर आज भी कई मां-बाप अपनी दूधमुंही बेटी को मौत के मुंह में एवं अपने हाल पर छोड़ जाते हैं। बेटियों को इस प्रकार छोडना महापाप माना गया है लेकिन आज भी यह अभिशाप चल रहा है। इस घटना की सूचना लोगों ने जीआरपी को दी।

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