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कलेक्टर के पत्रों को तरजीह नहीं दे रहे निगमायुक्त

कलेक्टर के पत्रों को तरजीह नहीं दे रहे निगमायुक्त

सीएम हाउस की समीक्षा का भय नहीं

ग्वालियर, विशेष प्रतिनिधि। लगता है निगमायुक्त, जिलाधीश से वरिष्ठ हैं, इसलिए उनके पत्रों को कोई तबज्जो नहीं दे रहे। निगम के तीन अधिकारियों की जांच के सिलसिले में कलेक्टर के अलावा अपर कलेक्टर भी लगातार निगमायुक्त को पत्र लिखकर दस्तावेज मांग रहे हैं। साथ ही पत्र में यह तक कहा गया है कि इस मामले की सीएम हाउस में समीक्षा की जा रही है, अत: जल्द से जल्द जानकारी उपलब्ध कराएं, किन्तु निगमायुक्त को इन पत्रों का कोई असर अथवा भय नहीं है, जिससे जांच अधर में लटकी हुई है। जानकारी के अनुसार कलेक्टर राहुल जैन ने 25 जुलाई 2017 को एक जांच कमेटी एडीएम शिवराज वर्मा, लोक निर्माण विभाग खण्ड क्रमांक-2 के कार्यपालन यंत्री ज्ञानवर्धन मिश्रा एवं नजूल तहसीलदार भूमिजा सक्सेना की बनाई थी। इस कमेटी को निगम के सहायक यंत्री पवन सिंघल, सत्यपाल चौहान एवं लोकेन्द्र चौहान के खिलाफ भ्रष्टाचार एवं आय से अधिक सम्पत्ति की जांच करना है।

इसके लिए स्वयं कलेक्टर राहुल जैन और एडीएम शिवराज वर्मा के अलावा अपर कलेक्टर दिनेश श्रीवास्तव द्वारा कई पत्र निगमायुक्त विनोद शर्मा को भेजकर जांच के सिलसिले में दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, लेकिन सम्पूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने से यह जांच 6 माह से लटकी हुई है। श्री श्रीवास्तव द्वारा 18 अगस्त, 7 सितम्बर, 4 अक्टूवर, 16 अक्टूबर, 1 नवंबर और 17 नवंबर को पत्र और अर्द्धशासकीय पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई है। इसमें 8 दिसम्बर 2017 को भेजे गए पत्र में यहां तक कहा गया है कि इस मामले की समीक्षा सीएम हाउस में हो रही है और बार-बार कलेक्टर को फोन कर अवगत कराया जा रहा है, अत: जानकारी के संबंध में व्यक्तिगत रुचि लेकर पूर्ण एवं स्पष्ट प्रतिवेदन तीन दिवस के भीतर भिजवाने का कष्ट करें, ताकि वास्तविक स्थिति से राज्य शासन को अवगत कराया जा सके। इसके पहले कलेक्टर राहुल जैन ने 1 नवंबर 2017 क ो भेजे पत्र में संपूर्ण जानकारी एक सप्ताह में मांगी गई थी।

इनका कहना है

निगम के तीन लोगों के भ्रष्टाचार संबंधी मामले की जांच अपर कलेक्टर द्वारा की जा रही है, इस संबंध में निगमायुक्त को पत्र भेजकर संपूर्ण जानकारी मांगी गई है जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

राहुल जैन, कलेक्टर ग्वालियर

जांच के सिलसिले में कलेक्टर, एडीएम और मेरे द्वारा कब और कितने पत्र निगमायुक्त को भेजे गए हैं, इसकी जानकारी कल दे पाऊंगा। कमेटी की बैठक क्यों नहीं हो पा रही, इस बारे में कुछ नहीं बोल सकता।

दिनेश श्रीवास्तव, अपर कलेक्टर

निगम के तीन लोगों की जांच कमेटी में मेरा नाम भी है, मेंने कलेक्टर को पत्र लिखकर सूचित किया है कि जब भी मेरी जरूरत हो में आने को तैयार हूं।

ज्ञानवर्धन मिश्रा, कार्यपालन यंत्री
(लोकनिर्माण विभाग खण्ड-2)

नहीं हो सकी एक भी बैठक

जांच कमेटी के अध्यक्ष पहले एडीएम शिवराज वर्मा थे और अब उनकी जगह आईएएस दिनेश श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन संपूर्ण दस्तावेज नहीं मिलने के कारण जांच कमेटी की एक भी बैठक नहीं हो सकी है। एक तरह से कलेक्टर के पत्रों को निगमायुक्त द्वारा तरजीह नहीं दिए जाने से मामले में गड़बड़झाला दिखाई दे रहा है।

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