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श्रीराधारमण मंदिर में ब्यावला उत्सव देख आनंदित हुए भक्त

वृन्दावन। सप्तदेवालयों में प्रमुख स्वयंप्रकट ठा. राधारमण के मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय सेवा महोत्सव के पंचम दिवस गायन-वादन-वाचन व नृत्य के साथ ही ठाकुरजी की मनोहारी छटा तथा उनके समक्ष सजाए गए छप्पनभोग की झांकी के दर्शन किए तो भक्तजन आल्हादित हो उठे।

मंदिर के सेवायत पुंडरीक गोस्वामी महाराज के सानिध्य में चल रहे महोत्सव के पंचम दिवस प्रात: भागीरथ भट्ट ने बहुत ही सुंदर सितार वंदना के साथ ठाकुर राधारमणजू को रिझाया, वहीं सितार की मधुर ध्वनि से उपस्थित भक्तजन मंत्रमुग्ध हो गए। साथ ही दिल्ली से पधारे भक्तजनों द्वारा गिरिराजजी के भजन से अपनी राग सेवा से भक्तों को मानसिक परिक्रमा कराई गई। जहां मंदिर प्रांगण में रसामृत बरस रहा था। वहीं महाराजश्री द्वारा वैजयंती गौशाला में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी सेवा प्रदान कर रोगी नारायण को लाभ पहुंचाया। सांय श्रीराधारमण मंदिर में भव्य छप्पनभोग उत्सव की अवर्णनीय झांकी सजाई गई, जिसमें फलों से कमल बनाया गया तथा उसकी पंखुडिय़ां मेवा से बनी हुई थीं। इस अदभुत छटा के दर्शन की शोभा का अवलोकन करने पधारे मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज ने भी सितार की तान से अपना प्रणाम श्रीजी के चरणों में समर्पित किया। साथ ही मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमदभागवत भाव कथा में पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने श्रीगिरिराज लीला पर प्रवचन करते हुए कहा कि हरिदासवरीय श्रीगिरिराजजी प्रियाप्रियतम के रस द्योतक हैं।

इन्हीं को नख पर धारण इन्होंने सभी रसों की आवृत्ति की। तदोपरांत सिधी जोशी ने कथक नृत्य तथा सिरसा से आए कृष्णदास ने भजन 'चीन ले हंस के सबका यह मन...Ó की प्रस्तुति से वातावरण भक्ति के रंग में सराबोर हो गया और उपस्थित भक्तजन आनंदित हो जयघोष करने लगे।

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