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मोदी सुलझा सकते हैं इजरायल-फिलीस्तीन विवाद

मोदी सुलझा सकते हैं इजरायल-फिलीस्तीन विवाद

नई दिल्ली। मणिपुर की राज्यपाल और देश की वरिष्ठ राजनेता नजमा हेपतुल्ला ने विश्वास जताया है कि दशकों से चले आ रहे इजरायल-फिलीस्तीन विवाद के समाधान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। प्रधानमंत्री के फिलीस्तीन के हालिया दौरे और वहां मिले सम्मान से श्रीमती हेपतुल्ला को यह विश्वास पैदा हुआ है। नजमा हेपतुल्ला ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन में पत्रकारों से मुलाकात में यह बात कही।

श्रीमती हेपतुल्ला ने वैसे तो यह मुलाकात मणिपुर के सुधरते हालात और लोगों से मणिपुर आने का आग्रह करने के लिए की। वे चाहती हैं कि भारत के अन्य राज्यों से लोगों को अपने ही देश के पूर्वोत्तर राज्यों में आना चाहिए। उनकी खूबसूरती और संस्कृति को देखना चाहिए। हालांकि उन्होंने माना कि पर्वतीय राज्य होने के कारण और यातायात के समुचित संसाधन न होने के चलते इन राज्यों में आवाजाही आसान नहीं है। कम समय में यातायात का साधन हवाई सेवा ही है, लेकिन उसका सभी लोग उपयोग नहीं कर सकते और गरीब तबके के लिए तो यह पहुंच से दूर ही है।

श्रीमती हेपतुल्ला ने बताया कि मणिपुर की कानून-व्यवस्था अब पहले की अपेक्षा काफी बेहतर है। एक प्रकार से शांति है। हां, युवाओं में नशीले पदार्थों का चलन को रोकना एक चुनौतीपूर्ण काम है। इसी सिलसिले में उन्होंने मंगलवार को केन्द्रीय गृहमंत्री से भी मुलाकात ही। अपने लंबे राजनीतिक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए और फिलीस्तीन तथा इजरायल की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए श्रीमती हेपतुल्ला ने कहा कि यह पहला मौका है जब दोनों देशों ने किसी एक व्यक्ति के प्रति विश्वास व्यक्त किया हो और इतना सम्मान दिया हो। इजरायल के राष्ट्रपति ने भारत यात्रा के दौरान और फिलीस्तीन के प्रधानमंत्री ने नरेन्द्र मोदी की हालिया यात्रा के दौरान जो सम्मान और भरोसा प्रकट किया है, वह अभूतपूर्व है। श्रीमती हेपतुल्ला ने यह भी कहा कि आबूधाबी में मंदिर के लिए वहां की सल्तनत द्वारा जमीन दिया जाना और मंदिर का शिलान्यास हो जाना एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक घटना है। इसका संदेश बहुत दूरगामी होगा।

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